Thursday, February 7, 2019

जीवन का उद्देश्य क्या है ?


Related imageअगर जीवन में कहीं भी कोई भी सार्थकता है तो कष्ट के भी अपने मायने हो जाते हैं | कष्ट जीवन का एक ऐसा हिस्सा है जिसे अलग नही किया जा सकता | इसे भाग्य व मृत्यु की तरह जीवन से जुड़ा हुआ ही जानें | कष्ट व मृत्यु के बिना मनुष्य का जीवन पूरा नही हो सकता | 



मनुष्य को हर स्थान पर भाग्य का सामना करना होता है , उसके पास ऐसा अवसर हमेशा होता है कि वह अपने ही कष्टों से स्वयं कुछ हासिल कर लें | जिस व्यक्ति ने खुद को अपने भविष्य से तोड़ लिया हो वह अकसर अतीत के विचारो में ही उलझा रहता | 

असाधारण किस्म की बाहरी कठिन अवस्थाएं ही इंसान को आध्यात्मिक रूप से उन्नत होने का अवसर देती हैं | जिस व्यक्ति के पास जीवन जीने का कोई कारण रहा हो ,उसके लिए सब सहन करना सरल हो जाता है ,जो करना जरूरी हो |

जिस व्यक्ति के जीवन में कोई उद्देश्य ,लक्ष्य या अर्थ न रहा हो उसे किसी तरह से जीने के लिए लुभाना आवश्यक होता है , ताकि उसे लगे जीने का अभी कोई सार बाकि है |अन्यथा उसके लिए जीवन में कुछ भी शेष न रहता | 



जीवन का असली उद्देश्य यही है कि तुम उसकी समस्याओं का उचित हल ढूढ़ने का दायित्व उठाएं और उन सभी कामों को पूरा करें , जो जीवन ने प्रत्येक व्यक्ति के लिए तय कर रखें हैं | 



जीवन का अर्थ अज्ञात व संदिध नही हो सकता इसे बहुत ही वास्तविक व ठोस होना चाहिए| हर परिस्थति अपने अनूठेपन के कारण सबसे अलग होती हो और उस परस्थति दुवारा सामने रखी गई समस्या का केवल एक ही उचित हल होता है |    



आप किसी सार्थक गतिविधि के माध्यम से सक्रिय सर्जन करते हुए कुछ हासिल करें व एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़े | 


जब किसी मनुष्य को एहसास होता है कि उसका स्थान कोई दूसरा नही ले सकता तो इस तरह  वह अपने असितत्व के लिए एक जिम्मेदारी का अनुभव करता ,ऐसी  जिम्मेदारी जो अपनी पूरी भव्यता के साथ निरंतर बनी रहती है |  

आपने जो भी अनुभव पा लिया है ,संसार की कोई भी ताकत उसे आप से छीन नही सकती | मेरे इन शब्दों का उद्देश्य यही था कि हम अपने जीवन का सम्पूर्ण अर्थ पा सकें | 

दोस्तों ! ये समरी विकटर ई फ्रैंकल की बुक 'जीवन के अर्थ की तलाश में मनुष्य '' पार्ट 2 जीवन का उद्देश्य की है |  






Thursday, January 31, 2019

समृद्धि का रहस्य !!!

जीवन के अर्थ की तलाश में मनुष्य पार्ट 1 !!!


जिस व्यक्ति के पास अपने जीवन के लिए एक क्यों है ,वह किसी भी तरह के कैसे को सहन कर सकता है | किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन में सबसे बड़ा कार्य यही है कि वह अपने जीवन के अर्थ की तलाश करें | 


व्यक्ति चाहे तो वह वीर ,मर्यादित व गरिमामयी बना रह सकता है | या फिर स्वयं को महफूज रखने के प्रयास में वह अपने मानवीय गरिमा को भुलाकर ,किसी पशु से भी बदतर व्यवहार कर सकता है | मनुष्य का आंतरिक बल उसे नियति से भी परे ले जा सकता है | 



