Monday, September 5, 2016

रिस्तो में शक जहर का काम करता है !!!

                        
Image result for risto me shk na kreदोस्तों ! जिस रिस्ते में शक का जहर फेल जाये,  वो रिस्ता खोकला हो जाता है। और फिर उस रिस्ते को कितना ही निभाने की कोसिश करो, वो नही नीभ पाता।रिस्ते की बुनियाद हैं - विश्वास समर्पण प्रेम । अगर इनमे से एक में भी कमी आ जाए तो रिस्ता नीरस हो जाता है ।  


आपको एक आंखों  देखी घटना सुनाती हूं -  एक नई नई शादी हुई थी । 
वो लड़की बड़े परिवार से थी। उस लड़की का चाचा  उस लड़की का हम उम्र था। जो काफी स्मार्ट और खुश मिजाज किस्म का इंसान था। 


जब हम उम्र के होते है तो रिस्तो में रिस्तो के साथ साथ एक दोस्तों जैसा रवैया रहता ही है। लड़की का  भी अपने चाचा से ऐसा ही रिस्ता था  ।

वो लड़की बच्चों में सबसे बड़ी थी। लड़की के भाई सबसे छोटे थे। चाचा सारे भाइयों में छोटा था। इसलिए कई बार तीज त्यौहार देने के लिए चाचा  आता । वो दोनों ऐसे ही हंसते बोलते जैसे शादी से पहले बात करते थे । 


ये बात लड़के वालो के परिवार को अच्छी नही लगी। उन्होंने लड़की के चाचा से वहा आने के लिए मना किया। इससे लड़की ने ऑब्जेक्शन उठाया की मेरे  चाचा त्यौहार नही लेकर आएंगे, तो कौन आएगा  मेरे भाई छोटे हैं  ?   


लड़की के ऑब्जेक्शन उठाने पर लड़की का पति  उसे शक की निगाहों से देखने लगा । और बात बे बात लड़ना झगड़ना टॉर्चर करने लगा। जब ये बात बढ़ती गई तो लड़की के घर वालो को पता चला । उन्होंने उसे काफी समझाया बुझाया लेकिन उसके पति  के दिमाग से ये बात नही निकली ।एक दो महीने के बीच में ही ये ऐसी गलत फेमी पैदा हुई कि उनकी घ्रस्ति ही उजड़ गई । 

लड़की का उसके घर आना जाना बन्द करवा दिया गया। लड़की ने भी अपने जीवन में शांति बनाये रखने की सोच कर अपने घर ना जाने की बात मान ली ।


घर वालो के दवाब में आकर लड़के ने समझोता तो कर लिया। लेकिन उसके मन से शक का बीज नही निकला। और उसका शक बढ़ता ही गया । कुछ साल ऐसे ही चलते रहे आपस में लड़ाई झगड़े होते रहे । और इस बीच उनके बच्चे भी हो  गए । 



उसका पति  उस  को अपने घर जाने के लिए मजबूर करने लगा । लड़की की सास नन्दों ने बच्चो की वजह से स्पोट करा। उनका कहना था ये गलत फेमी है। बच्चो को कहा छोड़ेगी बच्चे बर्बाद हो जायेगे । और उसे नही जाने दिया ।

विश्वास का धागा अगर टूट जाये तो फिर नही जुड़ता । ऐसे ही इनके बीच सालो में भी वो विश्वास का धागा नही जुड़ा। और उनके बीच का झगड़ा बढ़ता गया। पति  घर परिवार से दूर होता गया और किसी और लड़की के चक्कर में आकर एक दिन वो उन्हें छोड़ हमेशा के लिए घर से निकल गया । 

वो अनपढ़ बराबर लेडिस  ने अपने बच्चो को खुद पाल पोश कर बड़ा किया और विवाह शादी की । एक शक ने बसा बसाया घर उजाड़ दिया, बच्चो से उनके पिता को छीन लिया, और माँ से बेटे को छीन लिया , बहन से भाई छीन लिया । हँसता खेलता परिवार बर्बाद हो गया । पत्नी के लिए शादी जन्म भर की सजा बन गई । 




आत्मविश्वासी इंसान की पहंचान !!!



