Sunday, October 9, 2016

दुसरो की निंदा करने में या सुनने में समय व्यर्थ क्यों करें ? !!!


Image result for ninda chugli  na kareदोस्तों !  जब भी आपको लगे की सामने वाले ने आपके बारे में गलत बात कहकर आपकी छवि बिगड़ी है तो तुरन्त प्रतिक्रया ना करें । उस समय चुप्पी साध लें । गुस्से में कोई भी बात ऐसी ना कहे जो आपको घातक सिद्ध हो । लेकिन बाद में सहज  होकर जवाब दें और गलत बात का विरोध करें । अगर आप ऐसा नही करते तो अपना ही नुकसान करोगे ।

"साधारण व असाधारण लोगो में यही फर्क होता है । साधारण लोग तुरन्त रियेक्ट करते है और असाधारण लोग चीजो को समझने और गलती को माफ़ करने में विशवास करते हैं"   

हम किसी की सोच को तो नही बदल सकते लेकिन किसी की गलत सोच की वजह  नुकसान होने से बचा सकते हैं । असल बात तो ये है कि हम सामने वाले की बात पर किस तरह रिएक्ट करते हैं|हर बात का असर हम पर नही पड़ना चाहिए ।  

क्रटिसाइज को मैनेज करना सीखें :- अगर आप क्रटिसाइज मैनेज करना नही जानते तो आप कोई ऐसी गलती कर दोंगे जो आपके व आपके कैरियर के लिए सही साबित नही होगी । और आपके पास पछतावे की सिवाय कुछ नही बचेगा ।  आप किसी भी कामयाब इंसान के बारे में जाने उसने कोई ना कोई गलती जरूर हुई होगी । आप उनकी गलती से सीख लेकर आगे बढ़ सकते हो ।  

हम किसी भी इंसान को जब तक नही बदल सकते जब तक वो खुद बदलना ना चाहे :- जल्दी से नया किसी को पसंद नही आता नया डराता है । हमारे मन में गड़बड़ी व उलझन पैदा करता है । लेकिन जब तक आप क्रटिसाइज को अवॉयड  नही करोगे तब तक आप कुछ विशेष नही  कर  पाओगें । जीवन में सक्सेस होने के लिए लीक से हट कर कार्य करना होगा , सभी धारणाओं को तोड़कर आगे निकलना होगा । तभी आप कुछ नया कर सकते हो । 

क्रिटिसाइज मैनेज ना कर पाने की वजह से सक्सेस  नही हो पाते :- याद रखो श्रेष्ठ कार्य वही होते हैं जिन्हें आप  कर दिखाओ और लोग देखते रह जाएं। जब किसी बात को और लोग गलत कहे तो हमे अच्छा नही लगता और जब उसी कार्य को हमारा मन गलत कहे तो हम उसे नही करते। इसलिए हमारा फैसला वो होना चाहिए जिसे हमारा दिल कहे और दिमाग सही माने । 

अगर आपके अंदर योग्यता है, तो फिर आप किसी की परवाह ना करें :- आपके अंदर योग्यता तो जन्म से होती है लेकिन उसे विकसित करना पड़ता है। और विकसित करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। सिर्फ अपनी योग्यता पहचानना काफी नही  है, इसके साथ सही दिशा में कदम बढ़ाना भी जरूरी है । खुद को प्रूव करने के लिए किसी भी काम को सही ढंग से कार्य करना जरूरी है । और जब भी कोई कार्य लीक से हट कर  होता है, तो लोग बाते तो करेगे ही जो सहमत वो सही बताएंगे और जो सहमत नही हैं वो गलत बताएंगे । कहते हैं -

" गलतियां विफलता ,अपमान निराशा और अस्वीकृति ये सभी उनत्ति और विकास का ही एक हिस्सा हैं । कोई भी व्यक्ति इन पाचों चीजो का सामना किए बिना जीवन में कुछ भी प्राप्त नही  कर सकता " 



शक खोकला कर देता है रिस्तो को !!!