जो बल आपके नियंत्रण से बाहर है वह आपकी एक चीज को छोड़कर आपसे बाकि सब कुछ छीन सकता है , लेकिन आपसे आपकी आजादी नहीं छीनी जा सकती कि आप उस नकारत्मक हालात के साथ किस तरह पेश आएंगे | आपके साथ जीवन में जो हुआ ,उस पर आपका वश नही है |  लेकिन आपने उस घटना के प्रति क्या अनुभव किया और उसके साथ कैसे पेश आए वह तो हमेशा से ही आपके वश में रहा है | 



जिस व्यक्ति का स्वाभिमान हमेशा दुसरो से मिले आदर व मान पर टिका होता है  उसे भावनत्मक रूप से नष्ट होने में जरा भी देर नहीं लगती | 

सफलता को अपना लक्ष्य मत बनाओ | तुम इसे जितना अधिक अपना लक्ष्य या उद्देश्य बनाओगे तुम उससे उतनी ही दूर होते जाओगे | ख़ुशी की ही तरह सफलता को भी कही पाया नहीं जा सकता इसे तो परिणाम स्वरूप पाया जाता है |  


जब भी हम अपने से भी विशाल किसी ध्येय से जुड़ते है या अपने से परे  किसी दूसरे के समर्पित होते हैं तो उसके फल स्वरूप ख़ुशी या सफलता प्राप्त होती है | ख़ुशी या सफलता अपने -आप ही घटते हैं आप चाह कर भी इन्हें अपने लिए घटने पर विवश नही कर सकते | एक मनुष्य के रूप में हम किसी भी चीज के आदि हो सकते हैं |



प्रेम में ही मुक्ति है | प्रेम ही अंतिम व उच्चतम लक्ष्य है ,जिसकी एक मनुष्य आकांक्षा कर सकता है | जब अवसाद व दुख के कोहरे के बीच मनुष्य खुद को सकारत्मकता से साथ प्रकट न कर सके ,जब अपने कष्टों को अच्छी तरह सहना ही उसकी एकमात्र नियति रह जाए - जो कि एक सम्मान जनक उपाय है -जो ऐसी दशा में वह अपने मन बसी प्रियतमा की छवि का मनन करके संपूर्ण संतोष पा सकता है | एक छोटी सी बात भी आनंद का कारण बन सकती है | 

भाग्य को अपना काम करने देना चाहिए | कई बार जब सामने वाला अपनी उदासीनता या बेपरवाही की हद कर दे तो आपका चिड़चिड़ापन भी बढ़ जाता है | इंसान पर अपने माहौल का बहुत असर होता है या ये कहिये कि मनुष्य अपने आसपास के माहौल के असर से अछूता नही रह सकता |   



एक मनुष्य से सब कुछ छीना जा सकता है : मानवीय स्वतंत्रता से जुडी हर चीज छीनी जा सकती मगर उससे यह चुनाव करने की छमता नहीं नहीं छीनी जा सकती कि वह किन्ही परिस्थतियों का सामना किस रवैये के साथ करेंगे और अपने लिए कौन सा मार्ग चुनेगा | आध्यात्मिक आजादी को हमसे कोई नही छीन सकता -वही हमारे जीवन को सार्थक तथा अद्देश्यपूर्ण बनती है |   


दोस्तों ! ये समरी विक्टर ई फ्रेंकल की "बुक" जीवन के अर्थ की तलाश में मनुष्य की है | 

Wednesday, January 2, 2019

विचार ही भाग्य का निर्माण करते हैं !!!

शरीर को स्वस्थ रखने का सीधा व सरल उपाय है - मन को स्वस्थ रखना | तभी कहा भी गया कि जैसा मन वैसा तन | यदि मन में विकार तथा दुर्बलता बने रहेंगे तो सच जानिए ,आप स्वस्थ होते हुए भी रोगी सा अनुभव करेंगे | मन और तन का संतुलन होना आवश्यक है | अपनी जीवन चर्या संतुलित करिये मन को द्रढ़ विचारो से परिपूर्ण करिए -फिर देखिए ,रोग चाहते हुए भी आपके पास फटक नही पाएगा | यही स्वास्थ का मूल मन्त्र है | 

