Monday, May 9, 2022

सफलता का अध्यात्मिक नियम पार्ट 9

संग का रंग बहुत चढ़ता है। तुम सब रावण की जेल में हो।अशोक वाटिका में बैठे हैं जिससे राम आकार ही बचा सकेंगे।

में और मेरे पन की अलाए खाद को समापत करना ही रियल गोल्ड बनना है।

सब से बहुत मीठी बोली बोलनी है। गलत संग से संभालनी है।

मैं और मेरा  परमात्म इस विधि द्वारा  जीवन मुक्त स्थिति का अनुभव करने  वाले सहज योगी भव।

Saturday, May 7, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम पार्ट 8

तपस्या बड़ा से बड़ा समारोह है। तपस्या से नई दृष्टी नई सृष्टि मिलती है गुणों को दिखने वाली बन जाती है। बोलने का चलने का सोचने का तरीका बदल जाता है। परमात्मा दूर होते पास महसूस होते हैं। देवी गुण आते जाते हैं। हर घड़ी नवीनता आती है।

ज़िंदगी में दुआ लें। दुआ ज़िंदगी को आसान बना देती है। दुखो को टाल देती हैं।
असली घर तो परमात्मा का घर है दुनिया का घर घर तो आपका काम है और काम में तो परेशानी चलती रहती हैं। उन परेशानियों से घबराओ मत।

जो आप बोलते हो उस में सरलता मधुरता सत्यता पवित्रता आनी चाहिए।

हरेक को कुछ ना कुछ देना है। लेना नही है। देने में लेना समाया हुआ है।

अपनी स्थिति मजबूत रखना है बेडौल रखना है।
जो गाली देता है उसका भी बलहरी क्यू कि बहुत पाप होते हैं वो कटे वो हल्के हुए। इससे सहन शक्ति बढ़ेगी। तो बुरा हुआ या अच्छा हुआ ? परमात्मा किसी ना किसी रूप में परीक्षा लेती ही है। खुद खुश रहो ओरो को भी खुश रखो। सफलता के सितारे हो ये मानते हो जहां देवी गुण होते हैं वहा सफलता प्राप्त होती है। विजिय का चेहरा हमेशा हर्षित रहता है।
स्वयं भी डायमंड हो और आपका जीवन भी डायमंड है। तपस्या करनी है तपस्या मतलब परमात्मा को याद करो। सहज योगी बनो।

सुध संकल्प और श्रेष्ठ संग वाले हमेशा खुश रहेंगे।

Monday, May 2, 2022

सफलता के अध्यात्मिक नियम

किसी को दुख नही देना। क्रोध नही करना पाप गति को जानते हुए कोन सा कर्म नही करना। 

दान भी पात्र को देना है। इस पाप की दुनिया को पुन्य की दुनिया बनाना है। श्रेष्ठ मत से विकारो से बचे रहोगे और श्रेष्ठ बनोगे अपनी मन मत पर मत चलो।

पाप क्यू करते हो अपना खर्चा कम कर दो। कर्जा लेकर भी शादी में लगाते हैं उन्हे पतित बनाते हैं। फिर सहन भी करना पड़ता है।

 मीरा ने भी कृष्ण जी के लिए सहा ना। ऐसा पुरषार्थ करो जो बाप दादा से उच्च जाओ। माया से हारे हार माया से जीते जीत। मन संकल्प करेगा पर कर्म बुद्धि विवेक से करना।

घर में रहो पर पवित्र रहो। तुम्हारी लाइफ में रॉयल्टी झलकनी चाहिए। दान करने से पुण्य नही है दान वो है जो पुण्य कार्य में लगाया जाए।

रेगुलर पढ़े बिना उच्च पद पर नही जा सकते

मान शान का त्याग करने से सब के माननीय बनने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

Sunday, May 1, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम

परमात्मा के पास जाने के लिए टिकट है ज्ञान बीजा है पवित्रता, वहा की मनी है निस्वार्थ की सेवा दुआएं

कर्मो का हिसाब किताब चलता है किसी के आपने 100साल पहले लिए उसे 100बाद ब्याज सहित देना पढ़ेगा सौ साल पहले 10गाली दी ब्याज सहित सुन्नी पड़ेगी किसी को धोखा दिया ब्याज सहित धोखा खाना पड़ेगा। खुद हिसाब लगाओ ब्याज कितना हुआ।