        
Image result for vishvas nhi rha risto meदोस्तों!इंसान के पास  डिग्री ,धन, दौलत, इज्जत, शौहरत सब कुछ हो लेकिन ऐसे रिस्ते ना हो जिन पर वो विश्वास करता हो ,जिन्हें वो अपना कह सके तो इंसान सब कुछ होते हुए भी अकेला पड़ जाता है । 


और ये सारे सुख मिलकर भी उसे सुख शांति नही देते । कई लोग आपने ऐसे भी देखे होंगे जिनके पास सब सुविधा हैं लेकिन वे सुखी नही हैं । वे अपनों के बीच रहते हुए भी अकेले पड़ जाते हैं  ऐसा क्यों ?

लोग उन्ही के साथ रहना या व्यापर करना पसंद करते हैं जिन पर वो भरोसा करते हैं :-  जिसके साथ आप काम कर रहे है या रिस्ते बना रहे हैं आप उन्हें ये विश्वास दिलाएं कि  आप उनके सुख दुःख में साथ हैं । जब आप उनके सुख दुःख में साथ दोंगे  तो वो लोग भी आपको कभी नही भुलगें। और आपके सुख दुःख के साथी बन जाएंगे । 



जब विश्वास टूटता है तब शक जन्म लेता है:- लेकिन बिना वजह के शक नही करना चाहिए। जहा छोटी छोटी बातो बातो पर शक किया जाता है वहा रिस्ते खोकले हो जाते हैं । ये स्थिति ठीक नही है इस आदत को समय रहते बदल लेना चाहिए । शकी इंसान को कोई पसंद नही करता । जहाँ शक पैदा हो जाता है वही लोगो के  बीच में तू तू में में होने लगती  है । 

शक क्यों करते हैं :- हर इंसान के व्यक्तित्व को सवारने व बिगाड़ने में उसके परिवेष का बहुत बड़ा योगदान रहता है । जिन लोगो का बचपन असुरक्षित माहौल में बिता हो या रिस्तो में धोखा खाया हो तो ऐसी स्थिति में उस इंसान के मन में शंक स्थाई रूप से घर कर  जाता है । अगर इसे समय रहते दूर ना किया जाये तो ये बहुत बड़ी टेंशन क्रीएट क्र सकता है । 



शक की स्थिति से कैसे उभरें :- स्थिति बिगड़ने से पहले ही उसके कारण  को जान लें । सत्य को जानने समझने की कोशिस करें कोई कड़वा अनुभव रहा हो,  किसी के खो जाने का मन में डर हो।  अकेले पड़ जाने का डर कोई धोखा ना दे दे । अगर आप को ये लक्षण दिखते हैं तो इन्हें दूर करने की कोसिश करनी चाहिए । हमेशा पोजेटिव सोच वाले लोगो के साथ उठे बैठे व नेगेटिव सोच वाले लोगो से बचें । अपने अंदर बदलाव लाने की कोशिस करें । 

ये बात हमेशा याद रखें की धोखा खाना गलत नही है धोखा देना गलत है :- आप तो अपनी तरफ से सही थे ये तो उन लोगो की गलती जिन्होंने आपको धोखा दिया है । फिर आप क्यों टेशन लें क्यों सब से कटे । अगर आपके मन में आगे भी शंक का अंकुर फूटता है तो जिसके लिए भी ऐसा होता है उससे सीधी बात कर के अपने शंक को दूर क्र लें ।  

एक कड़वे अनुभव की वजह से आप और लोगो पर शक ना करें :- सामने वाले पर विश्वास करें व खुद पर विश्वास करें । एक दूसरे पर विश्वास का अहसास इंसान को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है । इससे लाइफ की हर फिल्ड में सक्सेस होने में काफी मदद मिलती है । वह सही डिशिजन लेने में सक्षम होता है । 




Saturday, October 8, 2016

जीवन में सक्सेस चाहने वालो के लिए परिवर्तन जरूरी है !!!


Image result for parivartan jaruri haiदोस्तों ! परिवर्तन  तो जीवन के हर पल में होता  ही रहता है। कुछ परिवर्तन सुखद होते है तो कुछ दुखद। ऐसी स्थिति में हर परिवर्तन को स्वीकार करके आगे बढ़ने की कोशिस करनी चाहिए । हर इंसान चाहता है कि उसके परिवार में, समाज में, शहर में, देश में, खुशहाली हो । लेकिन हम ये कभी नही सोचते कि ये सब  कैसे हो ? हमे क्या परिवर्तन  लाने हैं ? कैसे परिवर्तन लाने   हैं ? 


