Saturday, May 13, 2017

क्या किसी भी समस्या का रोना रोने से उस समस्या का समाधान निकलता है ?



  
    
Image result for rote kyu hoदोस्तों ! ' में ' कल एक फ्रेंड से मिली वो  मुझे मिलते ही अपनी परेशानियों का रोना रोने लगी| जैसे ज्यादातर लोगो की हैबिट होती है कि किसी से मिलते ही किसी की निंदा या स्तुति में लग जाते हैं| जब मैने उसकी परेशानी का कारण पूछा तो उसने अपनी परेशानीयों का कारण किसी तीसरे को बताया | इस बात  को  लेकर में सोच रही  थी कि क्या कोई भी किसी को परेशान कर सकता है ? या किसी भी परिस्थति में परेशान या खुश होने कारण हम स्वयं है ? कोई भी हमे तब तक दुख या सुख नही दे सकता जब तक हम उसे इजाजत ना दें | हम अपनी लाइफ के जिम्मेदार खुद हैं | सही कहा है किसी ने -

" तुम्हारी जिंदगी में होने वाली हर चीज के जिम्मेदार तुम हो ,इस बात को जितनी जल्दी मान लोगे, जिंदगी उतनी बेहतर हो जाएगी "

अपने डिसीजन खुद लीजिये :-अपनी जिंदगी के निर्णय आपको खुद लेने होंगे और अगर आप निर्णय नही ले रहे हैं तो ये भी निर्णय आपका है आप इसके लिए किसी और को दोष  नही दे सकते | हम अपने सुख व दुखो का कारण किसी और को मानते हैं | मतलब की हमने अपने सुख - दुःख की चाबी ओरो के हाथ दे रखी है|जैसे की घर, परिवार, समाज,रिलेटिव | वो जैसा व्यवहार हमारे साथ करते हैं हम वैसा ही रिएक्ट करते हैं | जैसे किसी ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार किया तो हम खुश व किसी ने गलत व्यवहार किया तो दुखी | पर  क्या रोने से किसी समस्या का समाधान निकलता है ? ' नही ' परंतु हम इस बात को मानना ही नही चाहते कि रोने से कुछ नहीं होने वाला और कोई भी छोटी सी घटना घटने पर दुसरो को दोष देने लगते हैं और अपने दुखो का कारण उन्हें मान बैठते हैं|जबकि हमे अपने अंदर झांकना चाहिए कि मेरी परेशानियों का कारण क्या है ? महाभारत में लिखा है कि -

" खुद को जान लो प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर का व्यक्त रूप है|परन्तु इसे कोई नही जनता और ना ही स्वयं को देख पाता है|इसलिए वो ये इच्छा रखता है कि दूसरे हमे बताये हम कौन हैं ? क्या हैं ? और दूसरे तो स्वयं अपने अज्ञान से घिरे रहते हैं वो स्वयं को नहीं जानते तो हमे किस प्रकार बताएगे कि हम क्या हैं ?"

भगवान ने हमे ये जीवन श्रेष्ठ से श्रेष्ठ रूप में जीने के लिए दिया है :-अगर आप अपनी लाइफ में घुट घुट के जी रहे हो तो आप धरती पर बौझ हो, धिक्कार है आप पर, आपको इस धरती पर रहने का कोई अधिकार नही है | जिंदगी में हर इंसान को आगे बढ़ने का मौका मिलता है इसलिए आपको जब जहां जैसा मौका मिले अपने आपको सर्वश्रेष्ठ रूप में ले जाने का या बनाने का प्रयास करना चाहिए |जिससे पारिवारिक ,कार्यक्षेत्र व समाज में सर्वश्रेठ बन सको | दुखों व परेशानियों से क्यों घबराते हो? ये तो सभी के जीवन का हिस्सा हैं | महाभारत में कहा गया है कि -

" अपने दुखों को संघर्ष बना लो, जो अपने दुखों को गले लगाए रहता है वो निर्बल बन जाता है | किन्तु जो व्यक्ति सारे समाज की पीड़ाओं को ह्रदय से लगाकर संघर्ष कर्ता है वो बलवान बन जाता है " 

लाइफ में कुछ नियम बनाओ और उन्हें किसी के लिए भी ना बदलो :- अगर आपकी लाइफ में कुछ नियम नही हैं तो आप वेस्ट हो जाओगे | जो भी आएगा वो आपको  यूज करने के लिए ही आयेगा | इसलिए अपनी जिंदगी में ' नो जोन ' होना जरूरी है| जब आप ' नो कम्प्रोमाइज जोन ' होंगे तभी आपकी इज्जत होगी सबके पीछे चलने वालो की कोई इज्जत नही होती | जितने हम नियम कानून से चलते हैं उतनी ही समाज हमे वेल्यू देता है | समाज में सम्मान सिर्फ उसका होता है जो अपनी शर्तो पर जीता है | अपने स्वाभिमान को नही छोड़ता | महाभारत में भी भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि -

" जिनमे आत्मसम्मान नही होता, उन्हें सम्मान कैसे मिल सकता है "