Image result for aatmvishvas ki phchanआत्मविश्वासी इंसान जो सोचता है, उसे करके ही दम लेता है। उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नही है ।ऐसे लोगो की लाइफ में, चाहे कितनी भी समस्याएं आएं, वो पीछे मुड़कर नही देखते। गिरने के बाद भी उठकर कई गुना हिम्मत से दुबारा काम शुरू करते हैं ।  
                         

आत्मविश्वासी इंसान किसी की परवाह नही करता :- वो ये नही सोचता की दुनिया क्या कहेगी । जिसे वो सही मानता  है उसे करता है, चाहे दुनिया साथ दे या ना दे । सुनहरे भविष्य की कल्पना करता है ।और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखता है । 

हमेशा पोजेटिव नजरिया रखता है :-अपने विचारो को दुसरो के सामने रखने से नही हिचकता । जब हम कोई नया काम शुरू करते हैं तो लोग कई तरह की बाते  बनाते है इससे हमारा विश्वास डगमगा जाता है । अगर आपको अपने सपने पर या मन में थोड़ा सा भी संदेह है तो आपका मन डामाडोल रहेगा । इससे आपका अवचेतन मन सपने को ग्रहण नही कर पायेगा । जब आप सोचते हो की आप इस कार्य को कर सकते हो तो आपका अवचेतन मन इसको सच मान लेता है और लक्ष्य प्राप्ति में लग जाता है । 

अपनी जिम्मेदारी से चलता है :- खुद को भविष्य का निर्माता मानकर कार्य करता है।  खुद को कहा पहुचना है ? कैसे पहुचना है ? किस की मदद ले सकता है ? कब तक पहुचना है ?  पूरी प्लानिग से काम करता है । दुनिया में कोई भी ऐसी इच्छा नही है जिसे पूरा नही किया जा सकता । आत्मविश्वासी जानता है कि जो भी इच्छा जाग्रत होती है उसे अवश्य पूरी की जा कर सकती  है । ईसा मसीह ने भी कहा है -

" मागो वो तुम्हे दे दिया जायेगा ,जो तुम ढूडोंगे वो तुम पाओगे । तुम खटखटाओ तुम्हे दरवाजा खोल दिया जायेगा"

आत्मविश्वासी लोग अनिश्चता से नही घबराता :-कोई भी काम बेधड़क करने के लिए तैयार रहता है। असफलता मिलने पर टूट कर नही बिखरता  है। असफलता को स्पीड ब्रेकर की तरह लेता है उसमे जो गलतिया हुई हैं उन्हें सुधारकर आगे बढ़ता है ।  

आत्मविश्वासी लोग बड़ी से बड़ी समस्या को भी मुस्कराकर झेल जाते हैं :-हर समस्या खुद को सुधारने का मौका भी देती है । ऐसा मुमकिन नही है की हर इंसान को पहले प्रयास में ही सफलता मिल जाये । ऐसे कई उदहारण हैं जिन्हें पहले असफलता हाथ लगी और बाद में कामयाबी का पंचम लहराया । 

" जब कोहरा बहुत गहन छाया हो ओस की बूंद टपक रही हो ,तब भी सूरज चमक रहा होता है । कोहरा हटने के बाद सूरज आपको चमकता हुआ ही मिलेगा । कोहरा सूरज के तेज को कुछ समय के लिए ढक तो सकता है लेकिन उसके तेज को कम नही क्र सकता"

इसी तरह से समस्याएं काबिल इंसान की, गति को धीमी कर सकती हैं लेकिन  उसे  कामयाब होने से रोक नही सकती ।  

अपनी गलतियों को स्वीकार करके सुधारने की कोशिस करता है :-जीवन में कोई न कोई गलती जाने अनजाने हो ही जाती है । उसे लेकर ना बैठे । आप अपने जीवन के लिए स्वतन्त्र हैं अपने भाग्य के निर्माता हैं । 

" लर्न फ्रॉम पास्ट ,लीव फॉर टुडे ,एंड प्लान फोर टुडे "








Saturday, September 3, 2016

शादी बन जाती है जीवन भर की घुटन!!