समय के अनुसार परिवर्तन होगा ही :- संसार में कोई भी चीज अचल नही है, परिवर्तन होता ही रहता है। महान दार्शनिक अरस्तु ने कहा है परिवर्तन  तो प्रकृति का नियम है लेकिन जब भी हम इसे मानने से मना करते हैं तभी हमे दुःख होता है । टेशन में आ जाते है, हमे ये  मानना  होगा की सुख के बाद दुःख आता ही है। जैसे- दिन के बाद रात और रात के बाद दिन लगा है । ऐसे ही सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख लगा है । 

सूर्य को भी एक दिन में तीन स्थितियों से गुजरना पड़ता है। वह शुबह हल्की गर्मी लिए होता है | दोपहर तक पूरा तप जाता है और शाम होते - होते ढल  जाता है । सूर्य को अपार शक्ति का भंडार होते हुए भी कई उतार चढाव देखने पड़ते हैं। इसी तरह से जिदगी भी कई उतार चढ़ाव से गुजरती है। अगर हम इस सत्य को मान लें तो कभी हताश व निराश नही होंगे, और कर्म शील बने रहेगें । 



परिवर्तन को देख कर घबराएं नही :-इंसान कई बार अपनी कमजोर मानसिक परवर्ती के कारण संघर्ष से घबरा जाता है । हीन  भावना व कुंठा के कारण अपना मनोबल गवा देता है । और बे मतलब उलझता रहता है, झगड़ता रहता है। और अपने असली लक्ष्य से भटक जाता है लेकिन ये सोचो की हर परिवर्तन में कुछ अच्छाई छिपी है । विवेकवान व्यक्ति असफलता को चुनोति मानकर दुबारा प्रयत्न करता है । और विवेकहीन व्यक्ति हार मानकर निराश हो कर बैठ जाता है । असफलताओं से घबराने की बजाए अपने प्रयत्न करने की गति बढ़ा दें । 


परिवर्तन के साथ सामंजय बनाये रखें :- ये नही  सोचना चाहिए कि  हमारा सपना पूरा नही हो सकता । हमेशा  ध्यान अपने लक्ष्य पर होना चाहिए, तभी ऊर्जा शक्ति सही से काम कर पाएंगी । जो भी कार्य करो पुरे मनोयोग व प्रसनचित होकर करो । हर कार्य में भटकाव व व्यवधान तो आते रहते हैं, लेकिन इन चीजो पर ध्यान देने की बजाए ज्यादा से ज्यादा समय अपने कार्य पर दें । आप वो पा सकते हो जो पुरे मन क्षमता व उत्साह से पाना चाहते हो । 


अपना अस्तित्व बनाएं रखने के लिए परिवर्तन स्वीकार करें :- यकीन रखें की बदलाव में  ही भलाई है ।  बदलाव को स्वीकार करने वाला ही गति शील बन सकता है । अगर हम समय के साथ ना चलें तो पिछड़ जाएंगे । जीवन के सफर में हम तभी आगे बढ़ सकते हैं जब समय के अनुसार खुद को बदलते रहेगें । और आपका बिना बदले काम चल भी नही सकता । जब मौसम बदलता  है, विचार बदलते हैं, मनुष्य की परिस्थितियां बदलती हैं।समय के अनुसार बदलने को  ही विकास कहते  हैं ।  

परिवर्तन करते वक्त  दुविधा में ना फंसे :- दुविधा हमारी इच्छा शक्ति को कमजोर कर देती है। और जब ये रोग हमारी इच्छा शक्ति  में लग जाता है तो हमारी इच्छा शक्ति को कमजोर कर  देता हैं ।जिससे हमारी सोचने समझने की क्षमता खत्म हो जाती है । जिसकी वजह से हम सही डिशिजन नही ले पाते जब की किसी भी फिल्ड में सक्सेस के लिए सही डिशिजन लेना जरूरी है। जो भी डिशिजन ले सोच समझ कर  लें । और फिर अटल रहें ।  बार बार फैसले बदलने वाले सक्सेस नही हो पाते । 

