Friday, March 11, 2016

आत्मनिर्भर बनना चाहते हो ? ९ बातों को ध्यान में रखना !!!

              आत्मनिर्भर  बनना चाहते हो ?  ९  बातों को ध्यान में रखना !!!  
   
आप सिर्फ डिग्री लेकर या सपने देखकर ही मंजिल तक नही पहुंच सकते। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी पसंद की फिल्ड चुन कर उसके मुताबिक खुद को काबिल बनाएं  व बदलते वक्त के साथ साथ उस फिल्ड की नॉलिज रखें  और बदलाव के लिए तैयार  रहें । 

१ फस्ट इम्प्रेशन व इज था लास्ट इम्प्रेशन :- देखिये जब आप पहली बार किसी से मिलते हैं ,सामने वाला इंसान आपके पैसे या डिग्री नही देखता।वह सबसे पहले आपके नजरिया को देखता है । किसी भी  इंसान के सामने हाथ बढ़ाने से पहले  ये जरूर सोचता है, कि इस इंसान में क्या क्वाल्टी है और क्या इसके वीक पॉइंट हैं  ? इस इंसान के साथ मेरी कितनी निभ सकती है ?  महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि -

" जब दो व्यक्ति निकट आते हैं तो वो कुछ मर्यादाएं या सीमाएं निर्धारित करते हैं। अगर हम संबंधो पर विचार करें तो देखेगें कि सारे संबंधो में सीमाएं हैं जिन्हें हम निर्धारित करते हैं । अगर अनजाने में भी कोई इन्हें तोड़ता है उसी क्षण हमारा ह्रदय क्रोध से भर जाता  है । हम अपनी मर्जी थोपते हैं अथार्त दुसरो की स्वतंत्रा को  छीनने की कोसिश करते  हैं "

दुसरो स्वतंत्रता छीनने की बजाए खुद की कमियों को देखर उन्हें निकालने की कोशिस करें। प्रयास करेंगे तो जरूर कामयाब हो जाओगे और एक बार कामयाब हो गए तो फिर मुड़कर देखने की जरूरत नही है । अवसर का पुरा लाभ उठाएं, जमकर मेहनत  करें, ईमानदारी से आगे बढ़े  । 

२ अपने कार्य के प्रति समर्पित रहिए  :- आपको अपने कार्य पर  औरो  से अधिक विश्वाश होना चाहिए। यदि आप में काम के प्रति पैशन है तो आप अपने अंदर की सारी खामियों को पार कर लोगे । आप उसमे बेस्ट दोगे और आपके साथी भी आपके काम में पुरे मनोयोग से आपका साथ देंगे।मान अपमान की परवाह ना करें। आप को किसी ने गलत बोला है या किसी ने आपको को नीचा दिखाने की कोशिश की है तो उसे अपमान ना समझ कर उससे सीख लें और आगे बढ़ जाये खुद को उत्साहित व कर्मठ रखने की कोशिस करें ।   
३ दृढ़ संकल्प लें :-
"संकल्प मन के ऐसे वचन हैं, जिनको अपने ह्रदय में धारण कर व्यक्ति समस्त आगामी कर्तव्यो के प्रति पूर्ण अस्वस्थ होता है " 
                                                                            -सीया के राम  


दृढ़ संकल्पित लोग रास्ते बदलते हैं मंजिल नही । आने वाली कठनाइयों का सामना करते हैं और हल निकाल कर ही रहते  हैं ।किसी ने सही कहा है कि -

     " कोशिस कर,  हल निकलेगा। आज नहीं तो, कल निकलेगा। 
       अर्जुन के तीर सा निशाना साध, जमीन से भी जल निकलेगा ।
       मेहनत  कर पौधों को जल दे ,बंजर जमीन से भी फल निकलेगा । 
         ताकत जुटा हिम्म्त को आग दे, फौलाद का भी बल निकलेगा ।
       जिंदा रख दिल में उम्मीदों को , समंदर से भी गंगा जल निकलेगा । 
     कोशिस जारी रख कुछ कर गुजरने की, जो है आज थमा थमा वो चल निकलेगा"    



४ प्राथमिकता तय करना जरूरी है :- एक साथ कई महत्वपूर्ण कार्य नही करने चाहिए। और अगर जरूरी  हैं तो उनसे  नही घबराएं बल्कि जरूरी कार्यो की लिस्ट बनाये और एक एक करके काम निपटाए, जरूरत के अनुसार कार्यो को प्राथमिकता दें । इससे पायेगे की आप थोड़े ही समय में अपने कार्यो में निपुण होते जाओगे । 

५ अपेक्षाओ पर खरे उतरें :-  यदि आप ऐसा करेंगे तो आपके साथी आपके और नजदीक आते जाएंगे। उन्हें वो दो जो वो चाहते  हैं उन्हें पता होना चाहिए की आप उनकी परवाह  करते हैं। आपको सबसे पहले उन अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा  जो आप से की जा रही हैं । जब आप अपेक्षाओं  पर खरे उतरोगे तो सीनियर भी आप पर विश्वास करेंगे और इससे आपकी पदोन्ती के चांस भी बढ़ेंगे । कई लोगो को देखा होगा की वे पदोन्नति ना मिलने  का रोना रोये जाते हैं लेकिन अगर ईमानदारी से सोचे तो पायेगे की कभी वे अपेक्षाओं पर खरे ही नही उतरे, सीनियरों का  विश्वास  ही नही जीत पाये ।


६ ओवर कांफिडेंट ना बनें :- विनम्रता व सहजता से जो नही आता उसे सीखने व समझने की कोशिश करनी चाहिए। अपने दिमाग को हमेशा कुल रखना चाहिए। अपने साथियों की हमेशा सुनिए और ऐसा स्वभाव रखिये की आप से हर बात शेयर कर सकें। यही तरीका है नये आइडिया सामने लाने का। आप ये जानने की कोशिस करें कि आपके साथी क्या कहना चाहते हैं। सही बात पर उनकी प्रशंशा कीजिये । सैलरी और शेयर देने से आपको एक तरह की लॉयल्टी मिलती है ,लेकिन हर इंसान को अपनी प्रशंशा सुनना अच्छा लगता है । इसलिए सही समय पर सही शब्दों से की गई सच्ची प्रसंसा का कोई विकल्प नही है। ये फ्री होते हुए भी किसी खजाने से कम नही है ।  

७ अपनी गलतियों को स्वीकारें व उन्हें दूर करें :-मेरा मानना है की कोई भी इंसान जानबुझ कर गलती नही करना चाहेगा। लेकिन जाने अनजाने कई बार गलतियां हो जाती हैं । सफल वही व्यक्ति होता है जो अपनी गलतियों को मानकर सुधारने की कोशिस करता है। गलतियों से सीख लेता है। अपनी गलतियों को मानकर उन्हें सुधारना ही मनुष्य की सफलता की राह प्रसस्त करता है।  