जो सोचते हैं बोलते हैं करते हैं उससे कर्म बनते हैं और हर का फल भुगतना पड़ेगा।

पवित्रता,शुद्ध भोजन, ध्यान,
 मुरली सुनना ( सत्संग) सत्य सरुप बनना।
किसी भी बुराई को टच ना करें।

सत्यता, पवित्रता ,निर्भयता, सभ्यता , अंतर्मुख्ता , वेराग्यवर्ती, अनिच्छा, उपविरामवृति, एकांत वासी, समेट ने की शक्ती, एकाग्रता, कृतज्ञता अकनामी सरलता, करुणा उदारता मधुरता गंभीरता सहन शीलता, निर्हणकारी, आज्ञाकारी,ईमानदारी, फरमान व्रदारी

Thursday, April 28, 2022

मानव तू स्वार्थी क्यों ?

मनुष्य तू स्वार्थी क्यों ?

मै माउंट आबू आई हूं इस वक्त ज्यादातर लोग ऑडिटोरियम देखने गए हैं और मैं आम के पेड़ के नीचे छाया में बैठी हूं आम के पेड़ पर आम लगे हुए हैं जिन्हें देख कर मेरे मन में ये आर्टिकल लिखने की प्रेरणा हुई। मे इस पेड़ को देख सोच रही हूं पुरी सृष्टि सेवा में लगी है और एक हम मानव हैं जो अपने स्वार्थ से ऊपर नही उठते ये धूप सहता गर्मी सहता है पतझड़ सहता है बारिश सहता है और सब कुछ सहने के बाबजूद हम लोगो को धूप से बचाते हैं गर्मी से बचाते हैं बारिश से बचाते हैं खाने के लिए फल देते हैं छाव देते हैं और हम इन्हे अपने स्वार्थ के लिए कटवा देते हैं पुरी श्रष्टि मानव की सेवा करती है और हम मानव अपने स्वार्थ से ऊपर नही उठते😊

Monday, April 25, 2022

सफलता के अध्यात्मिक नियम पार्ट 7

पुरानी देह और देह संबंधी जो दुख देने वाले हैं उनको को भूल प्रभु को याद करो
कर्मातित नही बने तो बीच मे रुक कर सजा भुगतोगे।

जब तक जीना है तब तक सीखना है।

पुरसार्थ करने वाले छिप  नही सकते। श्री मत ले पाप आत्मा बनने से बचना भी है और बचाना भी है।

किसी भी प्रकार के डिफेक्ट से परे रहना ही परफेक्ट बनना है।
चलन और चेहरे से प्योर्टी तब झलकेगी जब संकल्प में भी अपवित्रता का नाम निशान न हो

Thursday, April 21, 2022

सफलता के आध्यात्मिक सूत्र पार्ट 6

सर्व शक्तियों द्वारा हर कंप्लेन को समापत कर कंप्लीट बनने वाले शक्ति शाली आत्मा भव

शांती और धेर्यता की शक्ति से विघ्नो को समाप्त करने वाले ही विघ्न विनाशक है।

अंदर में अगर कोई भी कमी है तो उसके कारण को समझकर निवारण करो क्यों कि माया का नियम है कि जो कमजोरी आपमें होगी उसी कमजोरी के दुवारा वह आपको माया जीत बनने नही देगी। माया उसी कमजोरी का लाभ लेगी और अंत समय में वही कमजोरी धोखा देगी। योग के प्रयोग द्वारा हर कमपलेन को समापत कर कंप्लीट बन जाओ।
ज्ञानी वह है जो ना डरता है ना डराता है।

Monday, April 18, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम पार्ट 5

निश्चय करो हमारा जो कुछ भी है सो परमात्मा का है फिर ट्रस्टी होकर संभालो 
 तो सब पवित्र हो जायेगा तुम्हारी पालना परमात्मा करेंगे। 

परमात्मा का बनने के बाद कोई कुकर्म किया तो सजा कई गुणा अधिक मिलेगी

जो पैसा तुम्हारे पास है वो एक एक पैसा श्रीमत से खर्च करना तुम्हें अपना घर भी संभालना है । एक भी पैसे की बरबादी ना हो लक्ष्मी का सम्मान करें।