अपने जीवन में जब चाहो तब परिवर्तन ला सकते हो :- बदलाव के लिए समय या उम्र नही  देखी जाती।  बल्कि जरूरत देखी जाती  है । जब भी आपको बदलाव की जरूरत लगे तभी बदलाव लाने लगें । सक्सेस लोगो में  यही खूबी देखी  जाती है कि वो जरूरत के अनुसार खुद को बदलते रहते हैं।  हावर्ड विश्वविधालय के विलियम जेम्स का कहना है कि -

"अगर आपको अपनी जिदगी बदलनी है तो उसकी शुरुआत फ़ौरन करें "

हम बदलाव तो चाहते है लेकिन द्रढ़ इच्छा नही रखते । और तब तक कोई बदलाव नही हो सकता जब तक द्रढ़ इच्छा ना हो, द्रढ़ इच्छा शक्ति ही क्रयात्मक रूपदेन की शक्ति प्रकट करती है । और यदि द्रढ़ इच्छा हो तो नियमित रूपसे योजना बनाकर नही करते। सबसे पहले अपनी सोच बदलें, सोच से ही व्यवहार बदलने लगता है । शुरू में कोई भी बदलाव लाना अच्छा नही लगता चाहे वो अच्छाई के लिए ही क्यों ना हो लेकिन बाद में उसके बहुत से सुख हैं । 

थोड़े  से परिवर्तन से बधाये भी सीढ़ी बनने लगेगी :-अगर आप जीवन में सक्सेस की इच्छा रखते हो तो समय के अनुसार अपने व्यवहार व आचरण को बदलते जाएं । अगर आप समय के अनुसार अपनी सनक की वजह से नही बदले तो आगे बढ़ पाना ना मुमकिन है ऐसे कितने ही लोग नाकामयाब हो गए जो सिर्फ समय के अनुसार अपने कार्य में परिवर्तन नही लाये , खुद को नही बदल पाएं । 






















Friday, October 7, 2016

आज की सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद है !!!

       
Image result for aatankwadहमारा देश ही नही बल्कि पूरी दुनिया आतंकवाद से जूझ रही है । पिछले कुछ समय से ये विश्व के सामने एक बड़ी चुनोति बन कर सामने खड़ी हुई है। धीरे धीरे आतंकवाद ने कई  देशो को दंश दिया है । आतंकवाद को मिटाने में पूरी दुनिया ही नाकामयाब रही है । आज आतंकवाद विश्व व्यापी समस्या बन चुकी है।

हर वर्ष हमारे हजारो भाई बहन इसके चपेट में आकर अपने प्राणों से हाथ धो बैठते हैं । आतंकवाद से कितने ही घर उजड़ जाते हैं,कितने बच्चे अनाथ होते हैं  और कितने करोड़ो का नुकसान होता  है । आतंकवाद एक घिनोना कृत्य है जिससे आज देश में भय का माहौल बन चूका है। आतंकवादी हमेशा  बेकसूर नागरिको को  ही  निशाना बनाते हैं । 

हमारी सरकार की अब तक की सब से बड़ी नाकामयाबी रही है, कि आई एस आई को रोकने में कामयाब नही रहे । कुछ भटके हुए नोजवानो को आतंकवाद फैलाने में धकेल दिया जाता । उन  नो जवानो से कभी धर्म के नाम पर तो कभी जिहाद के नाम पर आतंकवाद फैलाया जाता है । 

आतंकवाद फैलाने वालो को पैसे और हथियार आई एस आई से मिल जाता है। कुछ गरीब नोजवान भी गरीबी से तंग आकर भी ये रस्ता चुनते हैं । जैसे - कसाब के बयान में आया था कि अगर आप मुझे पैसे देते तो ये काम में आपके लिए भी कर देता। आतंकवादी हमारे देश के दुश्मन हैं ।और इनका उद्देश्य राजनीति है । आतंकवाद का सिलसिला आसानी से नही थम सकता । इसे सेना पुलिस  या कानून के सहारे ही नही रोक जा सकता। 