८ हार से ना घबराएं :- दरअसल जीत की  मंजिल तक पहुचने के लिए हार की सीडी से ही गुजरना पड़ता है। लेकिन इसमें उम्मीद का दामन पकड़े  रहें । उम्मीद टूटने से झटका तो लगता है। लेकिन अगर आप हार मानकर बैठ गए तो आपके हाथ कुछ भी नही लगेगा।  महाभारत में आया है कि -  
" भविष्य का दूसरा नाम है संघर्ष । कई बार ह्रदय में प्रबल इच्छा होती है।  वो पूर्ण नही होती तो ह्रदय भविष्य की योजना बनाने लगता है। भविष्य में योजना पूरी होगी ऐसी कल्पना करने लगता है किन्तु जीवन न भविष्य में है  ना अतीत में जीवन तो इस पल के अनुभव में है । पर हम जानते हुए भी इतना सा सत्य समझ नही पाते।  या तो बीते हुए समय के स्मरण को घेरे बैठे रहते हैं या आने वाले समय के लिए योजना बनाते रहते हैं । और सारा जीवन इसी में बीत जाता है। एक सत्य यदि हम जीवन में उतार लें कि ना हम भविष्य देख सकते हैं और ना भविष्य निर्मित कर सकते हैं सिर्फ भविष्य का स्वागत कर सकते हैं   "       

९ लगातार प्रयास करते रहें :- ये जरूरी नही है की आप जो कार्य कर रहे हो उसमे पहली ही बार में सफलता मिल जाएं। लेकिन लगातार प्रयास करने से सफलता मिलनी सम्भव है। कई  लोग असफल होने पर कोशिस करना छोड़ देते हैं । और कई लोग लगातार प्रयास करते रहते हैं और ये लगातार प्रयास करना ही सफलता की मंजिल तक पहुंचाता है ।  






Tuesday, March 8, 2016

सहन शीलता की कमी कही बच्चो को लक्ष्य से ना भटका दे

             
सहन शीलता की कमी  कही बच्चो को लक्ष्य से ना भटका दे  

सहन शीलता का मतलब है कि आप किसी भी बात पर तुरंत प्रतिक्रया ना करें। थोड़ी देर रुके] सोचे] समझे फिर जवाब दें। इससे बात की गहराई का उसके अर्थ का व कहने वाले का भाव व व्यक्तित्व का आप भली भाति अनुमान लगा सकोगे। अगर आपको सामने वाले की कोई बात बुरी भी लगी है तो आप इतनी देर में मन को शांत कर लोगे।फिर आप जो प्रतिक्रया दोगे वह अधिक प्रभावशाली होगी। ऐसा करने से आप का व्यक्तित्व निखरेगा। लेकिन आप ऐसा तभी कर सकते हो जब आप के अंदर दुसरो की बात को सुनने का गुण होगा दुसरो की बात सुनने वाला ही दुसरो से कुछ सीख सकता है । इंसान सहनशील हो तो वह हमेशा कटुता व राग दुवेश से बच सकता है, सबकी निगाहो में एक आदर्श व्यक्ति के रूप में जाना जा सकता है। सहनशीलता से सकरात्मकता आती है,सकरात्मकता इंसान को लक्ष्य के करीब लाती है । 

सहन शील बनें, सहनशील इंसान  हर जगह तरक्की करता  है :- सहन शीलता व्यक्ति को उंचाई पर पहुचाने में मदद करती है। जिस व्यक्ति के अंदर सहनशीलता होती है वह धैर्यवान व गंभीर बन जाता  है वह अपने कार्य को लग्न व सकरात्मक सोच से करता है। और लक्ष्य को हासिल करने के लिए ये जरूरी भी है की आप अपने कार्य को सकरात्मक सोच से करें। ऐसे इंसान से हर कोई सलहा लेता है, सीखना चाहता है, रोजगार देना चाहता है। सहनशीलता खुशियों की परिचालक  हैं। अगर सहनशील दोस्त हो तो उससे  बहुत कुछ सीखा जा सकता है । दोस्तों से व्यक्ति को भावनात्मक स्पोट मिलता है। और समाज के विकाश के लिए स्पोट जरूरी हैं । दोस्तों से सम्पूर्ण विकाश होता है । दोस्तो का असर सही भी और गलत भी हो सकता है । लेकिन दोस्त जरूरी हैं । बच्चो पर ये दवाब ना डालें  कि  उनके दोस्त सही है  या गलत है बच्चो को सही गलत का फैसला खुद लेने दें। साथियो को देख कर ही बच्चे अपने व्यवहार व दृष्टिकोण में बदलाव लाते  हैं ।   



सहनशील इंसान ही सभ्य समाज का निर्माण कर सकता 
है:- हर इंसान के सामने दो रस्ते होते हैं एक सही और दूसरा गलत  इंसान इन में से एक को  ही चुन  सकता है चाहे व  सही चुने  या गलत । गलत आपको आकर्षित करेगा और सही आपको कठिन लगेगा। लेकिन गलत राह से आगे नही बढ़ पाओगे ।  सही से  ही आप आगे बड़ सकते हो । सही राह चलने वाला अकेला तो पड  सकता है लेकिन हार नही सकता। इसलिए नकरात्मकता को हम खत्म तो नही कर सकते और  हमे  लड़ने की भी  आवश्यकता नही है । इसलिए लड़ने की बजाए हम उसके सामने अच्छाई और सच्चाई की लकीर जरूर खीच सकते हैं।अपने बच्चो को समझाए की वे दोस्तों में नफरत व कटुता बोन की बजाए प्यार व शांति की मिसाल कायम करें । इससे ही सभ्य समाज का निर्माण हो सकेगा । अगर व्यक्ति किसी भी कार्य को प्रतियोगिता की भावना से करे तो उसमे सफलता मिलनी  अनिवार्य हो जाती  है।लेकिन प्रतियोगी परीक्षा के  लिए सहनशील होना अनिवार्य है । यदि आप चाहे कि  परिणाम तुरंत मिल जाये तो  इससे अपना काम  खराब कर लोगे । लेकिन आज के  युवा कार्य में मेहनत  करने से ज्यादा परिणाम की उम्मीद  करते हैं ।   

"कामयाबी के लिए ये  जरूरी है  कि सहनशील ,धैर्यवान और लगनशील हों । युवा पीढ़ी में सहनशीलता के गुण  डालना बहुत जरूरी है । इसके लिए बचपन से ही प्रयास करें " 

                      &शेर सिंह वरुण प्राचार्य जीआईसी नोएडा 


आभाव को चुनौती के रूप में लें:-  अक्सर लोग आभाव को मजबूरी मान बैठ  ते हैं । जब की इसे अगर चुनौती के रूप में लें तो बेहतर परिणाम पाये जा सकते हैं । जो बच्चे इसे चुनौती के रूप में लेते है उन्हें जीवन के सफर में  किसी भी परिस्थति से निबटने में परेशानी नही होती। ये वो हुनर है जिस के बल पर  आप किसी भी हालत में अपने लिए बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हो।इसलिए बच्चो को सिखाया जाना चाहिए की वह अपने से नीचे दिखने वाले लोगो को देखकर जीवन की असल परिभाषा को समझें। इससे उन्हें जीवन  मे कभी भी हार का सामना नही करना पड़ेगा। महाभारत में आया है कि 


" कभी कभी कोई घटना मनुष्य के जीवन की सारी योजनाओ को तोड़ देती है । और मनुष्य उस आघात को अपने जीवन का केंद्र मान लेता है। पर क्या भविष्य मनुष्य की योजनाओ पर आधारित होते है \नही जिस प्रकार  किसी उंचे पर्वत पर सर्व प्रथम चढ़ने वाला पर्वत की तलाई में बैठ कर योजनाएं बनाता है क्या वो योजनाएं पर्वत की चोटी तक पहुचाती है \नही वास्तव में वो जैसे जैसे  ऊपर चढ़ता है वैसे वैसे उसे नई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है प्रत्येक पद पर वह अगले पद का निर्णय करता हैa योजनाओं को बदलना पड़ता है ।कही पुरानी योजनाएं उसे खाई में ना धकेल दें । वह पर्वत को अपने योग्य नही बनाता बल्कि स्वयं को पर्वत के योग्य बनाता है। मनुष्य के जीवन में भी ऐसा ही होता जब मनुष्य किसी अवरोध को या चुनौती को केंद्र बना लेता है  तो वह अपने जीवन की गति को वही  रोक देता है ।फिर  वह सफल नही हो पाता । अर्थात जीवन को अपने योग्य बनाने की बजाए खुद को जीवन के योग्य बना लें यही सफलता व शांति का मार्ग है" 