अस्वस्थ शरीर वाला व्यक्ति स्वस्थ और सशक्त चिंतक कैसे हो  सकता है ? अस्वस्थ व्यक्ति के विचार भी अस्वस्थ ही होते हैं | क्यों कि मन के कुविचार तन पर बहुत जल्दी कुप्रभाव डालते हैं जिससे व्यक्ति का शरीर रोगी हो जाता है | इसलिए स्वस्थ ,सुखी और शांतिमय जीवन के लिए यह परम् आवश्यक है कि शरीर और मन के स्वास्थय में संतुलन बना रहे | 

कुछ लोगो का जीवन इतना तनाव पूर्ण रहता है कि रात में उन्हें नींद आती ही नही है | और आती भी है तो हल्की और कच्ची तनिक -सी आहत से ही टूट जाती है | उस समय में वे बिस्तर पर करवट बदलते रहते हैं | अनेक विचारो में व्यस्त रहते हैं | अनेको चिंताए उन्हें घेरे रहती हैं जिसकी वजह से निरतर उनका स्वास्थ बिगड़ता रहता है और व क्रमश : अनिद्रा के रोगी हो जाते हैं | आपने ऐसे व्यक्ति भी देखे होंगे जो अनिद्रा के रोगी होते है जिन्हे रात में नींद लाने के लिए नींद की गोलियां खाते है इंजेक्शन लगवाते हैं या अन्य किसी नशीले तत्व का प्रयोग करते हैं | 

नींद वस्तुत : प्रकृति दुवारा आयोजित और निर्धारित एक प्रकार से विश्राम की सिथति है | दिन भर काम करने से व्यक्ति का शरीर और मन थक जाता है | डाक्टरों का कहना है कि कार्य में लगे रहने से शारीरिक तत्वों में टूट फुट होती रहती है | और वे विखडिंत होते रहते हैं | इसी प्रकार मन भी दिनभर विचारो और चिंतन के कार्य में लगे रहने के कारण थक जाता है | इसलिए उसे विश्राम की जरूरत होती है | रात्रि में नीद के दुवारा शरीर और मन  दोनों को विश्राम मिलता है | जिसके दुवारा उनकी थकान दूर होती है | और व प्रातकाल तरोताजा होकर दिनभर के परिश्रम के लिए तैयार हो जाता है | 

जिन लोगो को नींद नही आती उनके शरीर को विश्राम नही मिल पाता जिसकी वजह से उनका शरीर कमजोर व दुर्बल होता जाता है | इन बातो का असर उनके व्यवसाय ,व्यापार अथवा नौकरी आदि पर भी प्रभाव पड़ता है | 

यदि आप लड़ते झगड़ते ,चीखते चिल्लाते अथवा चिंता में फंसे हुए बिस्तर पर जाते हैं इसका अर्थ यही है कि आप नींद को दूर भगा रहे हैं | अगर आपको नींद आ भी गई तो उससे वो लाभ प्राप्त नही होता | जो स्वस्थ नीद से होना चाहिए | तनाव पूर्ण स्थति में सोने से हम तरोताजा होकर नही उठ सकते |   
  
विश्राम करने का मतलब ये नही कि जब और जहां जी आया लेट गए और सोच लिया कि हमने आराम कर लिया | वह विश्राम नही बल्कि अपना समय नष्ट करना है इससे उद्गीनता और बेचैनी बढ़ती है | विश्राम करने के लिए आवश्यक है कि शरीर स्वस्थ हो, तथा जिस स्थान पर आपको विश्राम करना है, वह भी सुखद हो सबसे आवशयक बात तो यह है कि आपका मन सभी प्रकार के भय ,चिंताओं और सोच -विचार से मुक्त होना चाहिए |  

यह बात सत्य है कि सुख, शांति और समृद्धि के लिए कल्पना की तीव्रता परिश्रम ,उत्साह ,चिंतन व मनन की जितनी आवशयकता है उतनी ही उचित रूप से विश्राम की भी है | 

ये बहुत स्वाभिक सी बात है रोगी मन शरीर को भी रोगी बना देता है | इसलिए स्वास्थ पर ध्यान देना जितना जरूरी है उतना ही मन के स्वास्थ पर ध्यान देना जरूरी है |  