प्रालब्ध कब अच्छा बनेगा जब पुरसार्थ अच्छा होगा।
सजना है तो विकारों को तज दो। सद्गुणों से सजना है।

सच्ची कमाई कर हाथ भ्रतू करके जाना है। एक बाप से सच्चा सौदा करने वाला सच्चा व्यापारी बनना है।

सब फिकर परमात्मा को देकर बेफिक्र स्थिति का अनुभव करने वाले परमात्म प्यारे भव

मेरा कहना मुस्कील में
 पड़ना

Thursday, April 14, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम पार्ट 4

कर्म करो उस में फसो मत। मरते वक्त ये विचार होना चाहिए कि परमात्मा में आपकी शरण में आ रही हूं मेरे परिवार में सूख शान्ति रखना अपनी याद इनके दिल में अपनी याद बनाए रखना। दुनियां अपने फायदे की बात करेगी साथ तो तुम्हारे शुभ कर्म ही जाएंगे। जितना टाइम मिले परमात्मा को याद करो। परमात्मा की याद से ही तुम्हारे विक्रम जलेंगे। फालतू वार्तालाप नही करनी है। पवित्रता फॉस्ट है। दुनियां में ऐसा काम करके जाओ जिससे दुनियां से जाने के बाद भी सेवा होती रहे। भोजन करते समय याद में रहना है। दिन में शरीर निर्वाह अर्थ कर्म कर  रात को जाग प्रभु को याद करो। दुसरो की प्रॉबलम समझो।
डबल नशे की स्थिति द्वारा सदा निर्वघन बनने और बनाने वाले विश्व परिवर्तन भव

Thursday, April 7, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम3

इस कलयुग में सब रावण की जंजीरों में बंधे हुए हैं उन्हें जीवन मुक्त बनाना है।

मुखड़ा देख ले दर्पण में कितना पाप किया जीवन मे। अर्थात कितने विकारों पर जीत हासिल की है।

जीवन मुक्त होगे पुरसार्थ अनुसार धर्म अनुसार नंबर वार।

एक बार लक्ष्य मिल गया तो आप विदेश में रहकर भी पढ़ सकते हो।

कलयुग में सुख थोड़े समय का है शांति यहां मिलनी ही नही है। शांति के लिए मन जुबान कर्म पर कंट्रोल होना बहुत जरूरी है।

 जब संकल्प चलता है तो सामने वालो को महसूस हो जाती है इसलिए जितने शुद्ध रहोगे उतनी पॉजिटिव वाई बस फेलेंगी।

इन्सान सिर्फ निमित हो। अब खुद सोचो तुम किस चीज के निमित बनना चाहते हो कुछ अच्छा करना चाहते हो या कुछ और

परमात्मा को पाना है तो परमात्मा को याद करो विक्रम नाश हुए बिना मुक्त नही हो सकते।

कोई भी उलटी चलन नही चलनी है अच्छे गुण धारण करने हैं हमें माता पिता को धारण करना है हमे योग बल से काम क्रोध के हल्के नशे को समापत करना है।

क्या, क्यों, ऐसे और वेसे के सभी प्रसानो से हमे अलग रहना है जो हो रहा है वो मेरे लिए अच्छे के लिए ही हो रहा है। तुम्हारे लिए परमात्मा अच्छा ही करेगा।

स्वयं को मेहमान समझकर कर कर्म करो तो महान और महिमा योग्य बन जाएंगे।

Wednesday, April 6, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम 2

तुम हो कर्म योगी तुम्हें चलते फिरते प्रमात्मा को याद का अभ्यास करना है।

 एक बाप के सिमरन में रह नर से नारायण बनने का पुरसार्थ करो।

रात गवाई सो कर दिन गवाया खा कर हीरा जैसा  अनमोल जीवन कोड़ी बदला जाए।

सिर पर पाप का बोझ है इसलिए रात में जाग कर प्रभु को याद करो।
निश्चय बुद्धि बन परमात्मा से प्रेम करना है बाबा के फ्रमान पर चल माया पर विजय पाना है। याद का चार्ट 8घंटे का बनाना है।