परिस्थतियों का रोना छोड़ो , परिस्थतियों को बदला जा सकता है  :- क्या एक कालिज में पढ़े लिखे, एक जैसी डिग्री लिए हुए एक जैसी सफलता पाते हैं ? ' नही ' उनमे से  कुछ ऊंचाईयों को छूते  हैं , कुछ औसत रहते हैं और कुछ साधारण जीवन भी नही जी पाते और पूरी जिंदगी परेशानियों का रोना रोते रहते हैं | ऐसा क्यों ? जब कालिज एक था पढ़ाने वाले टीचर एक थे, वहा का इनवारमेंट एक था , डिग्री एक थी | फिर सब छात्रो की कामयाबी एक जैसी क्यों नहीं ? डॉ उज्ज्वल पटनी ने  कहा है कि -

" जितने भी लोग परिस्थतियों का रोना रोते हैं वो हकीकत में अपना सामना नही करना चाहते| खुद को फेस नही करना चाहते कि मेरे अंदर निर्णय क्षमता की कमी है, मेरे में गट्स की कमी है, मेरे विजन की कमी है, मेरे में लक्ष्य की कमी है मुझे इन्हे सुधारना चाहिए|  मुझे खुद को बेहतर करने की कमी है वे सिर्फ बच  निकलने के लिए गली देखते हैं | यदि परिस्थति ही सब कुछ होती तो गरीब सिर्फ गरीब होते और अमीर सिर्फ अमीर रहते | किसी गरीब को अमीर बनने की अनुमति नही होती | एक भी सक्सेस स्टोरी संसार में नही बनती और जो जिस माहौल में रहता है वो वैसा ही बन कर रह जाता  " 

सक्सेस इंसान परस्थतियो को रोना नही रोता| वह परिस्थतियो का सामना करता है | परिस्थतियो का रोना मतलब अपना टाइम बर्बाद करना है | रोना छोड़िये और सोचिये कि विपरीत परिस्थति में आपकी कौन मदद कर सकता है ? किस की मदद से विपरीत परिस्थति को सभांला जा सकता  है ? महाभारत में भी आया है कि -

"  जीवन हो या वाहन जब भी पहिया धरती में फंस जाता है तो किसी की सहायता के बिना नही निकलता "

अपने दुखडो का रोना औरो के सामने मत रोइये :- कई क्षण हमारे जीवन में ऐसे आते हैं जब दुसरो के किये कार्य हमारे मन को हिला कर रख देते हैं| हमारा संयम छूटने लगता है ऐसी परिस्थति में संयम बनाये रखना बहुत जरूरी है| लेकिन हम अपने दुखड़े ओरो को सुनाने लगते हैं| क्या इससे कोई फायदा है ? जिसके सामने आप अपने दुखड़ो का रोना रो रहे हो क्या वो आपके दुःख दूर करेगा ? ' नही ' दुसरो के सामने समस्या का रोना रोने से तो आपकी समस्या और बढ़ेगी | एक भजन में था  -

" दुनियां के आगे तू मत रोना ,रोने से बंदे कुछ काम नही होना| दुनियां रोके सुनेगी और हंस के उड़ाएगी "  

समस्या का समाधान निकालना है तो उसी से बात करिये जिससे आपको समस्या है:- हमारी समस्या ही ये है कि हम अपनी समस्या का रोना सबके सामने रोते रहते हैं लेकिन हमे जिससे समस्या है हम उससे बात नही करते | जब कि किसी और के पास हमारी समस्या का कोई समाधान नही है| जिससे आपको समस्या है उससे बात कीजिये और अगर  वह आपकी समस्या को नही समझ रहा है तो साम ,दाम दंड, भेद चारो निति अपनाइये | लेकिन गलत  से समझौता मत कीजिये महाभारत में भी लिखा है कि -

" बलवान शत्रु से समझौता करके कोई फायदा नही है | क्यु कि बलवान व्यक्ति हमारे समाधान को हमारी दुर्बलता समझता है|  और दुर्बल व्यक्ति का सम्मान नही करता | इससे अपना  बल और आत्मविश्वास टूटता है | निर्बल व्यक्ति से समाधान करने पर निर्बल व्यक्ति कभी संधि नही तोड़ता | इसलिए निर्बल व्यक्ति के साथ समाधान करने और बलवान शत्रु से युद्ध करने मे ही भलाई है "   

आपको अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी| सामने वाला सिर्फ आपको एडवाइज दे सकता है | रास्ता दिखा सकता है लड़ना आपको है और अगर आप नही लड़ सकते तो पूरी जिंदगी परिस्थतियों का रोना रोते रहिये |
   

Monday, May 1, 2017

एकाग्रता के पीछे सफलता दौड़ी चली आती है !!!



दोस्तों ! टीनऐजर उम्र  ही ऐसी  होती है इस उम्र में मन एकाग्र नही रहता | बच्चे नए नए ख्वाब देखने में लगे रहते हैं | जबकि इस उम्र में सबसे ज्यादा एकाग्र रहने की जरूरत है क्यों कि ये  एक गोल्डन टाइम है इस उम्र में जैसे बनना चाहते हो वैसा बन जाओगे | और ये समय निकल गया तो फिर सक्सेस के चांस कम होते जाते हैं | जीवन में संघर्ष बढ़ता जाता है | और फिर चाहकर भी आप उतना समय ,मेहनत और और लक्ष्य के प्रति जवाब देहि पूरी नही कर पाते | महाभारत में लिखा है कि -

" संसार का कोई भी कार्य तभी सम्पन होता है जब शरीर चंचल और मन स्थिर हो "

इसलिए समय रहते लक्ष्य तय करना अनिवार्य है | बिना लक्ष्य निर्धारण के जीवन में कभी भी बड़ी उपलब्धि हासिल नही कर सकते | लक्ष्य प्राप्ति के लिए छोटे छोटे लक्ष्यों में बाटकर बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं | लेकिन इसके लिए मन का एकाग्र होना अनिवार्य | एकाग्र मन से ही सक्सेस हो सकते हो | इसके लिए ये जानना जरूरी है कि एकाग्रता क्या है ? 