इसके लिए प्रधान मंत्री जी ने जैसे सर्जिकल स्ट्राइक का कदम उठाया ऐसे ही ठोस कदम उठाने होंगे । और ये कार्य बी जे पी ही कर सकती है । आतंकवाद के खात्मे के लिए सभी देशवाशीयों  को एक जुट हो कर मोदी सरकार का साथ देना चाहिए नही तो आगे और भी बटवारे होंगे और हमारा देश सिर्फ कुछ लालची लोगो की वजह से टुकड़ो टुकड़ो में बट कर रह जायेगा ।  जैसे - 
1378 में भारत से एक हिस्सा अलग हुआ इरान ।  

1761 में भारत का एक हिस्सा अलग हुआ अफगानिस्तान । 

1947 में भारत का एक हिस्सा अलग हुआ पाकिस्तान । 

1971 में भारत का एक हिस्सा अलग हुआ बाग्लादेश । 

1952 से 1990 के बीच भारत का का राज्य हो गया है कश्मीर .... 

और अब उत्तरप्रदेश ,आसाम और केरला अलग राज्य बनने की कगार पर हैं । और जब भी इस सच्चाई को दुनिया के  सामने लाने  की कोई कोशिस की जाती  है तो कई लोग उसे  rss ,vhp और shiv sena , bjp वाला कहकर सचाई से मुंह मोड़ लेते हैं । और इसका फायदा उठा रहे है सिर्फ कुछ लालची लोग । 

आतंकवाद के खिलाप  सिर्फ इंडिया को ही नही बल्कि सभी देशो को एक जुट होकर आतंकवाद को खत्म करना होगा । तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है ।  और इसे आगे बढ़ने से रोक जा सकता है । 


Thursday, October 6, 2016

मेहनत बिन सक्सेस कहा ?


                
Image result for mehnat bekar nahi jatiदोस्तों ! मेहनत जीवन को निखारती है, सवारती है और इंसान को ऐसा गढ़ती है जिसकी प्रसंसा हर कोई करता है। हर इंसान उसके जैसा बनना चाहता है। मेहनत हमे आगे ही नही बढ़ाती बल्कि जीवन जीने का नया अंदाज सिखाती है। मेहनत से ही आप जमी से आसमा छू सकते हो । 

जब हम किसी सक्सेस इंसान को देखते हैं तो कहते हैं इसकी किस्मत अच्छी है । लेकिन दोस्तों किस्मत कुछ भी नही है सिर्फ हमारी मेहनत का फल है । मेहनत की है तो किस्म्मत अच्छी है और अगर मेहनत नही करते तो किस्मत खराब है। हाँ ऐसा हो सकता है कि मेहनत में आपको कम ज्यादा मिल सकता है । ये नही हो सकता कि आप पढ़ाई करो चार घन्टे और सपने देखो  आईएएस  बनने के । हाँ ये हो सकता है की आपने पढ़ाई की आईएएस की  और आप बन गए pcs ।  बिना मेहनत के आपका कोई सपना पूरा नही हो सकता । 

आपको एक कहानी सुनाती हूं -  राजबाला  की शादी दुहेजवा से हुई । उसके पति के पहली पत्नी से दो बेटे थे । जब शादी कर  के घर आई तो उसे ऐसा माहौल नही मिला की वो अपने पति या उन बेटो पर विश्वास कर  सके ।आगे राजबाला के एक बेटा हुआ । वह अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर कामयाब बनांना चाहती थी ।

इसलिए उसने  अपनी सारी  उम्मीदे बेटे से जोड़ ली । और बेटे को वो जितनी सहूलियत दे सकती थी ज्यादा से ज्यादा दी । लेकिन उससे कभी कोई काम नही करवाती थी । पहली पत्नी के बेटे काम करते और वो हमेशा खेल कूद व दोस्तों में रहता जिसकी वजह से वो बिगड़ता चला गया । 

राजबाला  ने भी उसकी सुख सुविधाओ का ख्याल तो रखा लेकिन ये ध्यान नही दिया की अगर ये मेहनत नही करेगा तो जिदगी की किसी भी फिल्ड में सक्सेस नही हो सकेगा । और लोग भी जब उसके बेटे के बारे में कहते तो उसे बुरा लगता । राजबाला अपने बेटे पर अंधा विश्वास करती थी, इसलिए उसे पूरी छूट दे रखी थी । घर में तो कोई काम पहले ही नही करता था अब उसका मन पढ़ाई में भी नही लग रहा था । 