 सारे दिन में व्यर्थसंकल्प व्यर्थ बोल व्यर्थ संबंध संपर्क होता है उस व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तन कर दो ।व्यर्थ को अपनी बुद्धि में स्वीकार नही करो अगर एक व्यर्थ को भी स्वीकार किया तो अनेक व्यर्थ का अनुभव करायेगा
साधना के बीज को प्रत्यक्ष करने का  साधन है  बेहद की विराग्य वृति।

बिगड़ी हुई तकदीर को बनाने वाला परमात्मा है
जब तकदीर को बनाने वाले को भूलते हैं तब तकदीर बिगड़ती है।

Monday, April 4, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम 1

मनुष्य भले ही बूढ़ा हो जाए विकार कभी बूढ़ा नही होता है। 

किसी भी आत्मा को हमे दुख नही देना। 

माया बहुत विघ्न डालती है। कई बार ऐसा थपड़ मरती है जिसका असर सालो रहता है।
इन्सान बूढ़ा हो जाता है क्रोध बूढ़ा नही होता।

सपूत बनने के लिए बाबा की श्रीमत पर चलना है जो भी बुरी आदत है चोरी की झूठ बोलने की बुराई करने की आदत को छोड़ना है

 अपना तन मन धन को सेवा में लगाना है। 

सदा हर कर्म में रूहानी नशे का अनुभव करने कराने वाले खुश नसीब भव 

साधनों को सेवा के प्रति यूज करो आराम पसंद बनने के लिए नही।

Friday, January 14, 2022

बता मन तेरा क्या करू ?

         बता मन तेरा क्या करु ?

जिसकी मदद की, उसी  ने बेईमान बताया। जिस के लिए झुके ,उसी ने अहंकारी बताया । जिनके के दोष छिपाए, उन्ही ने इल्जाम लगाए l जिनके लिए जिए उन्हीं ने बेगाना बनाया । जिसको अपना समझ कर ,दिल हल्का करने के दिल के दर्द बताए,उसी ने घर घर जाकर  बदनाम किया ।  फिर भी  तू उनसे लगा  बता मन तेरा क्या करु?

जिसको जितना अपना समझा वो उतना ही पराया निकला । सब से धोखा खाया
जो जितने नजदीक आए उतना  ही उसने सताया   फिर भी तू उनके लिए रोया l तूने उन्हीं को दुखेडे सुनाए बता मन तेरा क्या करु ?

वही पैसा अपना है, वही टाइम अपना है, वही मेहनत अपनी है, जो प्रभु सेवा में लगे नही तो कुछ भी अपना नही है । वही प्रेम अपना है वही खुशी अपनी है, वही दुख अपना है , वही सुख अपना है जो प्रभु से मिला नही तो कुछ भी अपना नही है । वही रिश्तेदार अपने हैं वही दोस्त अपने हैं जो सिर्फ प्रभु से जुड़े हैं। नही तो कोई अपना नही है ।

कितना ही धन कमाए कितनी ही मेहनत करें कितनी ही प्रॉपर्टी जोड़े कितना ही परिवार ब रिश्तेदार या दोस्तो के लिए करे ये दुनिया स्वार्थी है यहां की हर चीज़ झूठी है । यहां कोई  अपना नही है ।

कोई चीज़ खुशी नही देती खुशी प्रभू चिंतन से, भ्ग्गति से मिलती है प्रमार्थ से मिलती है पर ये मन वहा लगता ही नही  ये मन दुनिया में भागता है जहां सिर्फ दुख है । बता मन तू प्रभु चरणों में क्यू नही लगता ? जहा सच्चा सुख है

Friday, May 14, 2021

एकाग्रता कितनी अनिवार्य है जीवन मे

जिस चित को एकाग्रता मिल गई वह बड़े से बड़ा काम कर सकता है । या ये कहिए कि उसके लिए कोई कार्य असंभव नही है। अगर आपके पास एकाग्रता नही है तो आप बड़ी उपलब्धि कभी हासिल नही कर सकते।

अगर आपको उपलब्धि नही मिली,आपकी श्रेष्ठता ठहर गई है, ऊचे नही उठ सके, विकाश नही हो रहा ,बड़े नही बन सके, कामयाब नही हो सके तो एक चीज आपके पास रही होगी उसका नाम है प्रमाद ।

