Monday, April 18, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम पार्ट 5

निश्चय करो हमारा जो कुछ भी है सो परमात्मा का है फिर ट्रस्टी होकर संभालो 
 तो सब पवित्र हो जायेगा तुम्हारी पालना परमात्मा करेंगे। 

परमात्मा का बनने के बाद कोई कुकर्म किया तो सजा कई गुणा अधिक मिलेगी

जो पैसा तुम्हारे पास है वो एक एक पैसा श्रीमत से खर्च करना तुम्हें अपना घर भी संभालना है । एक भी पैसे की बरबादी ना हो लक्ष्मी का सम्मान करें।

प्रालब्ध कब अच्छा बनेगा जब पुरसार्थ अच्छा होगा।
सजना है तो विकारों को तज दो। सद्गुणों से सजना है।

सच्ची कमाई कर हाथ भ्रतू करके जाना है। एक बाप से सच्चा सौदा करने वाला सच्चा व्यापारी बनना है।

सब फिकर परमात्मा को देकर बेफिक्र स्थिति का अनुभव करने वाले परमात्म प्यारे भव

मेरा कहना मुस्कील में
 पड़ना

Thursday, April 14, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम पार्ट 4

कर्म करो उस में फसो मत। मरते वक्त ये विचार होना चाहिए कि परमात्मा में आपकी शरण में आ रही हूं मेरे परिवार में सूख शान्ति रखना अपनी याद इनके दिल में अपनी याद बनाए रखना। दुनियां अपने फायदे की बात करेगी साथ तो तुम्हारे शुभ कर्म ही जाएंगे। जितना टाइम मिले परमात्मा को याद करो। परमात्मा की याद से ही तुम्हारे विक्रम जलेंगे। फालतू वार्तालाप नही करनी है। पवित्रता फॉस्ट है। दुनियां में ऐसा काम करके जाओ जिससे दुनियां से जाने के बाद भी सेवा होती रहे। भोजन करते समय याद में रहना है। दिन में शरीर निर्वाह अर्थ कर्म कर  रात को जाग प्रभु को याद करो। दुसरो की प्रॉबलम समझो।
डबल नशे की स्थिति द्वारा सदा निर्वघन बनने और बनाने वाले विश्व परिवर्तन भव

Thursday, April 7, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम3

इस कलयुग में सब रावण की जंजीरों में बंधे हुए हैं उन्हें जीवन मुक्त बनाना है।

मुखड़ा देख ले दर्पण में कितना पाप किया जीवन मे। अर्थात कितने विकारों पर जीत हासिल की है।

जीवन मुक्त होगे पुरसार्थ अनुसार धर्म अनुसार नंबर वार।

एक बार लक्ष्य मिल गया तो आप विदेश में रहकर भी पढ़ सकते हो।

कलयुग में सुख थोड़े समय का है शांति यहां मिलनी ही नही है। शांति के लिए मन जुबान कर्म पर कंट्रोल होना बहुत जरूरी है।

 जब संकल्प चलता है तो सामने वालो को महसूस हो जाती है इसलिए जितने शुद्ध रहोगे उतनी पॉजिटिव वाई बस फेलेंगी।

इन्सान सिर्फ निमित हो। अब खुद सोचो तुम किस चीज के निमित बनना चाहते हो कुछ अच्छा करना चाहते हो या कुछ और

परमात्मा को पाना है तो परमात्मा को याद करो विक्रम नाश हुए बिना मुक्त नही हो सकते।

कोई भी उलटी चलन नही चलनी है अच्छे गुण धारण करने हैं हमें माता पिता को धारण करना है हमे योग बल से काम क्रोध के हल्के नशे को समापत करना है।

क्या, क्यों, ऐसे और वेसे के सभी प्रसानो से हमे अलग रहना है जो हो रहा है वो मेरे लिए अच्छे के लिए ही हो रहा है। तुम्हारे लिए परमात्मा अच्छा ही करेगा।

स्वयं को मेहमान समझकर कर कर्म करो तो महान और महिमा योग्य बन जाएंगे।

Wednesday, April 6, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम 2

तुम हो कर्म योगी तुम्हें चलते फिरते प्रमात्मा को याद का अभ्यास करना है।

 एक बाप के सिमरन में रह नर से नारायण बनने का पुरसार्थ करो।

रात गवाई सो कर दिन गवाया खा कर हीरा जैसा  अनमोल जीवन कोड़ी बदला जाए।

सिर पर पाप का बोझ है इसलिए रात में जाग कर प्रभु को याद करो।
निश्चय बुद्धि बन परमात्मा से प्रेम करना है बाबा के फ्रमान पर चल माया पर विजय पाना है। याद का चार्ट 8घंटे का बनाना है।

 सारे दिन में व्यर्थसंकल्प व्यर्थ बोल व्यर्थ संबंध संपर्क होता है उस व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तन कर दो ।व्यर्थ को अपनी बुद्धि में स्वीकार नही करो अगर एक व्यर्थ को भी स्वीकार किया तो अनेक व्यर्थ का अनुभव करायेगा
साधना के बीज को प्रत्यक्ष करने का  साधन है  बेहद की विराग्य वृति।

बिगड़ी हुई तकदीर को बनाने वाला परमात्मा है
जब तकदीर को बनाने वाले को भूलते हैं तब तकदीर बिगड़ती है।