उसने 'बी एस सी' से ही पढ़ाई छोड़ दी ।और गलत दोस्तों में फँसता चला गया । और ऐसी  ही किसी कम पढ़ी लिखी लड़की से समय से पहले ही शादी कर ली, जिससे परिवार वाले और खपा हो गए । मेहनत करने की आदत तो बचपन से डाली ही नही थी। जिससे अब वो कोई काम नही कर पाता था । उधर दो बच्चे भी हो गए, अब क्या करे ? भाई हैं सब बराबर के हो गए तो जो घर की जमीन ज्यादाद थी वो भी भाइयों में बट गई । अब माँ के हाथ में भी कुछ नही रहा जो बेटे के परिवार को पाल सके । ऐसे स्थिति बन गई की घर में लड़ाई झगड़े होने लगे । 


भाइयो की निगाह में इमेज बिगड़ चुकी थी इसलिए उन्होंने भी मदद करनी छोड़ दी । और उसके हालात ये हो गए की उसपर जितना उसके हिस्से में आया था उतना कर्ज हो गया । काम पर टिक नही पाता था ।इसलिए जो उसके हिस्से में जमीन आई थी उसे बेचने की सोचने लगा ।  

दोस्तों जिस बेटे से राजबाला ये उम्मीद करती थी। कि मेरा बेटा पढ़ लिखकर मेरा नाम रोशन करेगा।  मेरी जिदगी के हर दुःख दूर करेगा।  उसी बेटे की वजह से अब उसे हर इंसान के सामने शर्मिंदा होना पड़ा । और इसकी सिर्फ एक वजह थी की बेटे को मेहनत ना करने की आदत जो  बन चुकी थी । अपने बच्चो को सब सुख दो लेकिन उन्हें कर्म प्रधान बनाओ । जब जरूरत पड़े तो उनसे काम भी दिल खोल कर करवाओ । ऐसा ना हो की वो निकम्मे बन जाएं ।  






Wednesday, October 5, 2016

ये कैसा देश प्रेम है !!!

दोस्तों ! दिलों में प्रेम दुनिया की सब से सुंदर चीज बनाई है भगवान ने । अगर दिलो में प्रेम ना हो तो इंसान चलती  फिरती मशीन बन क्र रह जाये । लेकिन जब दिल में नफरत पैदा होती है तो इंसान हैवान बन जाता है । प्रेम रिस्तो में घर में समाज में  देश में शांति फैलता शकुन देता है लेकिन  नफरत सिर्फ बर्बादी । तो क्यों ना इस नफरत को भूल कर सिर्फ प्रेम में जिया जाये प्रेम को बढ़ावा दिया जाये । 

प्रेम बसाता है और नफरत उजाड़ती है :- दोस्तों किसी भी इंसान को देखो ,घर को देखो ,समाज को देखो ,देश को देखो जहा प्रेम है वहा उन्नति है शांति है शकुन है लेकिन जहाँ नफरत है वहां सिर्फ बर्बादी है ।                           
अमरीका और पाकिस्तान को ही देख लो:-अमरीका का फोकस अपने देश की तरक्की और  प्रेम शांति पर है और पाकिस्तान का फोकस लड़ाई झगड़ो पर है । तो वहां भुखमरी लाचारी और पिछड़ापन है ।
  
हमारे देश का फोकस किस पर होना चाहिए? :- पाकिस्तान एक ऐसे इंसान की तरह है जो ना खुद बस्ता है और ना किसी को बस्ते हुए देखना चाहता है । पहले तो ऐसे इंसान से दूर ही रहना चाहिए लेकिन यहां दूर भी  नही हो सकते  इसका सिर्फ एक ही इलाज है की एक बार ही इसे सबक सीखा दिया जाए । कहते है -

" जो आपकी जिंदगी  में कील बनकर बार बार चुभे ,उसे एक बार हथौड़ी बन कर ठोक दो "

पाकिस्तान भी हमारे लिए ऐसी ही कील बनी हुई है जो बार चुभती है । इसे ठोकना अनिवार्य  है  नही तो ये हमेशा ही हमे दर्द देती रहेगी । 