 जिस दिन आपका मन करे अपने शत्रुओं की गणना करनी है, जिस दिन आपका मन करे मुझे अपने बैरी गिनने हैं कि मेरा बैरी कोन है , ध्यान रखना आपके हजार बैरी नही हैं, सौ, दो सौ भी नही हैं, दो चार भी नही हैं आपका एक ही बैरी है उसका नाम है प्रमाद।और अगर आपने प्रमाद को जीत लिया तो अन्य कोइ बैरी नही रहेगा और अगर नही जीता तो अन्य भी बैरी बन जायेंगे जो आगे चलकर आपकी प्रगति में बाधा बनेंगे।

आप जानते हो आलस्य आता कहां से है? अज्ञानता से इसलिए शास्त्र कहते है- "आपका कोई बैरी है तो वो अज्ञानता है"
वेद में बड़ी अच्छी बात कही गई है-

"प्रणवो धनो सरो ही आत्मा, ब्रहम तरू लक्ष्य मुच्यते,अपर मतेन वेद्भ्यम सरवतेन्नमयो भवे"

धनुष उठाइए, जरा पर किस का धुनुष बनाइए ओकार का धनुष बनाइए और धनुष पर तीर किसका रखे, खुद को चढ़ाए किसी और को नही ईश्वर को लक्ष्य बनाइए।और ये तब तक नही होगा जब तक आपके पास एकाग्रता नही है।

 बिना एकाग्रता के तो कुम्हार बर्तन नही बना पाता, चित्रकार चित्र नही बना पाता, लेखक लिख नही पाता उनकी बात छोड़ो, ढंग का फुलका भी नही बन पाता। एकाग्रता बहुत बड़ी चीज है जो जीवन में चहिए।

Thursday, June 27, 2019

आगे बढ़ना है तो साथियों से सलाह लें !!!

कई बार मेरे साथी ऐसी सलाह देते हैं जो मुझे सुनना पसंद नही होता ,लेकिन सुनना जरूरी होता है | अपने आसपास अच्छे सलाहकार  रखने का यही लाभ है कि वे जानते है कि सही निर्णय कैसे लें | अनुनायी आपको वो बताते हैं जो आप सुनना चाहते है और सलाह कार वो बताते हैं जो सुनना जरूरी है |

निर्णय लेने से पहले सलाह लें | निर्णय लेने से पहली ली सलाह बहुत महत्वपूर्ण होती है और निर्णय लेने के बाद की सलाह का कोई महत्व नहीं होता | 

सलाह कार सिर्फ आपकी तरह ही काम नही करते वे आपकी तरह सोचते भी हैं | इससे वे आपका काम हल्का कर देते हैं | निर्णय लेने, विचार मंथन करने और दुसरो को दिशा देने में ये बहुत अमूल्य है | 

जो लोग क्षमतावान  लोगो का  मार्ग दर्शन करते हैं वे अपनी प्रभावकारिता  को कई गुना बड़ा लेते हैं | 

"किसी भी इंसान की सफलता की परिभाषा यह है उसके अधीन काम करने वालो की योग्यता का अधिकतम दोहन " 

जिग जिगलर कहते है 
" सफलता अपनी योग्यता का अधिकतम दोहन करना है |

 एंड्रूय कार्नेगी ने इसे इस  तरह स्पष्ट किया था : " में अपनी कब्र के पत्थर पर यह लिखवाना चाहता हूँ यहाँ वह व्यक्ति लेटा  है  जो इतना बुद्धिमान था कि वह अपने से  दर लोगो को अपनी सेवा में लाया | 

जो लोग हमारी योग्यता में विश्वास दिखाते हैं ,वे हमे प्रेरित करने से भी ज्यादा बड़ा काम करते हैं-वे एक ऐसा माहौल बना देते हैं ,जिसमे हमारे लिए सफल होना ज्यादा आसान हो जाता है | इसका विपरीत भी सच है जब कोई लीडर हमरी क्षमता पर विश्वास नहीं करता , तो हमारे लिए सफल होना बहुत मुश्किल हो जाता है | यह लगभग असंभव हो जाता है | अगर हम अपने संगठन की सफलता चाहते हैं तो लीडर के रूप में हम अपने अनुयायीयों  के साथ ऐसा नही होने दे सकते |  

दोस्तों ! ये समृ जॉन सी.मेक्सवेल की बुक " अपनी टीम के लीडर्स को कैसे विकसित करें" की है | अगर आप अपनी टीम के लीडर को विकसित करना चाहते हैं तो आप को ये बुक बहुत ही हेलफुल रहेगी |  





Sunday, June 23, 2019

मानव जीवन के दस पश्चाताप !!!