बच्चो में  तर्क संगत सोच अनिवार्य है:-तर्क की प्रतिक्रया वैज्ञानिक ज्ञान के नजदीक होती है।और ये उम्र के साथ साथ और भी बेहतर होती जाती है। आप लक्ष्य तक तभी पहुंच सकते हो जब सच्चाई और ठोस तर्को के साथ हो।तर्क भी दो तरह के हैं एक व्यवहारिक दूसरे जो विश्वास पर आधारित हो। बच्चो में तार्किक सोच विकसित करने के लिए पैरेंट्स व अभिभवकों को अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए। देखना चाहिए की उनका बच्चा वैज्ञानिक ज्ञान के कितने नजदीक है। कई  बार लक्ष्य तय होने के बाबजूद हम फैल हो जाते है लेकिन फिर भी हम प्रयास करते हैं क्यों \ क्यों की हमारा विश्वास  होता है की हम सफल होगें । 

बच्चो में सहन शीलता का गुण विकसित करें:- इसके लिए माँ बाप व शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझें। कई बच्चे मन मानी  करते हैं अपनी हर बात मनवाने की कोशिस करते हैं उनकी हर शर्त पूरी ना करें ।उनकी हर एक्टिवटी पर ध्यान दें ।श्री मद भागवत में भी आया है कि &
 "संतान जब तक पांच साल की ना हो जाए तब ही तक उसका लाड़ प्यार करना चाहिए। उसके बाद सदा संतान की शिक्षा की और ध्यान देते हुए उसका पालन पोषण करना उचित है। अच्छा खान पान उत्म वस्त्र अच्छी पढ़ाई का प्रबंध करना ये सब बातें संतान की पुष्टि के लिए आवश्यक है साथ उत्म गुण और विधा की और भी लगाना चाहिए । पिता का कर्तव्य है कि वह संतान को सद्गुणों की शिक्षा देने के लिए कठोर बना रहे । बच्चो के सामने कभी भी उनके गुणों का वर्णन न करें । उसे  सही राह पर लाने  के लिए कड़ी फटकार  देकर, इस प्रकार साधे की वह विधा और गुणों में सदा ही निपुण होता जाए, शिक्षा बुद्धि से ताड़ना और पालन करने पर संतान सद्गुणों दुवारा  प्रसद्धि पाता  है   " 

अभिभवक बच्चो के  भविष्य को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं । महाभारत में भी आया है कि &

" शिक्षा और सुरक्षा से मनुष्य का चरित्र बनता है । माता पिता जैसा चरित्र बनाते हैं वैसा ही बच्चों का भविष्य बनता है। किंतु अधिकतर माँ बाप भविष्य की सुरक्षा के चककर में चरित्र की शिक्षा देना भूल जाते हैं । लेकिन जिनके माता पिता चरित्र को भुलाकर भविष्य की चिंता करते हैं उनके बच्चो के हाथ कुछ भी नही लगता किन्तु जिनके माता पिता उनके चरित्र की चिंता करते हैं उनकी प्रस्तति सारा संसार करता है " 

बच्चो को अनुशासित रखना व उनकी पर्सनल्टी को विकसित करना अभिभावकों की जिम्मेदारी है लेकिन उन्हें इसके लिए भी तैयार करना की वे बाहरी खतरों से भी लड़ सकें । अगर बच्चों की नीव कमजोर रह गई तो ये जिंदगी की राह में पिछड़ जाएंगे ।  



समायोजन का गुण बच्चों में जरूरी है:- आज का इंसान जहा इतना सेल्फिश हो गया है कि अपने और अपनों के सिवाय कुछ सोचता ही नही है। वहा फिर से आने वाली पीढ़ियों को नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए पैरेंट्स व अध्यापको को कई कार्य करने जरूरी है बच्चो में लोकहित व सहयोग की भावना डालनी जरूरी है ।जरूरी नही है कि  हर जगह  एक जैसा  महौल मिले  हर जगह एडजस्टमेंट की जरूरत पड़ती है। इसलिए अपने आप को  ऐसा बनाना चाहिए की हम हर राह  पर चलने में सक्षम हों। विपरीत परिस्थति आने पर ना घबराएं और संयत रह कर काम करें ।शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनें । अगर विपरीत परस्थिति में एडजेस्ट करने की व खुद को साबित करने की हिम्मत  होगी तो जीत निश्चित है। समायोजन का गुण इंसान को सफल होने की डगर तय करने की  हिम्मत देता है ।जीवन में सफलता समायोजन की क्षमता पर काफी हद तक निर्भर करती है। 

Friday, February 19, 2016

बेहतर लाइफ जीने के लिए जरूरी हैं कुछ रूल्स

                                                     बेहतर लाइफ जीने के लिए जरूरी हैं कुछ रूल्स                                    
दोस्तो अपनी लाइफ में बेलेंस बनाये रखने के लिए कुछ रूल्स अनिवार्य हैं। रूल्स हमें डिसिपिलीन में रहना तो सीखाऐगे ही हैं साथ ही साथ हमे टेंसन फ्री भी रखेंगे ।गौतम बुद्ध ने भी कहा है कि 

"अगर आप का खुद पर पूरी तरह नियंत्रण है तो आपको वह क्षमता हासिल होगी जिसे बहुत कम लोग हासिल कर पाते हैं" 
  
जिन लोगो की लाइफ में रूल्स नही होते वे लोग लाइफ में कभी कामयाब  भी नही हो पाते। कामयाबी के लिए जरूरी हैं  लाइफ में  दस रूल्स -


१ समय समय पर अपना मूल्यांकन करें  :- किसी भी कामयाब इंसान को देखो वह कुछ रूल्स फॉलो करके ही कामयाब हुआ है । कामयाबी चाहते हो तो लाइफ में कुछ रूल्स बनाओ और उन्हें फॉलो करो।  हम रूल्स पर चलकर ही ओरो से कुछ अलग बन सकते हैं । कई बार हम रूल्स तो बना लेते हैं पर वो बीच बीच में  टूट जाते हैं।  पर यदि हम उन्हें दुबारा अपनी लाइफ में लागू करने की कोशिस करें तो लाइफ में जरूर कामयाब हो सकते हैं । ज्यादातर लोग  अपनी कमियां देखना ही नही चाहते । अगर आप इस भेड़ चाल से बचना चाहते हो तो इसके लिए एक ही रास्त है कि आप समय समय पर अपना मूल्यांकन करते रहें ।


२ गलतियों से सीख लें  :-गलती किसी से भी हो सकती है लेकिन इसका मतलब ये नही है की हम उस गलती को बार बार दोहराते जाएं । जब तक आप गलतियां करना नही छोडोगे तब तक आप कामयाब नही हो सकते । अगर आप लाइफ में कामयाबी चाहते हो तो अपनी तो क्या दुसरो की गलतीयों  से भी सबक लो । जो अपनी कमियां ना देखकर दुसरो में कमी देखते हैं उनमे अंहकार आ जाता है जिसकी वजह से वो खुद को श्रेष्ट और ओरो को हीन समझने लगता है। और दुसरो की निंदा करने लग जाता है इसलिए हमेशा दुसरो के गुण और अपनी कमियों पर ध्यान दें । 