मनुष्य के विचार ही उसके भाग्य का निर्माण करते हैं | व्यक्ति के विचार कोई अमूर्त या अशक्त भावनाएं नहीं हैं | विचार बड़े शक्तिमान ,जीवंत और गतिशील धाराएं हैं जो एक बार प्रकट होने के बाद दबाए नही जा सकते | शुभ विचार व्यक्ति को देवदूतों के सामान सुख समृद्धि और सफलता की और ले जाते हैं| और अशुभ व गंदे विचार व्यक्ति को अवनति और पतन के गर्त की और धकेलते हैं | 
  
इसलिए विचारो की अवहेलना अथवा उनकी उपेक्षा करना उचित नही | शुभ विचारो के महत्व को समझकर उन्हें ग्रहण करना तथा अशुभ विचारो 
को त्याग देना ही श्रेयकर है | यदि आपके विचार स्वस्थ होंगे तो आपका स्वास्थ भी ठीक रहेगा | 


दोस्तों ! ये समरी स्वेट मार्डन की बुक "आगे बढ़ो " की पार्ट 4 की है | 

Wednesday, December 26, 2018

पराजय स्वीकार नही !!!


 दोस्तों ! प्रत्येक व्यक्ति को अपना मार्ग स्वयं चुनना चाहिए है  | तथा ईश्वर ने जो साधन दिये हैं उनके सहारे ही यात्रा शुरू कर देनी चाहिए  है | जो व्यक्ति प्रगति -पथ की फिसलनों की अधिक परवाह ना करके द्र्ढता पूर्वक बढ़ता जाता है वह अवश्य ही सक्सेस हो जाता है |    

जिंदगी में कभी भी पराजय स्वीकार नही करनी चाहिए | सदैव सामने देखते हुए दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ते रहना | अगर कभी फिसल भी जाओ तो उसकी चिंता नही करनी | ये याद रखो कि नियमित व्यायाम और संघर्ष व्यक्ति के शरीर को स्वस्थ को उन्नत कर देता  हैं | 

मन में सहास, परमात्मा पर विश्वास रखकर, कर्म करते रहो | सुख और दुःख तो रात दिन की तरह लगे रहते है एक आता है तो दूसरा चला जाता है | हमेशा बीजी रहो खाली दिमाग शैतान का घर होता है इसमें कुछ ना  अजुल फिजूल के विचार चलते ही रहते हैं | 

आलश्य सफलता का सबसे बड़ा शत्रु है | भवुकता में हम अपना समय व एनर्जी वेस्ट करते हैं इससे कोई लाभ नही है | परमात्मा जानता है की किस के लिए क्या उचित है | 

जीवन में आगे बढ़ना है तो एकदम अहंकार शून्य बनो" में" की जगह तुम का प्रयोग करो | आत्म निर्भर बनो सफलता निश्चित है |  | 


जो व्यक्ति ईमादारी व मेहनत से कार्य करता है उस पर परमात्मा की कृपा होती है | प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का कोई ना कोई प्रयोजन है इसीलिए परमात्मा ने यहां भेजा है | 

जीवन में निराशा को कभी स्थान ना दो, खुद पर विशवास रखो | आप पर कभी भी संसार की विपत्तियां व अशांति प्रभाव नही डालेंगी | तुम्हे घबराहट में डालने की बजाये खुद घबरा जाएगी | 

अपनी नाकामयाबियों की शिकायत ना करो उन बच्चों को देखो जो  बच्चे चलने से पहले लाखों बार गिरते हैं फिर भी हार ना मानकर फिर खड़े हो जाते हैं | परमात्मा उनकी सहायता करते है जो खुद की मदद करते है जो जीवन में हार नहीं मानते | किसान को पसीने में लतपत देख बादल भी बर्षा करता हैं |

जब भी ये लगे कि आप हार रहे हो ,आपको किसी की मदद की जरूरत है  तो प्रभु के चित्र के सामने सच्चे मन से ऐसे प्रार्थना करो जैसे वो आपके सामने सच मुच में खड़े हैं तब देखना परमात्मा किसी ना किसी के रूप में आकर आपकी सहायता जरूर करेंगे | 