अपने देश के लिए जान देना फक्र की बात है :- लेकिन हम जान क्यों दें और क्यों लें? हम अपनी जान मान आन देश को आगे बढ़ाने में लगाए देश को वो मुकाम दिलाये जिससे दुनिया जान सकें । भारत पिछड़ा नही हर चीज में आगे है , सर्व सम्पन है विकास शील देशो में गिनती है । 

दुश्मन देशो से कैसे निबटे : -  इन का यही इलाज है जो अब नरेंद्र मोदी जी ने किया है । दुश्मनो को घर में जाकर ठोका जाये।  और किसी भी आम इंसान को कोई नुकसान ना पहुचे । 


दर्द सबको होता है :-  जब एक फौजी देश पर शहीद होता  है, तो उसके परिवार वालो को उसके मरने का दुःख भी होता है और उस पर गर्व भी होता है । लेकिन जब और ज्यादा दुःख होता जब मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार इंसान दुश्मनो का फेवर करते हैं । 



Saturday, October 1, 2016

द्रढ निश्चयी बनें !!!

दोस्तों ! परेशानियों का रोना  तो कमजोर  दिल वाले  लोग  रोते  हैं । द्रढ़ निश्यय तो अपना ध्ये तय करते हैं । और धेय को प्राप्त करने के लिए सक्षम बनने में द्रढ निश्चय कारगर हथियार साबित होता है । द्रढ निश्चय से ही  इंसान इच्छा को परिणाम में परिवर्तित करने में सफल होता  है ।  जैसे -


डेमोंस्थ्नीज तोतले होने के बाबजूद दुनिया के महान वक्ता बने " 

अपने अनुकूल परिणाम हासिल करना चाहते हो तो दर्द निश्चय बनो । द्रढ निश्चय  से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है । 

द्रढ इच्छा शक्ति  ही लक्ष्य के प्रति द्रढ़ निश्चय बनाती है :- असफल होने का मुख्य कारण द्रढ निश्चय का आभाव रहता है । जिसकी वजह से हमारे प्रयास में कमी रह जाती हैं । और हम  लक्ष्य भेदन से भटक जाते हैं । जिसकी वजह से हम मंजिल तक नही पहुंच पाते ।    

द्रढ निश्चय इंसान ही सफल हो सकता है :- किसी भी सफल इंसान से मिलो तो जानोगे की उसे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा थी उस इच्छा ने ही उसे द्रढ निश्चय बनाया । और द्रढ निश्चय इंसान विपरीत परिस्थितियों को भी अपने फेवर में कर  लेता है । 


द्रढ निश्चय   के साथ कार्य करने से सफलता अवश्य मिलती है :-दर्द निश्चय की शक्ति लक्ष्य की तरफ प्रेरित करती है । जिससे हम बड़े बड़े समस्याओं को पार करके भी सफलता हासिल कर लेते है । 

कभी हमारी योग्यता में कमी आए  तो उत्साह से पूरा किया जा सकता है । अगर जिदगी में चुनोतियों का सामना करना पड़े तो अपने उत्साह को कम ना होने  देना । संघर्स से योग्यता बढ़ती है |  किसी महान व्यक्ति ने कहा  है कि -

      "सफलता का कमल कठनाई के कीचड़ पर खिलता है "  

सबसे अच्छा दिन आज है :-   कई लोग अन्धविश्वास या आलस्य में कार्य को टालते हैं  उस दिन करुगा, उस तिथि में करुगा वगैरा वगैरा । जबकि ये गलत है वो ही समय सब से अच्छा है, जब आपके मन में किसी कार्य को करने की  आए । कई बार ऐसा होता  है कि  हमारा मन कार्य में नही लगता और हम कार्य छोड़ देते हैं । आप के मन मानी तरीके से  कार्य  करने से सक्सेस मिलेगी ? किसी भी कार्य में आप तभी सक्सेस हो सकते हो जब आप  नियमित रूप से  कार्य करोगे और डेट टाइम से पहले पूरा करें । 

टारगेट बना कर चलें :- जब आप टारगेट बनाकर चलते हो तो हर काम समय से व क्वालटी से पूरा कर  लेते हो। लक्ष्य पाने के लिए टारगेट बनाकर चलें व धैर्य के साथ काम करें । तभी आप सक्सेस हो पाओगे