 " अगर में महान बनना चाहता हूं तो पहले मुझे अपने आप पर विजय पानी होगी इसे ही स्व अनुशासन कहते हैं 
                                                 -हैरी एस टुमॆन पूर्व अमेरिकी राष्टपति  

३ प्राथमिक कार्य को वरीयता दें :-लाइफ में बेलेंस बनाएं रखने के लिए इंसान को अनेको कार्य करने पड़ते हैं । लेकिन ये ध्यान रखे की आप हर कार्य में कुशल नही हो सकते। इसलिए खुद को अपनी क्षमता से अधिक कार्य में व्यस्त ना रखें । जिन कार्यो में ओरो की मदद ले सकते हो उन कार्यो में मदद लें  और जिन कार्यो को बिना करें काम चल सकता है  उन्हें ना करें ।  जो कार्य आप के लिए अनिवार्य हैं पहले उन्ही कार्यो को निपटाएं। प्राथमिक कार्य वो हैं जिसको आप सबसे मूलयवान समझते हो , प्रथमिक कार्यो को तरहीज देने का मतलब है कि अपना समय और ऊर्जा   अधिक से अधिक उन कार्यो में लगाना ।  

  
४ कंफर्ट जोन से बहार निकलें :-देखिये जोखिम  उठाये बिना आप लाइफ में आगे नही बढ़ सकते । सोच समझ कर जोखिम लेना ही सही निर्णय है । औरो की बनाई  राह पर चलना छोड़ दो । कई  लोग इसलिए कामयाब नही हो पाते क्यों कि वो दुसरो की  राह पर चलते है और इंसान उसी फिल्ड में कामयाबी पा सकता है जो उसने खुद चुनी है । दुसरो को  अपना लीडर ना बनाएं । अपनी लाइफ के खुद लीडर बनें । नए काम में लोग साथ देने की बजाए अपनी सोच थोपते हैं ऎसे में विचिलत ना हों अपने आप को समझाएं, खुद के फैसले पर यकीन रखें ।  

५ हमेशा अपनी तरफ स बेस्ट देने की कोशिस करें :-  इंसान कभी भी परफेक्ट नही बन सकता। कोई काम कितनी ही अच्छी तरह से करो फिर भी सुधार की गुंजाइस  हमेशा बनी  रहती है इसलिए बेस्ट देने की कोशिस करें ना की परफेक्ट बनने की । 


६ हर परस्थिति में खुश रहने की आदत डालें :- ज्यादातर इंसान परस्थिति पर निर्भर रहता है। अनुकूल परस्थिति में खुश व प्रतिकूल में दुखी रहता है । दोस्तों हम कोशिस कर सकते हैं परस्थितियों  पर हमारा जोर नही चल सकता । अगर आप प्रतिकूल परिस्थति में दुखी रहते हो तो आप  एनर्जी व  समय  नष्ट कर रहें हो । सीरियल सीया के राम में भी कहा गया है कि 
              " परिस्थति में सुख या दुःख ढूड़ना तो इंसान की मनोस्थति पर निर्भर करता है "

७ शिष्टाचारी बनें :- शिष्टाचारी इंसान हर जगह मान सम्मान पाता है । जहां भी जाता है वहां अपने  शिष्टाचार से अलग पहंचान बनता है । और ऎसे दोस्त बनता है जो समय पड़ने पर काम आते हैं। और वैसे भी कहते हैं की इंसान की वाणी में वो ताकत है जो होते हुए काम को बिगाड़ सकती है और रुके काम को करवा सकती है। मधुर वाणी ही शिष्टाचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है । 

८ शॉर्ट कट से बचें  :-  शॉर्ट कट से कभी भी स्थाई कामयाबी नही मिल सकती । कामयाबी तब ही टिकती है जब सघर्श करके हासिल की हो। कुछ बातें हमेशा ध्यान में रखना जिन लोगो ने आपकी मदद की  है उनके प्रति ईमानदार रहें। मेहनत का उचित फल ना मिलने पर धैर्य रखें और किसी भी परिस्थति  में  गलत रास्ता ना अपनाएं।   

९ खुद को काबिल बनाएं :- जब तक आप खुद काबिल नही हो दुसरो को कुछ कहने का हक नही रखते । और ना ही दुसरो पर आपके कहे का कुछ असर होगा ।इसलिए जैसा आप दुसरो से उम्मीद करते हो उसके लिए पहले खुद वैसे  बनो। कहने की बजाए करके दिखलाओ । 


१० आत्मनिर्भर बनें :- दोस्तों उन लोगो की लाइफ में अधिकतर टेंशन रहती है जो दुसरो पर निर्भर रहते हैं। इसलिए दुसरो पर निर्भर रहने की बजाय आत्मनिर्भर बनें । अपना कार्य स्वयं करें  व दुसरो से अपेक्षा ना करें । अपेक्षा ही परेशानी का सबब बनती है ।  



Friday, January 29, 2016

जो चाहते हो, वो संभव है

               
                 जो चाहते हो, वो संभव  है

सम्भव की सीमा जानने का केवल एक ही रास्ता है असम्भव से भी आगे निकल जाना । भारत देश में १० % लोग  दौलत मंद हैं ।  ९० % लोग देखते रह जाते हैं  कि  ये संभव कैसे हुआ । 10%  लोग ही दौलत मंद क्यों ? क्यों कि उन्हें अपने ऊपर पूरा  विश्वास था की वो पैसा कमा सकते हैं ।जो भी लोग कामयाब हुए है उनके दिल में सिर्फ एक  इच्छा थी की उन्हें कामयाब होना है हर हाल में ।  इच्छा में आकर्षण शक्ति होती  है जिससे वस्तु  आकर्षण की छोर से बंधी चली आती है। बसर्ते आपका फोक्स उस पर हो  जो तुम चाहते हो ।     


आपको चुनना है कि आपको क्या करना  है ? बेहतर करके प्रसद्धि या कुछ ना करके गुमनामी :- अगर आप को कुछ करना ही है तो बेहतर करके मिसाल बनो । यदि आपको आपका लक्ष्य नही मिल रहा है तो ढुडो ।अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी शक्ति व निष्ठां से लगे रहो । अपने काम के लिए मौके ढुडो । जो जीवन में चाहते हो उसका परिणाम निर्धारित करो । खुद से क्या अपेक्षा रखते हो इसका ज्ञान रखो।भटकाव व व्यवधान तो आते ही रहते हैं। लेकिन   निरंतर पर्यत्न करने से,सक्षम मष्तिक से, श्रेष्ट विचारो से , समस्याओ को सुलझाने  की कला से आप वास्तव में चमत्कार कर सकते हो ।    
       
              " मनुष्य की प्रतिभा उसकी छाया की तरह होती है जब वह आगे चलती है तो बहुत बड़ी हो  जाती है"  


ये सोच लो की सफलता आपको सस्ते में नही मिल सकती । आधा अधूरा काम आपकी क्षमता पर असर डालेगा। और आपके पुरे काम आपकी क्षमता और योग्यता को बढ़ाएंगे।  किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए चाहे सामाजिक हो या व्यवसायिक हो पारिवारिक हो सही दिशा मे  कड़ी मेहनत और जागरूता का बहुत बड़ा योगदान होता है । 