प्रेम शारीरिक की बजाय मानसिक अधिक होता है | तुम्हारे अंदर अनंत शक्ति छिपी हुई है अत: अपने अंदर झांको खुद पर विश्वास करो | तुम जिस फिल्ड में हो अवश्य सफल होगें | अपने मन के सभी दुर्बल विचारो को निकाल फेंको | अच्छी आदतों का विकास करो | 


ईश्वर हमारे सामने अज्ञानी के रूप में आभाव ग्रस्त के रूप में ,रोगी के रूप में अनाथों के रूप में आते हैं जिससे की उनकी मदद कर हम खुद उन्नत बन सकें |

जिस प्रकार बालक सदैव सहायता के लिए अपने माता पिता की और ही जाता है ,उसी प्रकार सदैव अपने मन को प्रभु की ओर ही मोड़ना तथा जिस भी परिस्थति में श्रीकृष्ण भगवान ने तुम्हें रखा है उसी में संतुष्ट रहना -यह सफलता का सर्वश्रेष्ठ उपाय है | सच्चा मनुष्य -सदैव ऊचे से ऊंचा उठने का प्रयत्न करता है | उच्च आदर्शो के लिए निरंतर प्रयत्न सच्चे आदमी का लक्षण है | 




man ko vansh me kaise kren

Sunday, December 16, 2018

समृद्धि का रहस्य !!!

दोस्तों ! इसमें कोई दो राय नही कि धन -संपति और वैभव ही समृद्धि को मापने का पैमाना है | लेकिन समृद्धि का रहस्य क्या है- यह जानने की लोग कभी चेष्ठा ही नही करते | समृद्धि का रहस्य है समृद्ध विचार |

समय और सृष्टि का चक्र सदैव चलायमान रहता है | और प्रकृति के भंडार असीमित हैं सृष्टि ने तो सभी को समान अवसर दिए हैं जो इनका दोहन कर लेगा समृद्ध कहलायेगा और अकर्मण्य व्यक्ति सदैव भाग्य को कोसता हुआ मिलेगा | 
  
समृद्धि का रहस्य है समृद्ध विचार कितना सरल उत्तर है | कितना सुनिश्चित भी जिसके विचार समृद्ध हैं निश्चय ही उसका पारिवारिक जीवन भी समृद्ध होगा | 

इधर उधर के अनावश्यक कार्यो में लगकर व्यक्ति अपनी क्षमताओं को  नष्ट करता है | समृद्ध बनने के लिए आवश्यक है कि हमारे मन में निरंतर समृद्ध बनने के विचार बने रहे | यह विचार हमे अपने आदर्श की और बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहेंगे | और हम सजग व जागरूक रहकर अपने आदर्श व लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहेंगे | सजग रहने के कारण व्यक्ति अवसर नही चुकता | 

यदि व्यक्ति उत्साही और स्वालंबी हो तो उसके लिए संसार में किसी चीज की कोई कमी नहीं रहती | समृद्धि उधमी लोगो की दासी है | यह सृष्टि हमारे ही उपयोग के लिए बनाई गई है | जीवन का अर्थ यातना नहीं ,आनंद तथा उसका उपभोग है | आनंद का अर्थ उछ्रखल  क्रीड़ा या अयाशी नही | विलासिता व अयाशी तो जीवन को पतन के गर्त की और ले जाते हैं | आनंद का वास्तविक मतलब है व्यक्ति की सभी शक्तियों का पूर्ण विकास तथा विकसित क्षमताओ  का विश्व कल्याण के लिए प्रयोग | और नैतिक जीवन में एक प्रकार के संतुलन की श्रष्टि करना | 

आनंद का अर्थ सुख ,समृद्धि शांति और सदभाव का आगमन तथा दुःख ईष्या एवं द्वेष आदि बुराइयों का नाश है | आनंद जीवन का एक स्वार्णिक पहलू है | भ्र्ष्टाचार जीवन की सुख शांति को सदा -सदा के लिए समाप्त कर देता है | 