"हमारे मन का  किसी विषय वस्तु पर स्थिर हो  जाना ही एकाग्रता है" 

                                                                       - ब्रह्माकुमारी 


एकाग्रचित व्यक्ति जल्दी सफलता प्राप्त करता है | और करनी भी चाहिए | क्यों ना करे ? एकाग्रता ही तो इंसान को सक्सेस बनाती है | इसी से वह रात दिन मेहनत करता है और यही सफल व्यक्ति की पहंचान है | ऐसे कर्म प्रधान लोग ही इतिहास रचते हैं | 



एकाग्रता क्यों जरूरी है :- किसी भी श्रेष्ठ कार्य को करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत पड़ती है | और एकाग्रता ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है |एकाग्रचित व्यक्ति कम बुद्धि होने पर भी बड़े से बड़े कार्यों को अंजाम दे सकता है | जिसने भी दुनियां में महत्ता प्राप्त की है उसने एकाग्रता से ही की है | एकाग्रचित इंसान को सामर्थ्य की कमी नही है| एकाग्रचित इंसान के संकल्पो में बहुत बल होता है | जो लोग एकाग्र होते हैं वे अपने संकल्पो से ही अपने व दुसरो के कल्याण का रास्ता खोज लेते हैं | एकाग्रता से ही मन को मजबूत बनाया जा सकता है | मन की मजबूती इंसान को कामयाब बनाती है | 

" जब मन निश्चल होता है, तभी  समस्त विधाएं प्राणीयो  को सिद्धि प्रदान करती हैं | मन एकाग्र होने पर ही तप और मंत्रो की सिद्धि होती है " 
                - पद्मपुराण


एकाग्रता के पीछे सफलता दौड़ी चली आती है: -सफलता प्राप्त करने के लिए एकाग्रता अनिवार्य है | किसी भी कार्य में सफलता और असफलता हमारी एकाग्रता पर निर्भर करती है | कार्य को पुरा करने के लिए एकाग्रता सबसे पहली सीढ़ी है | जब तक आप एकाग्र नहीं होंगे तब तक आप कोई भी कार्य पुरा नहीं कर सकते | एकाग्र व्यक्ति को ही ही पूर्ण सफलता मिलनी संभव है | एकाग्रता से ही मानव को चरम लक्ष्य प्राप्त हो सकता है | मनुष्य को शारीरिक व मानसिक दोनों ही रूप से चलना होता है तभी जाकर सफलता प्राप्त होती है | 


अगर इंसान को ये पता लग जाये की उसकी मंजिल कहा है ? वहां  कैसे पहुंचा जाएं  ? मंजिल तक पहुंचने में आपकी मदद कौन कर सकता है ? तो उसकी शक्ति का क्षय नही होगा | और वह अपनी मंजिल पर आसानी से पहुंच जायेगा | ऐसे  हजारो प्रमाण मिल जाएगे जिन्होंने अपने मन को लक्ष्य पर एकाग्र किया है उन्हें  आसानी से सफलता मिली है | और जो लोग इधर उधर भटकते रहे हैं झूठे वादे व झूठी कल्पनाओ में समय बर्बाद करते रहे हैं  वे सिर्फ सपने ही देखते रह जाते हैं | और कहते भी हैं कि -

जो बल स्थिर नही वो किसी काम का नही"

अगर आप अपनी लाइफ में असफल नहीं होना चाहते, समाज में कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते  हो तो अपने मन को चारो तरफ से हटाकर पूरी तरह से लक्ष्य पर एकाग्र कर दो | 


" नेपोलिन के बारे में बताते हैं कि उनका मन इतना एकाग्र था कि वे एक बार युद्ध की व्यवस्था ठीक तरह करके गणित के सिद्धांतो का हल निकालने में लग जाते थे " 


तबुओं पर गोले बरसते रहते थे ,सिपाही मरते रहते थे फिर भी उनका मन गणित के सिद्धांतो में लगा रहता था | वे बिल्कुल भी विचलित नहीं होते थे | और  स्वामी विवेकानंद जी के बारे में बताते हैं कि -


"स्वामी विवेकानंद जी की एकाग्रता इतनी विलक्षण थी कि वे पुस्तक पढ़ते वक्त 10 ,15 सेकेंड  में ही पृष्ट बदल देते थे " 


उनका कहना था कि जब इंसान का अभ्यास बढ़ जाता है तब इंसान की ग्रहण करने की शक्ति बढ़ जाती है| इससे इंसान पुरा पृष्ट एक साथ पढ़ सकता है | और ये केवल एकाग्रता व अभ्यास से ही संभव है |  