Monday, April 4, 2022

सफलता के आध्यात्मिक नियम 1

मनुष्य भले ही बूढ़ा हो जाए विकार कभी बूढ़ा नही होता है। 

किसी भी आत्मा को हमे दुख नही देना। 

माया बहुत विघ्न डालती है। कई बार ऐसा थपड़ मरती है जिसका असर सालो रहता है।
इन्सान बूढ़ा हो जाता है क्रोध बूढ़ा नही होता।

सपूत बनने के लिए बाबा की श्रीमत पर चलना है जो भी बुरी आदत है चोरी की झूठ बोलने की बुराई करने की आदत को छोड़ना है

 अपना तन मन धन को सेवा में लगाना है। 

सदा हर कर्म में रूहानी नशे का अनुभव करने कराने वाले खुश नसीब भव 

साधनों को सेवा के प्रति यूज करो आराम पसंद बनने के लिए नही।

Friday, January 14, 2022

बता मन तेरा क्या करू ?

         बता मन तेरा क्या करु ?

जिसकी मदद की, उसी  ने बेईमान बताया। जिस के लिए झुके ,उसी ने अहंकारी बताया । जिनके के दोष छिपाए, उन्ही ने इल्जाम लगाए l जिनके लिए जिए उन्हीं ने बेगाना बनाया । जिसको अपना समझ कर ,दिल हल्का करने के दिल के दर्द बताए,उसी ने घर घर जाकर  बदनाम किया ।  फिर भी  तू उनसे लगा  बता मन तेरा क्या करु?

जिसको जितना अपना समझा वो उतना ही पराया निकला । सब से धोखा खाया
जो जितने नजदीक आए उतना  ही उसने सताया   फिर भी तू उनके लिए रोया l तूने उन्हीं को दुखेडे सुनाए बता मन तेरा क्या करु ?

वही पैसा अपना है, वही टाइम अपना है, वही मेहनत अपनी है, जो प्रभु सेवा में लगे नही तो कुछ भी अपना नही है । वही प्रेम अपना है वही खुशी अपनी है, वही दुख अपना है , वही सुख अपना है जो प्रभु से मिला नही तो कुछ भी अपना नही है । वही रिश्तेदार अपने हैं वही दोस्त अपने हैं जो सिर्फ प्रभु से जुड़े हैं। नही तो कोई अपना नही है ।

कितना ही धन कमाए कितनी ही मेहनत करें कितनी ही प्रॉपर्टी जोड़े कितना ही परिवार ब रिश्तेदार या दोस्तो के लिए करे ये दुनिया स्वार्थी है यहां की हर चीज़ झूठी है । यहां कोई  अपना नही है ।

कोई चीज़ खुशी नही देती खुशी प्रभू चिंतन से, भ्ग्गति से मिलती है प्रमार्थ से मिलती है पर ये मन वहा लगता ही नही  ये मन दुनिया में भागता है जहां सिर्फ दुख है । बता मन तू प्रभु चरणों में क्यू नही लगता ? जहा सच्चा सुख है

Friday, May 14, 2021

एकाग्रता कितनी अनिवार्य है जीवन मे

जिस चित को एकाग्रता मिल गई वह बड़े से बड़ा काम कर सकता है । या ये कहिए कि उसके लिए कोई कार्य असंभव नही है। अगर आपके पास एकाग्रता नही है तो आप बड़ी उपलब्धि कभी हासिल नही कर सकते।

अगर आपको उपलब्धि नही मिली,आपकी श्रेष्ठता ठहर गई है, ऊचे नही उठ सके, विकाश नही हो रहा ,बड़े नही बन सके, कामयाब नही हो सके तो एक चीज आपके पास रही होगी उसका नाम है प्रमाद ।

 जिस दिन आपका मन करे अपने शत्रुओं की गणना करनी है, जिस दिन आपका मन करे मुझे अपने बैरी गिनने हैं कि मेरा बैरी कोन है , ध्यान रखना आपके हजार बैरी नही हैं, सौ, दो सौ भी नही हैं, दो चार भी नही हैं आपका एक ही बैरी है उसका नाम है प्रमाद।और अगर आपने प्रमाद को जीत लिया तो अन्य कोइ बैरी नही रहेगा और अगर नही जीता तो अन्य भी बैरी बन जायेंगे जो आगे चलकर आपकी प्रगति में बाधा बनेंगे।

आप जानते हो आलस्य आता कहां से है? अज्ञानता से इसलिए शास्त्र कहते है- "आपका कोई बैरी है तो वो अज्ञानता है"
वेद में बड़ी अच्छी बात कही गई है-

"प्रणवो धनो सरो ही आत्मा, ब्रहम तरू लक्ष्य मुच्यते,अपर मतेन वेद्भ्यम सरवतेन्नमयो भवे"

धनुष उठाइए, जरा पर किस का धुनुष बनाइए ओकार का धनुष बनाइए और धनुष पर तीर किसका रखे, खुद को चढ़ाए किसी और को नही ईश्वर को लक्ष्य बनाइए।और ये तब तक नही होगा जब तक आपके पास एकाग्रता नही है।

 बिना एकाग्रता के तो कुम्हार बर्तन नही बना पाता, चित्रकार चित्र नही बना पाता, लेखक लिख नही पाता उनकी बात छोड़ो, ढंग का फुलका भी नही बन पाता। एकाग्रता बहुत बड़ी चीज है जो जीवन में चहिए।