                            
Image result for pati patni ka manmutavदोस्तों !  जब दो लोगो के मिलने पर पति पत्नी बनते हैं । तो जाहिर सी बात है कि जब शरीर अलग हैं ? तो  दोनों का स्वभाव अलग होगा? दोनों की सोच अलग होगी ? दोनों का इन्टेलिजेटस लेवल अलग  होगा ? दोनों की परवरिश अलग होगी ? दोनों का माहौल अलग होगा? दोनों का नजरिया अलग होगा ? 

सब कुछ अलग होते हुए भी रहना तो दोनों को आजीवन  भर साथ है।  फिर ऐसा क्या करें की दोनों की विभिंताये आपस में ना टकराए ? क्यों कि पूरी जिदगी घुट घुट कर तो नही जी सकते ?  पूरी जिदगी को बोझ की तरह तो नही ढो सकते ? शंक ,उदासी, घुटन, अविश्वास भरी जिदगी तो नही जीना चाहेगें ? बच्चो को  अनुचित माहौल में तो नही पाल सकते ?  

जहा पति पत्नी  के बीच में तनाव रहता है, वहां खुशहाल जीवन  हो सकता ?  बच्चो को कुठाओ से  बचाया जा सकता ? रिस्तो में प्रेम रह सकता है ? बच्चो को आदर्श संस्कार दे सकते हैं ?  पति पत्नी के विचारो का टकराव पुरे घर की शांति भंग कर देता  है ।  

ऐसे माहौल में सिर्फ टेशन हो सकती है । वहां कोई भी खुश नही रह सकता । ऐसे हालातो में घर बिखर कर रह जाते  हैं । और बच्चो में भी वे ही नैगेटिव संस्कार पड़ते हैं वे  भी कभी भी किसी भी रिस्ते को निभाने में सक्षम नही  बन पाते । 

जब पति पत्नी पर इतनी जिम्मेदारी रहती है तो क्या एक दूसरे में कमियां निकालते और लड़ते झगते रहना चाहिए ? या समझदारी से डिशिजन लेने चाहिए ? कही ना कही  पति पत्नी के विचारो में मतभेद तो होगा । 

कैसे निबटे  मतभेद जैसी स्थिति से -

दोस्तों ! मेरी निगाह में तो एक ही रास्ता है कि-  दोनों एक दूसरे को इस्पेस दें। यानी की एक दूसरे की लाइफ में ज्यादा दखल अंदाजी ना करें अपनी ना थोपें। एक इंसान को घूमना पसन्द है और एक को  घूमना बिलकुल भी पसन्द नही है तो ऐसे में यही सलूशन है की घूमने वाला अपने फ्रेड सर्कल के साथ घूमे और जिसे घूमना पसन्द नही है वो हर जगह जाने से  ना रोके । जो घूमना चाहता है अगर वो कही नही जायेगा, तो उसे घर में घुटन लगेगी और चिड़चिड़ा हो जायेगा। 

एक को घर का खाना पसन्द है दूसरे को बाहर का कहना पसन्द है तो एक दूसरे की भावनाओ की कद्र करते हुए, कभी कभी बाहर खाना खा लेना चाहिए । बाहर के खाने को पसन्द करने वाले को घर में खाना चाहिए । हर चीज में सिर्फ अपनी ही ख़ुशी ना खोजें । ये खुद गर्जी है और खुद गर्ज इंसान सिर्फ दुसरो को टेंशन देता है। अब आप खुद ही सोच लो की आप अपने लाइफ पार्टनर के लिए टेशन बनना चाहते हो या शकुन ?  


आत्म विश्वास का स्तर जितना अधिक होगा सक्सेस भी उतनी ही बड़ी होगी !!!