हमारा मन एकाग्र क्यों नहीं रहता ? हम अपने आपको समय नही  देते|  हमारे विचारो में हमेशा हलचल रहती है, व्यर्थ के विचार चल रहे होते हैं, उन्हें रोकें | जब हम अपने विचारो को रोकेंगे तभी हम अपनी समस्याओं का समाधान ढूढ सकेंगे हमे खुद के साथ क्वालटी समय बिताने की जरूरत है | जैसे हमारे शरीर को रेष्ट की जरूरत होती है उसी तरह दिमाग को भी रेष्ट देना अनिवार्य है | जब ये दिमाग ज्यादा चलता रहता है तो ये थक जाता है और थका हुआ मन सही निर्णय नही ले पाता | महाभारत में एक प्रसग आया था कि -

"वेदव्यास जी की समाधि लगने में 6 महीने लगे ,जब कि उनकी समाधि शीध्र लगनी चाहिए थी | इसका मतलब है व्यास जी को स्मृतियों को मिटाने में इतना समय लगा " 

जितनी जल्दी हम अपनी स्मृतियों को मिटा दें उतनी ही जल्दी हमारा मन एकाग्र हो सकता है | स्वछ व निर्मल मन एकदम एकाग्र हो सकता है | तुलसीदास जी ने भी रामायण कहा है कि -

          " बिगरी जन्म अनेक की, सुधरत पल लगे ना आध "
  



Friday, April 21, 2017

जीवन में कामयाबी "कर्म" से मिलती है या किस्मत से ?



Image result for kamyabi mehnt se milti hai ya karm se ?दोस्तों ! सदियों से बहस चली आ रही है कि इंसान को कर्म से कामयाबी मिलती है या किस्मत  से ? | कर्म को मानने वाले  लोग कहते हैं कि किस्मत कुछ भी नहीं है|  जीवन में अगर कुछ हासिल करना है तो कर्म करना ही पड़ेगा | और कहा भी गया है कि -

" जग सारा कर्म क्षेत्र है , जीवन है संग्राम | विजय श्री वही पाएंगे जो करेंगा का काम   " 

मंजिल पर वही पहुंचते हैं जो लक्ष्य बना कर उस पर चलते हैं | बस खुद को जानना है कि  हमारी मंजिल कहा है ? हम खुद क्या चाहते हैं ? और जो चाहते हो वो करो उसी कार्य में आपको सक्सेस मिलेगी | और आज तक जो लोग कामयाब कहलाये गए हैं वे वही लोग हैं जिन्होने अपनी पसंद की फिल्ड चुनी और उसी में अपना कैरियर बनाया | उस काम को उन्होंने इंजॉय किया | जगदीश भारद्वाज कथा वाचक का कहना है कि -

" राज तु अपनी हकीकत का अगर पा जायेगा ,जिंदगी जीने का मजा आ जायेगा " 

लेकिन भाग्य का समर्थन करने वाले कहते हैं कि इंसान की किस्मत में जो लिखा है वही होकर रहेगा | उसे कोई नहीं बदल सकता | और जगदीश भारदूआज जी का कहना है कि -

         " होनी होकर के रहे , होनी से सब हारे " 

एक तरफ श्री राम जी  के तिलक की तैयारी हो रही थी दूसरी तरफ उन्हें वनवास हुआ | इसलिए जो लिखा होता है वही होकर रहता है | वैसे ही हालात बनते जाते हैं और वैसी ही इंसान की बुद्धि बन जाती है | 

दोस्तों ! मेरा मानना है कि दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं 'भग्य' के बिना 'कर्म' नही फलता और कर्म के बिना भाग्य साथ नहीं देता | लेकिन अगर हमारे भाग्य में भूखा रहना लिखा है तो कर्म करके पेट तो भर ही सकते हैं कम से कम भीख मांगने से तो बच  ही जाएंगे | भिखारियों से तो जिंदगी अच्छी होगी | 

भगवान श्री कृष्ण जी ने भी श्री मद भागवत में कर्म को ही प्रधान बताया है| कर्म प्रधान पूरी द्रढ़ता ,हिम्मत और उत्साह से  हंसते खेलते अपनी मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करते हैं | और आलसी लोग  किस्मत हालत समय व लोगो को दोषी ठहराकर असफलता व गरीबी से समझौता करके बैठ जाते  हैं |जबकि भगवान ने हर इंसान को सोचने समझने की शक्ति दी है जिससे वह सोच समझकर अपने अनुभवों के आधार पर सही गलत का निर्णय लेकर सही रस्ते का चुनाव कर के आगे बढ़ सकता  |  

कई युवा सोचते है कि बिना मेहनत करे सब कुछ हासिल हो जाए|  इसलिए अपनी कुंडली दिखाते हैं, ग्रह दशा दिखा कर पूजा पाठ कराते हैं | जबकि कहा गया है कि - 

" जीवन में संतुलित रहे धर्म, अर्थ और काम | इनका संतुलन जहां बिगड़ा वही बिगड़ा काम " 

जबकि कुंडली व ग्रह दशा का तो कोई जिक्र ही नहीं आया | लेकिन पूजा करना अच्छी बात है भगवान से आशीर्वाद लो लेकिन किस्मत के भरोशे रहकर कर्म से मत भटको | पूजा का  फल मिलता है इसी लिए हमारे धर्म शास्त्रों में भी पूजा पाठ का विधान बतलाया गया है| पूजा पाठ से आत्मविश्वास बढ़ता है  और आत्मविश्वास  से हारी बाजी भी इंसान जीत जाता है | और कहा भी गया है कि -