खुद का मूल्यांकन कम ना आंके :- सबसे बड़ी कमजोरी जानते हो इंसान की क्या है ? अपना मूल्यांकन कम आंकना। हम खुद नही जानते की हम क्या कर सकते हैं ? हम जानते हैं तो अपनी कमियां ,अयोग्यता । चलो इतना जानते हो तो अच्छा  है अपना सुधार कर सकते हो। साथ ही अपने गुणो  को देखो अपनी योग्यता पहचानो । जब आप अपनी योग्यता पहचानोगे तो पाओगे की आप कई बातो में सफल लोगो से आगे हो । इसलिए पहले खुद को पहचानों की आपमें कुछ कर गुजरने की क्षमता है ?आप अपने बारे जितना जानते हो उससे कई  गुना बेहतर हो  ।    

                  " मनुष्य की जगह वह है जहां वह जाना चाहता है " 
                                                                -डॉ वान 


कामयाबी से पहले हर इंसान को संघर्ष से गुजरना पड़ता है सही फैसले लेने पड़ते है । रात  दिन कड़ी मेहनत की  हद से गुजरना पड़ता ।   कई बार सही आइडियाज भी हमे लाभ नही पहुंचाते इसलिए विचार विमर्श से फायदा उठाएं। सही समय पर निर्णय ले और बेहतर पर्द्शन दे। बेहतर पर्द्शन से ही ऊचाई पर पहुंच कर धन संपदा प्राप्त कर सकते हो।  

जो तुम सोचते हो बोलते हो उसे पा सकते हो :- कोशिस तो करो उसकी तरफ चलो, जो भी इच्छा है उसे अपने आपसे कहो कि  ये मुझे चाहिए। अपनी अंतरात्मा से दोहराओ, मन से इतना चाहो की आप का जनून बन जाएं । फिर देखो की वो इच्छा कैसे पूरी कर लेते हो । आपको पता भी नही चलेगा की आप की इच्छा कब पुरी हो गई । जब आप सोचते हो कि  आप को धन की आवश्य्कता है तो आप उसे हासिल करने का कोई  ना कोई रास्ता निकाल ही लेते हो । और जब आप किसी फिल्ड में सक्सेस चाहते हो तो कड़ी मेहनत करोगे और उसे पाने के लिए जी जान लगा दोगे। जिससे जो आपके लिए असम्भव था वो सम्भव हो जायेगा । बस आप पहला कदम उठाओ ।


मन को गुलाम बना लो कुछ भी असंभव नही रहेगा : -कहते हैं   "मन के हारे हार है मन के जीते जीत" सारा दामोदार इस मन पर है जिसने इस मन को गुलाम बना लिया उसके लिए कुछ भी असंभव नही है । यदि आप सफल और सुयोग्य बनना चाहते हैं तो हमेशा प्रयत्न शील रहें । जिंदगी का असली  मजा तो उस काम को करने में है जब लोग कहते हैं की तुम ये नही कर सकते और आप वो काम कर लेते हैं । चमत्कार भी इसी दुनिया में होते हैं । चमत्कार होते हैं दृढ़ विश्वास, कड़ी मेहनत ,सही प्लानिंग से । असंभव शब्द को अपनी लाइफ की डिक्सनरी से निकल कर फेंक दें क्यों कि असम्भव शब्द कर्म हीन लोगो के लिए बना है आप के लिए नही । क्योकि आप कुछ करना चाहते हैं,सीखना चाहते हैं इसलिए आपके लिए तो ब्रह्मांडीय शक्तियां स्वयं आपकी मदद करने के लिए आएगी । 

असंभव को संभव बनाने के लिए ऊचा चरित्र, शुद्ध नियत, और दिल से काम करने की जरूरत है :-    बे मन काम करने से तो सिर्फ दाल रोटी ही कमा सकते हो । जब भी आप कोई जिम्मेदारी लें तो उस काम को करने में इतना फोकस करें की गलती से भी कोई गलती ना हो अपनी तरफ से १०० के  १००% अच्छा करें । अपने मन को उस समय इधर उधर ना भटकाए। अगर आप का मन इधर उधर भटका तो आप सही तरीके से काम नही कर पाओगे । और जब तक सही तरीके से काम नही करोगे तब तक आप सफल नही हो सकते।  आदर्श और पूर्ण व्यक्ति ही असम्भव को संभव बनाने की हिम्मत रखता है । जब तक आप पूर्ण नही बनोगे ,गलती करना नही छोड़ोगे ,तब तक आप असफल होते जाओगे सफलता एक चीज मांगती हैं और वो है पूर्णता ।    आपके अंदर वह क्षमता और गुणवत्ता है जो आपको चमका सकती है । बस अभ्यास करो और पुराने खाके को तोड़ कर अपनी क्षमता बढ़ाओ । अगर आप अपने विचारो पर काम कर रहे हो तो खुद पर भरोसा कर सकते हो । तुम जितना बेहतर सोचोगे उतना ही बेहतर कर पाओगे। आप को ये सोचना होगा की  बेहतर सोचना और बेहतर करना ही तुम्हारे जीवन और कैरियर में कमाल का परिणाम लायेगा । आप बेहतर तरीको से काम करके ही कार्य कुशल और अधिक प्रभावशाली व्यक्ति बन सकते हो । 

खुद पर नियंत्रण रखें :-   जब आपका अपने शरीर पर नियंत्रण होगा तो ये आप के दिमाग पर दबाब डालेगा। दिमाग को  सही दिशा में ले जायेगा। जितना स्वस्थ आपका शरीर होगा उतना ही बलशाली आपका दिमाग होगा। उतनी ही सकरात्मक सोच होगी । जब आप सकरात्मक सोचोगे तो आपके पास सुख समृद्धि बढेगी  आमदनी बढ़ेगी और आपको सम्मान मिलेगा । आपका नजरिया ही असम्भव को सम्भव बना सकता है। ऎसे लोगो से जान पहचान बनाये जो जिंदगी में कुछ करना चाहते हैं । इस दुनिया में कुछ श्रेष्ट करने के लिए आये हो । अगर आप ने कुछ नही किया तो इससे समाज और विश्व का बहुत बड़ा घाटा होगा । कई बार  डर की  वजह से कुछ बेहतर नही कर पाते। अगर कुछ बेहतर करना चाहते हो तो  डर को भगाओ  डर  बेहतर नही करने देगा ।             

कामयाबी का श्रेय साथियों में बाटें :-  अगर आप कामयाबी का  सारा श्रेय खुद लेना चाहते हो तो ये गलत है । अगर आपको लगता है  कि ये आपके प्रयास से संभव हुआ है तो ये सरासर गलत है बेईमानी है  आप गलत सोच रहे हैं। क्यों कि कुछ भी अकेले  प्राप्त करना असंभव है। ये आपके साथियों की मेहनत, बड़ो के आशीर्वाद, कई लोगो की दुवाओं और प्रभु इच्छा से आपको प्राप्त हुआ है । लोग आपसे जितनी उमीद करते हैं उससे दुगना देकर असंभव को संभव बना लो।  
  