सोचो! आपको भी आपके जीवन में ये दस पश्चाताप ना करने पड़ें | 

1 आपका जीवन जो एक बेहद प्रभावशाली गीत गाने के लिए मिला था ,आखरी समय में तुम पाओगे के तुमने निस्तंभ  होकर जीवन गुजारा है | 

2 अपने आखरी समय में महसूस करोगे कि अच्छा काम करने की  और अच्छी चीजें हासिल करने की प्राप्त हुई नैसर्गिक शक्ति का तुमने अनुभव लिया ही नही | 

3 आखरी दिनों में यह महसूस होगा तुमने ऐसा कोई काम नही किया जिससे अन्य लोग प्रोत्साहित हो सकें | 

4 आखरी दिनों में तुम्हे लगेगा कि तुमने जीवन में कोई कठिन काम करने का जोखिम नही उठाया जिससे तुम्हें कोई पुरस्कार नही मिला | 

5 आखरी दिनों में तुम्हें यह समझ आयेगा तुमने जीवन में कई अच्छे मौके गवाएं - जो तुम्हें विशेष स्थान पर ले जाते | तुम झूठी धारना में आकर साधारण योग्यताओ पर संतोष मानते आये हो | 

6 आखरी दिनों में तुम्हे ये सोच कर बुरा लगेगा कि तुमने आपदा को जीत में बदलने की और शीशे को सोने में बदलने का हुनर नही सीखा | 

7 तुम्हें इस बात का खेद रहेगा कि तुमने सिर्फ खुद की मदद की ,लोगो की मदद नही कर सकें | 

8 आखरी दिनों में तुम्हे ये पता चलेगा कि तुमने ऐसा जीवन व्यतीत किया जो तुम्हे समाज ने सिखाया | 

9 आखरी दिनों में तुम्हें इस वास्तविकता का पता चलेगा कि तुम्हारी क्षमता तुम्हे पता ही नही चली | अपनी योग्यता को वास्तविकता में बदलने का प्रयास ही नही किया |  

10  आखरी दिनो में तुम्हें ये अहसास होगा कि तुम एक अच्छे इंसान इंसान बन सकते थे | जीवन में जो पाया उससे अधिक दे कर जा सकते थे | तुमने यह कभी स्वीकार ही नही किया की कि तुम्हारी घबराहट के कारण तुमने चुनौतियों को स्वीकार नही किया और अपना जीवन बर्बाद कर लिया |  

दोस्तों ! ये समरी रॉबिन शर्मा की बुक अपने "अंदर के लीडर को पहचानों " की है | इसमे बहुत ही बेहतरीन तरीके बताये है अपने अंदर के लीडर को पहचानने के | 
   


  







   

ऐसे दोस्तों से दूरी बना कर रखो !!!

दोस्तों ! आज में आप लोगो से एक खास टॉपिक शेयर कर रही हूँ जिसका मुख्य बिंदु है ' फ्रेरनेमी,शायद आप लोगो में से कुछ लोगो ने ये शब्द पहली बार ही सुना हो | इसका मतलब है दोस्त होकर दुश्मन का काम करना | अब आप समझ गये होगें कि ये आर्टिकल किस तरह के लोगो के बारे में है |

दोस्त इंसान की पहंचान होते है कहते कि अगर इंसान के बारे में जानना है तो उसके चार मित्रो को मिलो वो वैसा ही होगा जैसे उसके चार मित्र होंगे | जैसा इंसान होता है वैसे ही उसके दोस्त होते हैं | अगर सोच में फर्क मिल भी जाए तो कर्म में फर्क नही मिल सकता  | सोसायटी का असर जरूर पड़ता है | 