" तुलसी भरोषे राम के ,निर्भय होकर सो | होनी होकर के रहे अनहोनी टल जाये "

लेकिन इंसान को कर्म करते रहना चाहिए क्यु कि कर्म से भाग्य बनता है | इंसान कर्म करके ही कामयाब हो सकता है | इसलिए कहा गया है कि भाग्य भी उन्ही लोगो का साथ देता है जो कर्म करते हैं | कहते हैं कि -

" ख्वाहिशो से नहीं गिरते फूल झोली में , कर्म की साखा को हिलाना पड़ता है | कुछ नहीं होता अँधेरे को कोसने से अपने हिस्से का दिया जलाना पड़ता है  " 


Thursday, April 20, 2017

सक्सेस के चार स्तम्भ हैं !!!


Image result for four pillarsदोस्तों ! जितने हम सक्सेस होते जाते हैं उतना ही  हमारा सामजिक दायरा बढ़ता जाता है| और  जितना हमारा सामाजिक दायरा बढ़ता है उतने ही हम बीजी होते चले जाते हैं | और जितना हमारा सीडुल्य बीजी रहता है उतना ही हम कम समय अपने लक्ष्य पर दें पाते हैं | जबकि ये  जरूरी है कि हमारा फोकस लक्ष्य पर हो | अब  आप बताइये कि अपनी फिल्ड में  सक्सेस के  लिए क्या- क्या  अनिवार्य है   ? 

क्या हम किसी एक चीज को फॉलो करके सक्सेस हो सकते हैं ? क्या एक खूबी हमे सक्सेस बना सकती है ? 'नही दोस्तों ' हमारी एक खूबी किसी भी फीड में सक्सेस नही दिला सकती । सक्सेस के लिए निपुणता जरूरी है जब तक आप के अंदर एक भी कमी है तब तक आप सक्सेस नही हो सकते । सक्सेस के लिए कई चीजों का होना अनिवार्य है जैसे -

जिद्दी होना 1 :- किसी भी कार्य में सक्सेस होने के लिए सक्सेस होने की जिद्द  होना अनिवार्य है |  जिद्द  ही आपको सक्सेस की राह दिखाती  है । जिद्दी इंसान बाकि लोगो से कुछ हटकर होता है । उसे जीतने की जिद होती है उसे अपने लक्ष्य के सिवाय अपनी मंजिल के सिवाय कुछ और नही दिखाई देता। जब तक किसी लक्ष्य को पाने की, किसी मंजिल तक पहुचने की जिद नही होगी, तब तक उस लक्ष्य तक पहुंचा ही नही जा सकता । आप किसी भी सक्सेस इंसान को देख लो आज वो जिस मुकाम पर है वहा तक पहुंचने के लिए उन्होंने खुद से जिद की थी । वे उसी जिद्द की बदौलत बुलंदियों तक पहुंचे हैं । दुनियां में आज तक जो भी बड़े परिवर्तन होते हैं वे किसी ना किसी की जिद की वजह से होते हैं । जब इंसान के अंदर जिद आ जाये तो फिर उसे कोई भी मुश्किल कोई भी समस्या या कोई भी असफलता रोक नही पाती। जिद्दी व्यक्ति जो चाहता है उसे  पा कर  ही रहता। 

कड़ी मेहनत 2 :-अगर जीवन में कामयाब होना है तो लगातार कड़ी मेहनत करनी ही होगी | उसमे एफर्ट डालना ही होगा और बेस्ट काम करना है तो बेस्ट एफर्ट डालना होगा | जितना अधिक एफर्ट डालोगे उतना अच्छा काम होगा | जिंदगी में कामयाब होना है तो लगातार एफर्ट लगाना पड़ेगा |  एफर्ट  के बिना प्लांनिग धरी की धरि रह जाती हैं । आप जो भी कार्य करते हैं उसे बेहतर करने की कोशिस करें| क्युकि एवरेज एफर्ट तो सभी लोग लगा रहे हैं | और ये ना भूलें की सक्सेस  कुछ कीमत देकर मिलती है और वह कीमत है कड़ी व लगातार महेनत और समय | विन्से लोम्बार्डी का  कहना है कि -

" कठिन परिश्रम वह कीमत होती है जो हमे सफलता प्राप्त करने के लिए चुकानी पड़ती है , मुझे लगता है अगर आप ये कीमत चूका सकते हैं तो आप कुछ भी पा सकते हैं " 

और कार्लिन पॉवेल का कहना है कि -

" कोई भी सपना जादू करके  हकीकत नहीं बन सकता इसमें पसीना ,दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत लगती "  

धैर्य 3 :- दोस्तों! अगर आप में धैर्य की कमी है तो आप सक्सेस होने से पहले ही पलायन कर जाओगे जिसकी वजह से आप काबिल होते हुए भी सक्सेस का रस नही चख पाओगें । लेकिन सक्सेस चाहने वालो को धैर्य रखना कठिन लगता है | लेकिन धैर्य रखना होगा सही समय आने का इंतजार करना होगा | खुद को ये समझाना ही होगा कि जैसे  रातो रात कोई बिल्डिंग तैयार नहीं हो सकती उसी तरह रातो रात सक्सेस भी नहीं हो सकते |  कहते हैं कि -

" घर बनाने में महीने लगते हैं और महल बनाने में साल लगते हैं "

4 योग्यता  :- आप जो भी कार्य कर रहे हो अगर आपके अंदर वो योग्यता ही नही है तो आप सक्सेस नही हो पाओगे ।इसलिए आप जिस भी फिल्ड में काम कर रहें हैं उस की रिलेडिड ट्रेनिंग्स हमेशा लेते रहिये | अगर आप उन ट्रेनिंग्स को नहीं लेंगे तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि आप जिस फिल्ड के अंदर काम कर रहे हैं उसमे क्या क्या नयी चीजे डवलप हो रही हैं |    



Saturday, April 1, 2017

बड़ा बनना है तो बड़े सपने देखो !!!