मनुष्य के जीवन में आनंद का आविर्भाव उस समय तक नहीं होता जब तक कि वह अपने मन से शंकाओं ,संदेहों ईर्ष्या व दुवेष आदि बुराइयों को दूर नहीं कर देता | भय और शंका जीवन रूपी गंगा में विष घोल देते है | 

समृद्धि सृजनशील व्यक्तियों को ही प्राप्त होती है | पोंगापंथियों को नही | सृजनशील व्यक्ति के मन में ही सर्जन शील विचार आते हैं | यही विचार शक्ति को समृद्धि की और ले जाते हैं | सृजनशीलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है | और सर्जन का उद्गम उसी व्यक्ति के मन में होता है जिसका ह्रदय मुक्त स्वछंद और सरल  होता है | निर्धनता और असफलता का सबसे बड़ा कारण मन की स्क्रीणता है | 

समृद्ध होने का मूल मंत्र है कि व्यक्ति मानसिक दिवालियापन से बचें ,हताश होना छोड़ दें और अपने आपको समृद्ध अनुभव करें | जो व्यक्ति दुसरो को समृद्ध बनाने के लिए उनकी सहायता करते हैं वे ही समृद्ध जीवन बिता सकते हैं | 

यदि हमे एक बार ये ज्ञात हो जाए कि शक्ति का स्रोत हमारे भीतर है तो हमे इधर उधर भटकने की जरूरत ही नही रहेगी | अंतर्मुखी प्रेरणा का स्रोत इतना समृद्ध है कि जो उसे एक बार प्राप्त कर लेता है ,वह संसार की समस्त समृद्धियो का स्वामी हो जाता है | 

जो सदैव यही सोचता रहता है कि वह अभागा है ,दुनियां की सुख समृद्धि उसके लिए नही बनी तो उसे समृद्धि प्राप्त कैसे हो सकती है ? स्वास्थ,ईश्वर-विश्वास ,आस्था और उधम में कमी के कारण ही व्यक्ति सदैव पद दलित बना रहता है | 

जो व्यक्ति ये समझता है समृद्धि हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ,और इसे प्राप्त करने के लिए किया गया कोई भी प्रयत्न कभी निष्फल नहीं होता समृद्धि एक न एक दिन अवश्य उनके चरण चूमती है | 

आवश्यकता सिर्फ इस बात की है कि हम सही ढंग से सोचें | में ऐसे अनेक व्यक्तियों को जानता हूं जो जिंदगी भर प्रसन्ता प्राप्त करने के लिए तरसते रहे ,परंतु प्रसन्न ना हो सकें | उन्होंने अपने जीवन के संबंध में सही दंग से सोचने का प्रयत्न नही किया | वे सोचते कुछ और रहे और करते कुछ और ही रहे | इसका परिणाम ये निकला कि न उन्हें सुख मिला ना समृद्धि ही प्राप्त हुई | 

अपने आपको हीन भावना से मुक्त कीजिए और भली प्रकार समझ लीजिए कि प्रकृति के भंडार अनंत हैं | ईश्वर हम सबकी देखभाल करता है | उस सृष्टि के बनाने वाले के पास किसी चीज की कोई कमी नही है | 

मनुष्य इस सृष्टि का श्रेष्ठतम प्राणी है उसका कर्तव्य है कि वह अपनी पाशविक शक्तियों पर विजय प्राप्त करके उनका प्रयोग मानव जीवन के विकास के लिए करें | सृष्टि निरंतर विकास की और अग्रसर है वह विकास की योजना पर चल रही है | काम करने वाला यहाँ कभी भूखा नही मरता | फिर कर्म करने वाले व्यक्ति को कमी किस बात की ? समृद्धि आपके व्यक्तित्व की देन है भाग्य से उसका कोई संबंध नही | अपने व्यक्तित्व को सुधारिए ,समृद्धि स्वत:आपके पास आकर आपके चरण चूमेगी |   
   
दोस्तों ये समरी  स्वेट मार्डन की बुक "आगे बढ़ो" पार्ट 4 की है | जिसमे समृद्धि का रहस्य बताया गया है |