Image result for aatmvishwas kaise badhayeदोस्तों अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी क्षमताओं और अपनी कामयाबी पर विश्वास होना अनिवार्य है ! जो लोग कठिन से कठिन कार्य के लिए भी द्रढ़ संकल्प व खुद पर विश्वास करते हैं , वे प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना लेते हैं । और जिन को अपनी योग्यता पर संसय रहती है ,विश्वास डामाडोल रहता है उन्हें तो हर कार्य में  असफलता ही हाथ  लगेगी । कहते हैं -

    " विश्वास संकट का साथी  है"    


आत्मविश्वास  इंसान को समस्याओं  व बाधाओं से निबटने में सक्षम बनाता है । इसलिए अपनी नाकामयाबी पर हताश न हो और ना ही अपने विश्वास को कमजोर पड़ने दें । 

आत्मविश्वास की शक्ति को दोहन करने की आवश्यकता है :- जब आप अपने आत्मविश्वास की शक्ति का दोहन करोगे तो पता चलेगा कि जो आप अब तक आम इंसान बनें हुए थे वो सिर्फ आत्मविश्वास की  कमी से बने हुए थे। आत्मविश्वासी लोग अपने को कमजोर या अभागा नही मानते । जो इंसान अपनी समस्याओं के सरूप को समझकर उनके निवारण में लग जाता है वही इंसान  है आत्मविश्वासी कहलाता है ।  

आत्मविश्वास से पग पग पर आशा ,सुरक्षा ,निर्माण व अद्रश्य शक्ति का अनुभव होने लगता है । और खुद पर दिनों दिन विश्वास बढ़ने लगता है । 

आत्मविश्वास से ही सक्सेस की सीढ़ी चढ़ सकते हो :-ये मत सोचो की लोग आपका सपोट करें, तब आप कुछ कर सकते हो। ये सोचो की मुझे अपने बल पर ही करना है । योग्यता ,साहस और द्रढ़ इच्छा से ही आप कुछ कर सकते हो। जो बोलते हो हमेशा वो ही कार्य करो । जिनकी कथनी और करनी में फर्क होता है, उन पर ना कोई विश्वास करता है और ना समाज में उनकी कोई वेल्यु  होती है ।धर्म गर्न्थो में बताया है - 

" आपके अंदर अनन्त शक्ति भरी पड़ी है जिसकी आपको खबर नही है जिस दिन आपको उसका पता चलेगा उस दिन आप सफल हो जाओगे । और शक्ति आपके अंदर ही नही सब के अंदर है सिर्फ इसे पहंचाने की जरूरत है "  

जिन्हें खुद पर विश्वास होता है वे ही समाज में अलग मुकाम हासिल करते हैं :- आप पर कोई विश्वास करे या ना करे आपको खुद पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए । थामस अलावा एडिस ने १०,००० बार असफल होने पर भी अपना विश्वास नही खोया था । बल्कि उनका कहना था कि मेने १० हजार  तरीके खोजे हैं  जिनसे ये कार्य  सकते । 

ज्यादतर लोग परेशान होकर  प्रयास  करना बन्द कर  देते हैं । जब की जितना बड़ा काम  होग्स उतनी समस्याएं आएगी, परेशानी रहेगी । खुद पर विश्वास करो और कार्य में जुटे रहो । अगर आपको खुद पर विश्वास है तो दुनिया वाले कितने ही आज अदाएं ,कितना डिमोटिवेट करें आप अपने कार्य में सक्सेस हो कर रहेगें । और अगर आपको खुद पर विश्वास नही हैं, तो  लोग आपका कितना ही स्पॉट करें , कितना ही मोटिवेट करें, आप सक्सेस नही हो सकते ।  

आपका आत्मविश्वास जितना अधिक होगा, आपकी योग्यता भी उतनी ही  निखर कर सामने आएंगी  :- एक योग्य इंसान आत्मविश्वास से भरा होता है । छोटी छोटी बातो पर ना बिगड़े इससे  आपकी छवि बिगडती है । जीतते तो वही हैं जो  खुद पर  भरोसा रखते हैं । 

"मैकडोनलस का विचार 52 वर्ष की उम्र में आया था । उन्होंने अपने विचार पर व स्वयं पर विश्वास किया "  