आज समज में तेजी से परिवर्तन आ रहा है | समाज व कार्यस्थल में कई लोग देखे जाते हैं जिनकी सत्ता छोटे छोटे कई सिंहासन पर टिकी होती है जिसपर प्रभुत्व जताने के लिए रोज नई नई लड़ाई लड़नी पड़ती हैं | चाहे वह परिवार में खुद को बेहतर साबित करने की  बात हो या कार्य स्थल व दोस्तों को इंप्रेस करने का संघर्ष | 

ऐसी स्थति में लोग सीधी लड़ाई ना लड़ कर बहुत ही चालाकी से सामने मीठा बनकर अपना काम साधते हैं और पीठ पीछे बुराई करते हैं | दोस्तों के वीक पॉइन्ट बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं | झूठ बोलकर समाज में उनका आत्म सम्मान छलनी करते हैं | और  उनका ये रवैया नकारत्मक है वे खुद से इतने अभिभूत होते हैं कि दोस्तों को नीचा दिखाकर स्वयं को बेहतर सिद्ध करना चाहते हैं | इसके लिए वे दोस्तों को बैकहैंड कम्प्लीमेंट्स देते है ,जिससे वे ये जता सकें कि उनका स्तर उनके दोस्तों के स्तर से बहुत ऊंचा है | वे हमेशा आपकी उन्ही चीजों को निशाना बनाकर वार करते हैं जो आपके दिल के बहुत करीब हो | 

आप ये तो जानते ही हैं कि जब तक सच घर से बहार निकलता है तब तक झूठ सारे शहर में ढिढोरा पीट आता है | जिसका खामयाजा उस इंसान को भुगतना पड़ता है जिसके बारे में झूठी अफवाह फैलाई गई है | एक तो वो पहले ही अपनी विपरीति परस्थतियों व समस्याओं को झेल रहा होता है दूसरे ऐसे लोग जो खुद अपनी लाइफ में कुछ नही करना चाहते वे लोग उसका श्रेय लेने या ईर्ष्या से झूठे आरोप लगा कर और समस्या खड़ी कर देते हैं | जिसकी वजह से उस इंसान को  बार -बार अपनी सफाई देनी पड़ती है | जिसकी वजह से वो सक्सेस नही पाता जो पा सकता था  | 
सच्चा दोस्त आपके सामने ही सरलता और सचाई से आपकी कमजोरी के बारे में बताएगा ,लेकिन फ़्रेनेमी उसी कमजोरी को डंके की चोट पर बताएगा जिससे ज्यादा लोगो को उसके दोस्त की कमजोरी के बारे में पता चल सकें और उसकी तुलना में वह फ़्रेनेमी बेहतर दिखे 

दोस्तों आप अपने फ़्रेनेमी को अच्छी तरह पहंचान सकते हो | और सावधान हो सकते हो कहि वही दोस्त आपको दोस्ती की आड़ में मानसिक व शारीरिक रूप से चोट ना पहुंचा दे | दोस्त होकर लोग ऐसा काम क्यों करते हैं ? दोस्तों मेंने  कही पढ़ा था -

 " चार शराबी एक साथ रह सकते हैं ,चल सकते हैं, पर चार विद्धवान एक साथ नही रह सकते | क्यों ? क्यों कि शराबी को तिरस्कार मिलता है गालियां मिलती हैं जिन्हे वो दे सकते हैं | विद्वान् को सम्मान मिलता है और विद्वान सम्मान को बाटना नही चाहता | सम्मान की भूख सभी को होती है इसलिए जिसे नही मिला वो जबरदस्ती लेना चाहता है | जिसके चलते मन मुटाव होता इसलिए एक साथ नही रह सकते| 



 दुसरो के जैसा दिखने या बनने का लालच ही दोस्तों में ईर्ष्या पैदा करता है | जिसकी वजह से वह खुद को कमतर आंकता है | बेहतर दिखने या कहलाने के कारण ही ऐसा करता है | जबकि  कभी भी दुसरो के आदर्श रूप को प्रस्तुत नही करना चाहिए | 

हर एक इंसान को भगवान ने एक अलग हुनर से नवाजा है फिर कोई भी इंसान किसी दूसरे जैसा कैसे बन सकता है ? किसी भी काम को सीख कर या डिग्री लेकर तुम नौकरी पा सकते हो लेकिन सक्सेस तो आपको हुनर से ही मिलेगी | और उस हुनर को देने वाला सिर्फ परमात्मा है | इसलिए जैसे हो वैसे ही खुद को स्वीकार करो खुद से प्रेम करो | जो हुनर परमात्मा ने आपको दिया है उस हुनर को तरासो  |


Monday, June 3, 2019

आपकी सफलता के स्तर को आपके सबसे करीबी लोग तय करते हैं !!!