सर्वोत्तम समय अपने कार्य में लगाए :-  श्रेष्ट समय में श्रेष्ट करने की कोशिस करें । आप सर्वश्रेष्ठ तभी कर पाओगे जब उस कार्य के पीछे कोई  बड़ा मकसद होगा । सजगता एकाग्रता विश्वास धैर्य निरंतरता इन गुणों से इंसान कठिन से कठिन कार्य को आसान बना लेता है। जब आप किसी की परवाह किये बिना आगे बढ़ते हो तो मजिल तक  पहुंच ही  जाते हो अगर रस्ते मे कोई मुस्किल आती भी है तो परमात्मा खुद  कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल देता है । जब तक आपके लिए कोई काम करना संभव नही है तब तक उस कार्य की पूरी जानकारी लेकर उसे  करने की  तैयारी  करें ।किसी कार्य में तैयारी का मतलब है त्याग और अनुशासन । कल्पना करो तो उस कल्पना को पूरा करने के लिए ज्ञान भी कही  ना कही से अर्जित  हो  जाता है ।  

        " इंसान की सबसे बड़ी खोज ये है कि वह उस काम को कर सकता  जिस काम को  पहले सोचता था नही कर सकता "
                                                                         ----हेनरी फोर्ड 


हो सकता है कि शुरुआती प्रयासों में आपको सफलता ना मिले :- कई बार ऐसा भी होता है कि पहली बार में सफलता नही मिलती। लेकिन आप अपनी असफलता को पहला कदम ना माने । गहन मंथन करें  की  किन गलतियों की वजह से  असफल  हुए हो, उन्हें दूर करें। सयम  व धैर्य  से आगे बढ़ें ।धैर्य और सयम सफलता  की  महत्व पूर्ण कड़ी हैं। सयम ही आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अगर संघर्ष के समय आपका सयम जवाब दे गया तो  मंजिल पर पहुचना मुश्किल  हो  जाएगा । अगर आपमें पैशन है मेटली स्ट्रॉग है सपने देखने और पुरा करने की लग्न है, दिल में कुछ कर  गुजरने की चाहत  है तो मुकाम जरूर हासिल कर सकोगे । अगर इरादे मजबूत हो तो रास्ते खुद ब खुद निकल आते हैं । जब आप समझते हो की आप कार्य को कर सकते हो तो दुनिया का  कोई दार्शनिक सिद्धांत ऐसा नही है कि जो आपको उस कार्य को करने से रोक सके । और अगर आप  मानते हो  की आप उस कार्य  को नही कर सकते तो दुनिया में आपसे उस कार्य कोई नही करवा सकता। जब आपको लगता है की आप को मजिल मिल सकती  है तो आप रस्ता ढूढ़ निकलोगे । और उस रस्ते से मंजिल तक पहुंच जाओगे। मनोबल और सकल्प ही वह शक्ति है जो लक्ष्य तक पहुंचाती  है । 






Friday, January 22, 2016

सहन शीलता बनाती है इंसान को कामयाब

                         सहन शीलता बनती है इंसान को कामयाब     
 
                                                                     
सहन सील इंसान हर फिल्ड में कामयाब हो जाता है । सहनशील व्यक्ति विपरीत परिस्थति होने पर भी शांत चित रहकर उससे बहार  निकलने का रास्ता खोज लेता है।अधिकतर काम या रिश्ते हमारी सहनशीलता की कमी की वजह से बिगड़ते हैं । धैर्य क्षमा सहिष्णुता से ही आप अपना लक्ष्य पा सकते हो । धैर्यवान व्यक्ति में अद्धभुत सामर्थ्य होता है। वह किसी भी परिस्थति में अपना या दुसरो का नुकसान नही होने देता। सहनशीलता की कमी इंसान को उदंडी व उचखल बनाती है। और सहनशीलता इंसान को बेहतर  बनाती  है ।   
       
अपनी सोच को सीमा में ना बांधे :- जो कार्य आपकी  नजर में सही हैं, ये जरूरी नही है की  वो किसी और की निगाह में भी सही हो । हो सकता दूसरे के पास उस काम को करने का और भी बेहतर आइडिया हो इसलिए आप अपनी सोच का दायरा छोटा ना रखें । ये सोचे की ये बेहतर करने की अंतिम सीमा नही है । बेहतर को भी बेहतर बनाया जा सकता है। दुसरो की बात ध्यान से सुन्नी चाहिए और दुसरो के नजरिया से भी देखना  चाहिए ।  

ऊचा पद यश कीर्त   सुख सुविधा की इच्छा रखना  गलत बात नही है :-  ये तो प्रगति की जननी है । लेकिन सिर्फ इच्छा से काम नही बनता। काम बनता है कड़ी मेहनत से समय का बेहतर प्रयोग से धैर्य से पॉजिटिव सोच से सही प्लानिंग से अगर इनमे से एक की भी कमी रह जाए तो कार्य की  सफलता में संदेह होता है ।  
  
                      "सैम्यूल जॉनसन एक शब्द की खोज में आधा पुस्तकालय खोज डालते थे " 

 "टाल स्टाय एक महान लेखक हैं इनके बारे में कहा जाता है कि वो पांडुलिपि प्रकाशक को देने से पहले छह बार लिखते  थे ।" 

अपने कार्य की गुणवत्ता में सुधार करें । अपने कार्य में धैर्य रखकर काम करते रहें। धैर्य  से कार्य में निखार आएगा और सफलता आपके नजदीक आती जाएगी । आज तक जितने भी लोग कामयाब हुए हैं उन्होंने कडी  मेहनत  की है पसीना बहाया  है और सालो इतजार किया है तब जाकर सफलता का मुंह देखने को मिला है। सफलता विरासत में मिलने वाली चीज नही है । 

             " अक्षर धाम की शिल्पकारी में,  सात शिल्पकारियों को  सात साल लगे थे ''
             " गुफा  अजंता  एलोरा की शिल्पकारी में एक शिल्पकारी की सात पीढ़ी लगी थी "

एक माली को देखो गुठली बोने  के बाद पेड़ उगने और बड़े होने फिर फल लगने में सालो लग जाते हैं ।  और माली धैर्य रख कर ईमानदारी से कार्य करता रहता है । और बासँ के पेड़  में तो सालो बाद अंकुर फूटता है। अगर नतीजा ना भी दिखे तो इस का मतलब ये तो नही है कि उसका असर नही हो रहा है ।  

अपने स्टेट ऑफ़ माइंड से बहार निकले :-अगर आपको किसी की निंदा करने पर या सुझाव देने पर बुरा लगता है तो इसका मतलब है की आप अपने स्टेट ऑफ़ माइड से बहार नही निकलना चाहते ।जिस की वजह से आपको बेहतर करने में मुश्किल होती है । अगर आप ध्यान बात ध्यान से सुनोगे तो आप किसी बात पर असहमत  होने पर सामने वाले इंसान को समझा सकते हो । अगर आप अपनी ही बात पर अड़े रहे तो आप किसी सही निर्णय पर नही पहुंच पाओगे।  जो इंसान सहनशील नही होता वो एक दिन अपने परिवार वालो के लिए भी क्रूर हो जाता है  जिसकी वजह से उसका जीवन कष्टदायी  हो  जाता है । किसी की बात नजर अंदाज करना अच्छी बात नही है जब हम आलोचनाओं का सामना करेंगे तभी तो बेहतर इंसान बन सकेंगे। अगर आपका निदा सुनने से मुड़ खराब हो जाता है। तो सही से काम नही कर पाओगे   आप काम में गलती करोगे और बिना मन के काम करोगे। और बिना मन के काम करने से आपको सफलता कभी  नही मिल सकती । 