Image result for jindgi me aage badne ke sutraदोस्तों !  आज युवा वर्ग का बड़ा सपना क्या है ? सिर्फ ये है कि  6 डिजिट में सैलरी हो , 4 वीलर गाड़ी हो , अच्छे दोस्त हो ,मन चाहा लाइफ पार्टनर हो ,  बड़ा सा  घर हो । कुछ और बड़ा सपना  है ? ' नही '

 ज्यादातर  लोग इतने को ही बड़ा  सपना मानते हैं । लेकिन नही ! दोस्तों ! ये बहुत छोटा सपना है । इसमें तो अपना घर परिवार, समाज भी सामिल नही है । फिर देश के लिए आप क्या कर सकोगे ?

 जब अपने परिवार या रिलेटिव को भी साथ लेकर नही चल सकते , तो आप और एक मजदूर में क्या फर्क रह गया ?  अपनी  जरूरतें तो मजदूर भी पूरी कर  लेता हैं, अपना परिवार तो वो भी पालता है । फिर आपने कौन सा बड़ा काम किया ? या कौन सा बड़ा सपना देखा ?  आपसे बड़े सपने तो फिर आतंकवादी ही देखते हैं कि मरना  है तो सैकड़ो को लेकर मरना है । और सैकड़ो को साथ लेकर मरते हैं।   

दोस्तों ! समाज की समस्या ही ये है कि जो कुछ अच्छा करना चाहते हैं वो बहुत छोटा सोचते हैं और छोटा कर पाते है । क्यों कि सही का साथ देने के लिए मजबूत आदमी निकल कर नही आते । और जो गलत सोचते हैं वो बहुत बड़ा सोचते हैं और गलत करते हैं और उनका साथ देने के लिए भी बहुत सारे लोग निकल आते हैं । तभी कहते हैं कि - 

" घास  बिना  बोए उगती है , और गुलाब को  उगाने  के लिए  माली को बहुत महेनत करनी पड़ती है "

लेकिन जो वेल्यु गुलाब की है वो घास की कभी नही हो सकती ।  बडी सोच पर टिके रहने में डर लगता है, थोड़ी ही देर में जोश ठंडा पड़ने लगता है , अपने मन से आवाज आने लगती है कि ये बहुत बड़ा है इतना करना मुशिकल है ना मुमकिन है।

ऐसा क्यों ? क्योंकि सालो से हमे छोटा सोचने की आदत बन चुकी है । छोटा सोचने की आदत को हमे बदलना होगा और ये तभी संभव है जब हम अपने मन की व बाहर से आने वाली नैगेटिव  आवाज को सुनना अवॉयड करेंगे। जब आप ऐसा करेंगे तो एक दिन आपको अंदर बाहर की नैगेटिव आवाज आनी भी बन्द हो जाएगी। और जो आपने सपना देखा है उसे हकीकत में बदलता हुआ देख पाएंगे।  d r apj अब्दुलकलाम जी ने बहुत अच्छी बात कही थी।

" सपने वो नही होते जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमे सोने नही देते "  

 जो सपने हम अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए देखते हैं, कुछ करने के लिए देखते हैं,समाज के उथान के लिए देखते हैं  वो सपने वास्तव में सोने नही देते। चौबीसों घन्टे वही सपने, उनकी प्लांनिग हमारे दिमाग में घूमते  रहते हैं।और तब तक रात दिन हमे शांति से नही बैठने देते जब तक हमारा सपना सच नही हो जाता। अनोनीमौस ने कहा है कि -

" जिन्हें सपने देखना अच्छा लगता है, उन्हें रात छोटी लगती है। जिन्हें सपने पूरे करना अच्छा लगता है, उन्हें  दिन छोटा लगता है "


जब हम किसी लक्ष्य की तरफ बढ़ते हैं तो अनेको समस्याएं आती हैं । लेकिन जब तक हर समस्या का समाधान नही मिल जाता तब तक हमारा दिमाग दौड़ता रहता है । दोस्तों ! दुनियां में ऐसी कोई चीज नही है जिसे आप चाहो और वो आपको ना मिले । बस हमारे सपने में जान होनी चाहिए उसके प्रति मन में जनून होना चाहिए। सपने के प्रति समर्पित होने चाहिए तभी आप अपने सपने को सच होते हुए देख सकते हो । 