आपके आसपास लीडर्स रहे यह सुनिश्चित करने की कुंजी यह है कि आप अच्छे से अच्छे लोगो को खोज कर उन्हें अपनी टीम में शामिल करें और फिर उनकी सर्वोच्च क्षमता के अनुसार उन्हें लीडर्स के रूप में तैयार करें | महान लीडर्स ही दूसरे लीडर्स तैयार करते हैं | आपको ये बता दू कि ऐसा क्यों करते हैं-  लीडर के आस पास के लोग ही उसकी  सफलता के स्तर को तय करते हैं |  




इस कथन का नकारत्मक पहलू भी सच है : लीडर के करीबी लोग ही उसकी असफलता के स्तर को भी तय करते हैं | दूसरे शब्दों में " जो लोग मेरे करीब हैं वे या मुझे बना देंगे या मुझे मिटा देंगे "मेरी लीडर शिप का सकारत्मक या नकारात्मक परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि मुझमे अपने सबसे करीबी लोगो को लीडर के रूप में विकसित करने की कितनी योग्यता है | यह मेरे इस मूल्यांकन की योग्यता पर निर्भर करता है कि मेरे संगठन में आने वाले लोग मुझे और मेरे संगठन को क्या दे सकते हैं | मेरा लक्ष्य अनुयायियों की भीड़ इकटठा करना नही है | मेरा लक्ष्य तो ऐसा लीडर्स का विकाश करना है जो बहुत कुछ परिवर्तन कर दे | 

एक पल के लिए रुकें और अपने संगठन में अपने करीबी पॉच छ :लोगो को देखें क्या आप उनका विकाश कर रहे हैं ?उनके लिए आपकी योजना क्या है ? क्या वे विकाश कर रहे हैं ? क्या वे आपका बोझ उठाने में समर्थ हैं ? 





जब भी कोई समस्या सामने आती है यानि संगठन में 'आग' लग जाती है तो लीडर के रूप में आप ही अक्सर सबसे पहले घटना स्थल पर पहुंचते हैं | उस समय आपके हाथ में दो बाल्टीयां होती है | एक में पानी होता है और दूसरे में पैट्रोल अगर आप उस 'आग' में पेट्रोल की बाल्टी डाल दें तो आग और भड़क सकती है और दूसरी और अगर आप उस पर पानी की बाल्टी दाल दें तो वह बुझ सकती है



लीडर का विकाश होगा ,तो संगठन अपने आप विकाश करेगा | कोई भी कंपनी या संगठन तब तक विकाश नही कर सकता तब तक उसके लीडर्स खुद विकाश न करें | लीडर्स खुद में सकारत्मक परिवर्तन कर लेंगे ,तो विकास अपने आप हो जाएगा | 



आम तौर पर लीडर्स दूसरे लीडर्स को विकसित करने में इसलिए असफल होते हैं ,क्युकि या तो उनमे प्रशिक्षण की कमी होती है या फिर दुसरो को अपने साथ जोड़ने और प्रोत्साहित करने के उनके नजरिए दोषपूर्ण होते हैं | अक्सर लीडर्स की मानसिकता अलग होती है कि उन्हें अपने करीबी लोगों के साथ मिलकर काम करने के बजाय उनसे पर्तिस्पर्धा करना है | 


महान लीडर्स की मानसिकता अलग होती है |प्रोफाइल्स इन क्रेज में राष्टपति जॉन एफ.कैनेडी ने लिखा है ," आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका दुसरो के साथ मिलकर आगे बढ़ना है | इस तरह की बात सिर्फ तभी हो सकती है, जब लीडर में परस्पर -निर्भरता का नजरिया हो और वह जीत -जीत वाले संबंधो के लिए समर्पित हो |  


दोस्तों ये समरी जॉन सी मैक्सवेल की लिखी। "अपनी टीम के लीडर्स को विकसित कैसे करें " की है |