मानव व्यक्तित्व कुछ ऐसा है जब तक ये परेशानियों में ना घिरे तब तक इसकी क्षमताए निखर कर बहार नही आती :-  जैसे सोना अग्नि में पड़कर निखरता है, चंदन घिसने पर खुसबू देता है उसी तरह इंसान की क्षमता परेशानियों और आत्मनिरक्षण से बहार निकलती हैं । इसमे धैर्य रखना पड़ता है  भगवान श्री राम ने भी पहले सहन शीलता का परिचय देते हुए रावण को एक मौका दिया था । और भगवान श्री कृष्ण ने भी पहले कौरवो से पांच गांव ही पांडवो को देने के लिए कहा था जिससे कि विवाद टल सके । उन्ही लोगो को याद किया जाता जो सहनशीलता की राह अपनाकर आगे बढ़ते हैं जिनका ह्रदय समुद्र की तरह गहरा है| समाज को उत्तम  और आदर्शवादी बनाने के लिए धनी होने की जरूरत नही है बल्कि सुस्कारित होना जरूरी है। अगर आप इतिहास पर नजर डालोगे तो पाओगे कि मदन मोहन मालवीय , गांधी ,ए पी जे अब्दुल कलाम जी सभी सुस्कारित थे । 


सहनशील इंसान परेशानियों का असर कार्यो पर नही पड़ने देता :- सहन शील इंसान बिना घबराए अपने कार्य पर ध्यान देता है । और आसानी से बहार  निकलने का  रास्ता खोज लेता है । अगर कोई परेशानी आती भी है तो वो विचलित नही होता क्यों की वो जनता कोई भी परेशानी स्थाई  नही है । इस लिए  वह अपना फोकस काम पर रखता है, शांत रह कर समस्या का समाधान ढूढता है। सहन शीलता से  मन की शक्ति बढ़ती है साथ  में सघर्ष  से लड़ने  की क्षमता बढ़ती  है । 
         
सहन शील व्यक्ति में सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता अधिक होती है :- सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता तो इंसान में होनी ही चाहिए। जो इंसान सही समय पर सही निर्णय नही लेते उनकी ग्रोथ रुक जाती है । अगर आपके अंदर  भी ये कमी है तो आप इस कमी को दूर कर सकते हो। बस थोड़े से धैर्य और सोचने की आवश्कता है। आप सोचिये की आप को क्या डिसीजन लेने की जरूरत है । आपको इससे क्या फायदा है क्या नुकसान है जब आप ऐसा सोचोगे तो आप को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। आप अपने सीनियर से भी सलाह ले सकते हो ।  
   
               "सहन शीलता को श्री मद भागवत में भी देवी सम्पदा बताया गया है" 

जिस इंसान के पास सहन शीलता नाम की  संपदा है वह कभी अपने मार्ग से विचलित नही होता । इसलिए हमेशा ही सयमित रहें।  कभी भी अपनी सीमा ना लांघे।जो व्यवहार आप को अच्छा नही लगता वह व्यवहार किसी और के साथ ना करें। अपना व्यवहार ना बिगड़ने दें । कई  बार हम अपनी छोटी सी कमी निकालने पर इतना चिड़ जाते हैं कि सामने वाले को गलत ठहरा ने पर तुल जाते हैं। जिसका पछतावा हमे बाद में होता है  और फिर इतनी देर हो चुकी होती है  कि प्रायश्चित  करने  का मौका भी  नही मिलता।  






Saturday, January 9, 2016

अच्छी आदतें ही आप को कामयाबी दिलाएंगी

                                                              अच्छी आदतें ही आप को कामयाबी दिलाएंगी    

                                          
आदतें ही इंसान को सक्सेस या फैलियर बनाती हैं। अच्छी आदते इंसान को सक्सेस और गलत आदते इंसान को फैलियर बना देती हैं। जो गलत आदतों के सामने अपने घुटने टेक देते हैं वे असफलताओं को आंमत्रित करते हैं। जिसका हरजाना वर्तमान व भविष्य में उठाना पड़ता हैं। इसलिए अच्छी आदतें डालें। अच्छी आदत हैं बड़ो का सम्मान करना, छोटो को प्यार करना, जरूरत मंद इंसान का सहयोग करना, सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना,  अच्छे कार्य करना, मधुर वाणी बोलना, किसी को अपशब्द ना बोलना, अच्छा आहार व्यवहार रखना, अच्छे कार्य करना ,समय का सदुपयोग करना, किसी को भी तन मन धन से नुकसान न पहुँचाना,  नशा ना करना, ईमानदारी से जीवन व्यतीत करना आदि । इससे  समाज में  इज्जत भी होगी और आप सक्सेस फुल  भी होंगे ।   
      
                                   " जिंदगी लम्बी नही , गहरी होनी चाहिए "
                                            -रॉल्फ वाल्डो इमसर्न 

किसी ने सही कहा है  कि जिंदगी जीने मे और जीवित रहने मे बहुत बड़ा अंतर है । सफलता और असफलता का सिलसिला तो जिंदगी में धुप और छाव की तरह चलता रहता है। कुछ लोग थोड़े से ही अपडाउन मे घुटने टेक देते हैं फिर पूरी जिंदगी असफलता का बोझ कधे पर ढोते  हैं । जिसका हर्जाना खुद तो भुगते ही हैं साथ में परिवार वालो को भी भुगतना पड़ता है। इंसान की फ़िक़रत है कि वह असफल हो जाने पर अपनी  इस नाकामयाबी का जिम्मेदार किसी और को ठहराने लगता है। अगर वह अपनी गलती परिचितों व दोस्तों पर थोप ने की बजाय अपनी गलती को मानकर  उन्हें सुधार कर आगे बढे  तो भविष्य में सफलता के चांस बढ  सकते हैं  । खराब आदतो को जितना जल्दी हो सके छोड़ देना चाहिए और अच्छी  आदतो को जीवन में उतार लेना चाहिए। अच्छी आदतो को अपने जीवन में कैसे उतारें आइये जानते हैं ------    


सकरात्मक नजरिया रखें :- नामुमकिन जैसे विचार मन में आने लगे,  सोच लेना की यहां नजरिया  बदलने की जरूरत है । यदि जिंदगी में कुछ करना चाहते हो तो  नामुमकिन शब्द को अपनी लाइफ की डिक्सनरी से निकाल फेंको । हर अविष्कार को दुनिया वालो ने नामुमकिन ही बताया था लेकिन फिर भी वो हुए । जो लोग काम को करने से पहले  ही काम को नामुमकिन मान लेते हैं,  वे लोग पहले ही मन में ना होने की धारणा बना लेते हैं  फिर वो कार्य नही हो सकता । कई लोग भूतकाल की असफलता को लिए फिरते हैं  जिसकी वजह से सफलता की आहट को  नही सुन पाते। अगर आप भूतकाल की असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहते हो तो आज में जीना सीखो और अपना नजरिया बदलो ।  


अवसर पहचानें  :-   कई बार अवसर समस्या के रूप में आते हैं। उन्हें पहंचान कर स्वयं को उनके लिए परिवर्तित कर लेना ही समझदारी है । कभी भी देखना की हर बुराई में कुछ  ना कुछ भलाई छिपी रहती है।लेकिन हमारी समस्या ये है कि हम अपने लक्ष्य के प्रति उत्साहित तो बहुत होते हैं लेकिन उन्हें पाने के लिए मेहनत उतनी नही करते जितनी जरूरी है। ये बात मन में बिठा लो कि कुछ भी हासिल करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कड़ी मेहनत । कड़ी मेहनत के  बिना आप किसी भी लक्ष्य को पाना तो दुर उसके सपने भी मत देखना  ।   