हर अविष्कार किसी ना किसी का सपना रहा है। फिर एक दिन वह हकीकत बन के सामने आया है। जहाज बनाने का सपना राइट ब्रादर ने देखा ,बिजली का बल्ब बनाने का सपना थॉमस एडिसन ने देखा, रेल बनाने का सपना जेम्स वाट ने देखा, tv बनाने का सपना जान लाजी बायर्ड ने देखा, इंटरनेट का सपना विटेन कर्फ़ ने देखा । सुई से लेकर जहाज बनाने तक का  पहले सपना ही था । हर चीज का पहले सपना देखा गया फिर हकीकत बनी । 

और ये सभी सपने सच हुए। और सभी बड़े सपनो पर पहले दुनिया हंसी।और जब ये अविष्कार हुए तब दुनिया ने इन्हें माना और आज हर इंसान इन अविष्कारो का फायदा उठा रही है ।अविष्कारो से ही हमारी जिंदगी बदली है ।

1755 में एक प्रोफेसर ने फ्रिज का डिजाइन बनाया था उस पर किसी ने ध्यान नही दिया । बाद मे 1805 में oliver evans  एक अमरीकी अविष्कारक ने फ्रिज के बारे में बताया पर तरीका वही थालेकिन इसके बाद 1876 में  carl von linde  ने फ्रिज बनाने के तरीके को बेहतर बनाया ।समय के अनुसार सभी चीजो को बेहतर बनाया जा रहा है  


इसलिए दोस्तों ! जो भी आप सपने देखते हो उन पर विश्वास करो । उन्हें पूरा करने की कोशिस जरूर करो । क्या पता परमात्मा ने आपको किस अविष्कार के लिए या समाज के उथान के लिए दुनिया में भेजा है । 


सोचो आपकी हॉबी क्या है ? आप क्या  करते हुए खुद को भूल जाते हो ? क्या लाइफ में करना चाहते हो ? कुछ ना कुछ तो ऐसा जरूर होगा जिसे करके आपको ख़ुशी मिलती हो , जिसे करते हुए आप खुद को भूल जाते हो उसे जरूर करो। ज्यादा से ज्यादा समय उस कार्य को करने में लगाओ । 












Wednesday, March 29, 2017

जिंदगी में आगे बढ़ने के तीन सूत्र !!!




दोस्तों ! समय , हालात , इंसान या किस्मत को दोष देना बंद करो ।किस्मत के भरोषे रहकर आप जिंदगी में आगे नही बढ़ सकते । जिंदगी के भरोसे रहना मूर्खता होगी। रही संयोग की बात तो संयोग हर बार नही हो सकता। इसलिए अपनी कमियों को पहंचान कर सुधारते हुए  और लाइफ में आगे कैसे बढ़ सकते हैं ? ऐसा सोचते हुए आगे बढ़ो । ' जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए तीन सूत्र याद रखना। 

1 लक्ष्य स्पस्ट और सटीक रखें :- यदि  आपके लक्ष्य स्प्ष्ट हैं तो आप भटकाव से बच जाओगे ।  जैसे आप किसी बहुत भारी भीड़ में फंस गए हो और आपको ये पता है कि आप को कहा जाना है तो आप भीड़ की धक्का मुक्की में भी रास्ता नही भटकोगे। आप अपनी  राह की भीड़ को चीरते हुए  मंजिल पर पहुंच जाओगे । और अगर आपके लक्ष्य स्प्ष्ट नही है तो हो सकता है आप कोई गलत राह पकड़ लो आपको जाना कही और है और आप पहुंच कई और जाओ। फिर हो सकता है कि आप अपनी मंजिल पर कभी नही पहुंच पाओ ।  


2 एक बार मे एक से ज्यादा लक्ष्य ना बनाए :-  दोस्तों !  जब हम एक साथ कई कार्यो को शुरू कर देते हैं तो हम किसी भी कार्य में क्वालटी समय नही दे पाते। जिसके चलते हमारा कार्य पूरा तो हो सकता है लेकिन बहुत अच्छा नही हो सकता। आपने देखा भी होगा कि कई बार हम देखा देखी कई कार्य शुरू कर देते हैं और फिर पूरा ना कर पाने के कारण उन्हें बीच में ही छोड़ देते हैं। इसलिए एक बार में एक ही लक्ष्य बनाये और छोटे छोटे गोल बनाकर आगे बढ़े ।  

3 परेशानियों से घबराकर कार्य बीच में बंद ना करें :- दोस्तों !  लाइफ में जिस व्यक्ति ने आगे बढ़ कर कुछ कार्य किया है उसके मार्ग में परेशानियां तो आती ही हैं। उन्हें क्रिटिसाइज तो लोगो ने किया ही है लेकिन उन्होंने क्रिटिसाइज व परेशानियों को इग्नोर करके ही सक्सेस पाई है । जब तक आप परेशानियों के सामने घुटने टेकते रहोगे क्रिटिसाइज से बचने की कोशिस करते रहोगे तब तक आप लाइफ में आगे नही बढ़ सकते । नेगेटिव चर्चा के बारे में आप बहरे हो जाओ । आप नेगेटिव बातो को सुनना या सोचना ही बंद कर दो तभी लाइफ में आप आगे बढ़ सकते हो । 





Friday, March 3, 2017

भगवान को सिर्फ मंदिर ,गुरुदवारा ,मस्जिद ,चर्च मे नही मानवता में भी देखें !!!




दोस्तों ! मेरा बर्थ प्लेस  दिल्ली है।  मेरे पेरेंट्स उत्तर प्रदेश ( सिकन्द्राबाद ) से रहे हैं और में कापासेहड़ा में रह रही हूं इस लिए "मैने " दिल्ली , u.p , और हरियाणा के लोगो को करीब से जाना है । मैने हर जगह के इंसान में ज्यादातर एक ही खामी पाई है कि ये मंदिर मस्जिद ,गुरुद्वारा और मस्जिद में तो भगवान को देखते हैं लेकिन मानवता में भगवान को  नही  देख पाते । 

भगवान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा  व चर्च में  ही नही  बसते , भगवान सब के ह्रदय में भी बसते हैं । इसलिए हमे भगवान को भगवान की बनाई हुई सम्पूर्ण सृष्टि  में देखना चाहिए।  और  भगवान ने सबसे सुंदर रचना की  है मानव की। इसलिए हर इंसान में भगवान को देखना चाहिए। सब के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए । 


लेकिन हम करते क्या हैं ? मंदिर में  पुजा करते हैं और इंसान की अवेहलना करते हैं।  ऊँच नीच का फर्क करके इंसान को बाटते हैं  पैसे से व जाति से इंसान की तुलना करते हैं । मंदिर  मे चढ़ावा चढ़ाएंगे, कमरे बनवायेगे , आडंबर रचने वालो को पैसे देगें और किसी जरूरत मंद की मदद करने में मना कर देगें। ज्यातर लोगो से  किसी की मदद करने के लिए कहे तो एक जवाब मिलेगा  कि दुनियां गरीब है किस - किस की मदद करोगे ।

आप एक बात बताइये ?  कि क्या भगवान आपके चढावे का भूखा है ? क्या वास्तव में भगवान को आपके छपन भोग चाहिए ? क्या भगवान को आपके मंदिर की जरूरत है ? या क्या जो आप इन आडंबर रचने वालो को हजारो लाखो देते हो इन्हें आपके पैसे की जरूरत है ?  या उन गरीबो को आपकी जरूरत है, जिन्हें तीनो टाइम  का खाना भी  नही मिलता ,  उन गरीब बच्चो  को आपके पैसे जरूरत है जो जिंदगी में पढ़ना चाहते है, उन गरीब माँ बाप को पैसे की जरूरत है जिनके कई बेटियां हैं और वे उनकी शादी नही कर सकते ? 


दोस्तों ! मुझे नये नये मंदिर देखने का बहुत शौक है।  और मैने ज्यादातर मंदिर में बैठे पंड़ावों को एक बिजनिस मैने से भी ज्यादा कमाता या ये कहो की लुटता पाया है । चाहे आप गोवर्धन , तिरुपति बाला जी या काली कलकत्ता वाली आप कही भी चले जाओ। आपको दर्शन भी वही अच्छी तरह करने देगे जहाँ आप को बहुत अच्छी तरह से प्रसाद व  चढ़ावा चढ़ाते देखेंगे  । 


वाह रे हमारी सोच मंदिर मे भगवान की पथर की मूर्ति  के दर्शन करने के लिए हम हजारो रूपये खर्च कर देगे। और एक गरीब के रूप में भगवान हमारे सामने हैं हम उन्हें रोटी नही खिला सकते । गरीब कुछ बच्चो की पढ़ाई की जिम्मेदारी नही ले सकते, किसी गरीब की बेटी की शादी की जिम्मेदारी नही ले सकते। मंदिर में कमरा बनवाते हैं लेकिन किसी गरीब के एक कमरे का किराया माफ़ नही कर सकते ।

आज के दौर में ज्यादातर गुरुवो और तांत्रिको की लपेट में आकर अन्धविश्वासी बनते जा रहे हैं। हमारे धर्म शास्त्रो मे हर समस्या का समाधान मिलेगा। लेकिन इन्होंने हमे अपनी संस्क्रति से, धर्म शास्त्रों से दूर कर दिया है। इसी लिए हमारे जीवन की शांति भंग हो गई है ।

कोई इंसान जब सन्यास लेता है तो हरि भगति के लिए लेता है। लेकिन हम उसे भगवान बना देते हैं और सोचते हैं कि इसे दान देने से हमारी सारी समस्या खत्म हो जाएंगी। पर क्या ये हमारी समस्याओं को कम कर सकते हैं ? जो अपने बारे में नही जानते वो हमारा भविष्य बता सकते हैं ?क्या दुनियां में हम लोग ही परेशान हैं ? ' नही '  हमारी इस सोच का ये लोग फायदा उठाते हैं।  इससे हमारी समस्या तो खत्म नही होती लेकिन हमारा अधिक दान उन्हें पूरा भोगी बना देते हैं। और फिर इससे हमारे समाज में आसाराम जैसे पैदा होते हैं ।  

दोस्तों ! ऐसे लोगो  से प्रेरित होकर हम लोगो ने " श्याम सेवा समिति"  का गठन किया  है । 9 साल  मे अब तक हम 4 भागवत , 5 राम कथा , कई जरूरत मंद बच्चो की एजुकेशन व 16 गरीब लड़कियों की शादी करवा चुके हैं । इस कार्य में सैकड़ो लोग हमारे सहयोगी बन चुके हैं। और आपसे भी हम यही अपील करते हैं कि आप सभी मानवता में भगवान देखें , हर जरूरत मंद की  मदद करें ,  शास्त्रों का अध्यन करें , अपनी सस्कृति को बचाए ।