जोखिम लेने से ना डरें :- जो लोग जोखिम  लेने से डरते है वे लोग जिंदगी में कभी कोई बड़ा मुकाम हासिल नही कर पाते । जीवन में मिलने वाली सफलताओं का दरवाजा ही बंद कर लेते है। मेरे हिसाब से तो सक्सेस की पहली शर्त  है जोखिम लो।  सबसे बड़ा जोखिम तो  जिंदगी है जिसके लिए आपने सब कुछ दाव पर लगा रखा है । आप ही बताइये कि जो  कुछ भी करते हैं  सिर्फ अपने लिए ना ? पढ़ते हैं ,काम करते हैं ,शादी करते हैं मकान बनाते हैं, बच्चे और फिर इन्हें पढ़ाकर कामयाब किस लिए करते हैं ? बताओ कोई गारंटी  है कि जो आप  ये इतनी मेहनत कर रहे हो  आप इनका सुख ले पाओगे ? कुछ लोग कहते में ये नही कर सकता । क्यों नही कर सकते ? जब आप इस तरह सोचते हो तो आप पर निराशावादी विचार धारा  हावी रहती है। निराशावादी विचारधारा  इंसान को असफलता की तरफ धकेलती है। और आशावादी विचारधारा इंसान को सफलता की राह प्रसस्त करती है । 


 कोई भी कार्य कल पर ना टालें :-  ये बात  आप जानते हो  कि जो काम कल पर टाल रहे हो उसकी कोई  गारंटी नही है कि  कल भी उस कार्य को करोगे या नही लेकिन फिर भी गलत आदत की वजह से कई कार्यो  को कल पर टाल देते हैं । क्यों  ? क्यों की उससे होने वाले नुकसान पर ध्यान ही नही जाता । ये लापरवाही सफल होने में  रोड़े अटकाती है । कार्य को कल पर टालने के आप के पास हजारो बहाने हो सकते हैं । लेकिन करने के लिए एक ही वजह काफी है कि  ये काम आज ही करना है आज का दिन ही इसे करने के लिए बेहतर है। कल पर टालने का मतलब है कि आप उस कार्य को करना ही नही चाहते । कई कार्य तो ऎसे भी टाल देते हैं जिनमे बहुत ही थोड़ा समय व परिश्रम लगता है । कई चीजो को अंधविश्वासी होने  की वजह से टाल देते हैं  किसी समय  को सही  और किसी समय गलत मानते हैं । कई काम इसलिए भी टाल देते हैं की आज हमारा मुड़ नही है। कुछ भी कहो ये गलत आदत बन गई है । ये भुल जाते हैं  कि  अच्छा वक्त हमारे मुड़ को देख कर नही आएगा । समय  हाथ से रेत की तरह फिसल जाता है जो दुबारा लोट कर वापिस नही आता । सिर्फ पछतावा रह जाता है ।

वादो को नुकसान उठकर भी पूरा करें :-  कई  लोग वादे तो बड़े बड़े कर देते हैं पर उन्हें निभाते नही हैं । जिससे विश्वास टूटता है कई बार रिश्ते तक टूट जाते हैं । अगर आप लोगो की निगाह में विश्वास पात्र बनना चाहते हैं, ये चाहते हो कि लोग आप पर विश्वास करें तो जो वादे आपने किये हैं अगर उससे आपको नुकसान भी होता है तो भी उसे पूरा करें । कहते है कि अगर लाइफ मे सक्सेस चाहते हो तो हाथ के सच्चे, जुबान के पक्के, समय के पाबंद हो जाओ । बिना नफा नुकसान जानें कभी कोई वादा ही न करें अगर कर दिया है तो उसे हर हाल में निभाए। तभी तो कहा गया है कि 

                  " भावुकता में कोई वादा ना करें,  गुस्से में कोई फैसला ना लें "

घर परिवार को नजर अंदाज ना करें :- जिंदगी  हर समय किसी ना किसी उलझन में उलझाती रहती है ।उस उलझन में और कामयाबी पाने के चककर में घर परिवार  और समाज वालो से दूर होते जाते हैं। ये भूल जाते हैं कि पैसा किस लिए  कमाते हैं ? घर परिवार और समाज में एक मुकाम हासिल करने के लिए ? जब परिवार वाले ही पीछे छुट जायेंगे समाज से ही कट जाएंगे फिर कामयाबी किस  के लिए ? कामयाबी किस के साथ सेलिब्रेट करोगे  ? ख़ुशी मनाने के लिए भी तो अपने ही लोग चाहिए। दोस्त और रिस्तेदार भी थोड़ी ही देर के लिए शामिल होगे पूरा समय तो सिर्फ परिवार वाले ही दे सकेंगे। इंसान भावुक प्राणी है इसलिए हमेशा ही दोस्तों   व परिवार  वालो का सहारा चाहिए । इसलिए जितना भी समय मिले उनसे मिलते रहिए। जितना आप उनका ख्याल रखेंगे उतना ही वो आपका ख्याल रखेंगे ।  


बजट के अकोड़िग चलें :- हर इंसान अच्छी जिंदगी जीना चाहता है लेकिन अच्छी जिंदगी जीने के लिए अपने बजट को ना बिगाड़े । कई लोग किस्तों पर समान खरीदे जाते हैं और इतना कर्ज सिर पर रख लेते हैं की फिर वो लोग उस ऋण को ही नही उतार पाते या उसका ब्याज भरने में ही सारी कमाई चली जाती है। प्लानिंग करके नही चलते जिस की  वजह से टेंसन बनी रहती है । जिंदगी  खुल कर जिए पर अपव्य न करें, दुसरो के दिखावे में आकर अपना बजट न बिगाड़े । कई लोगो में देखा जाता है की वो दुसरो के देखा खास तर विवाह शादी या बड़ा मकान बनाने के  के चककर में आकर अपना बजट बिगाड़ लेते हैं। फिर पूरी जिंदगी कर्ज सिर पर लिए फिरते हैं। आज की महगाईं में ये सबसे बड़ी टेंसन है जिससे अधिकतर मध्यवर्गीय लोग गुजरते हैं । किसी महान इंसान ने कहा है कि  खुश रहना चाहते हो तो इनकम बढ़ाओ खर्चे नही । इनकम से अधिक खर्चे बढ़ेंगे तो टेंशन बढ़ेगी ।   

छोटी से छोटी ख़ुशी को सेलिब्रेट करें :-  जिंदगी की भाग दौड़ मे टेंशन ज्यादा हैं और सकून  कम ।  इसलिए जिंदगी में जो भी ख़ुशी मिले उसे इंजॉय करो। कहते हैं ना ख़ुशी बाटने से बढ़ती है तो बाटो और खुशियां बढ़ाओ । आज का इंसान खुश रहना ही भूल गया है। हर इंसान के दिमाग में एक कीड़ा घुस गया है और वो कीड़ा है टेंसन जिसने सब की नींद व ख़ुशी छीन ली है । अगर इस टेंसन को निकाल दें तो इंसान बहुत खुश रह सकता है । और ये निकलेगा तब जब हम दुसरो से  कंपेयर करना छोड़ देंगे, हमेशा अपनों से नीचे वालो को देख कर जिएंगे । तभी खुश रह  सकेंगे । ऎसे कई लोग होते हैं जिन्हे देखकर मन में हलचल मच जाती है ऎसे लोगो से दुरी बना लें ।क्यों कि इंसान सब कुछ कर सकता है लेकिन किसी से कंपेयर नही कर सकता । क्यों  की भगवान ने हर इंसान को एक अलग  विशेषता से नवाजा है इसलिए कंपेयर तो आप किसी से भी कर ही नही सकते ।