आज वो  कामयाब हैं और इतना कमा रहे हैं कि - 5 हजार करोड़ साल का दान करते हैं ।  अपने कार्य में तब तक लगे रहो जब आप कामयाब नही हो जाते। ट्राई अगेन ट्राई अगेन । हर कार्य में पहली बार में ही सफलता नही मिल जाती । 

"स्टीफन की पहली पुस्तक 'केरी '30 बार ख़ारिज कर दी गई थी, और उसे उठाकर रद्दी में फेंक दी थी । उनकी पत्नी ने हर बार उठाकर आगे दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया । आज ये बुक इतिहास में दर्ज हो चुकी है और इसकी ३५००० हजार प्रतिया से ज्यादा बिक चुकी हैं । खुद पर विश्वास रखो धैर्य रखो और अपना प्रयास जारी रखो "   








Friday, September 2, 2016

कई बुजर्ग क्यों नही रह पाते अपने बच्चो से खुश ?

        
Image result for dukhi bujurgदोस्तों ! इस टॉपिक पर लिखने की जरूरत क्यों पड़ी ? आज हम हर फिल्ड में सक्सेस है लेकिन कही ना कही ज्यातर हमारे बुजर्ग हमसे असन्तुष्ट हैं ऐसा क्यों ? क्या हमारी जनरेशन वास्तव में केयरलेश व अनुशासन हीन है ? क्या वास्तव में हम अपने बुजर्गो की सेवा नही करना चाहते ? नही 'दोस्तों! ऐसा नही है! मेंरा मानना है की हमारी पीढ़ी पहले से कई गुना अधिक सिंसियर व गम्भीर है रिस्तो को लेकर भी और कॅरियर को लेकर भी । बुजर्गो  का सन्तुष्ट ना रहने के कई कारण हैं -

नैगेटिव सोच :-  कई बुजर्गो ने जो भी अपने बच्चो के लिए किया उसे अपना प्यार या फर्ज ना मानकर अहसान मानते हैं । उनकी सोच से बच्चो को पालने में जितने भी कष्ट उन्होंने उठाये हैं, उन्होंने उनके लिए अपनी जेब काटी है  , उनकी सुविधओं के लिए कड़ी मेहनत की है , जिससे की बच्चे सुखी रहें व बुढ़ापे का सहारा बने । लेकिन जब बच्चे उनकी उम्मीदों पर खरे नही उतरते तो वे बच्चो को  अहसान फरामोश मानते हैं ।  

बदलाव को स्वीकार ना कर  पाना :- बुजर्ग लोग समाज में आ रहे बदलाव को स्वीकार नही कर पा रहे हैं।  इसलिए युवा पीढ़ी को दोसी मानते हैं । बच्चो की तर्क पूर्ण बातो को वे अपना अपमान व निरादर समझते  है। उन्हें लगता हमारे बच्चे परम्परागत तरीके से हमारी सेवा व रिस्पेक्ट नही करते । बुजर्गो के अनुसार आज की पीढ़ी अधिक स्वछंद व अनुशासन हीन हो गई है । जब की परिवर्तन प्रकृति का नियम है। प्रत्येक परिवर्तन में कुछ अच्छाइयां तो कुछ बुराइयां आती ही हैं। परिवर्तन से  समझौता कर के ही  बुजर्ग व युवा पीढ़ी खुश रह सकती  हैं ।   

बच्चो के हित में डिशिजन ना लेना :- बुजर्गो के लिए ये जरूरी है कि  वे सिर्फ अपने हित की ना सोचकर, बच्चो के हित में डिशिजन लें।  जिससे उनका भविष्य में कोई नुकसान ना हो। 

बच्चो का लालच :- कई बच्चे बुजर्गो की संपत्ति तो लेना चाहते हैं लेकिन उनकी बुढ़ापे में देखभाल नही करना चाहते । वे लोग ये भूल जाते हैं कि कल हमे भी बुढ्ढा होना है। ये समस्या एकाकी परिवार की वजह से भी बन रही है, आगे और ज्यादा बनेगी। पहले संयुक्त परिवार थे खेती बाड़ी का काम अधिक करते थे । परिवार में कई लोग होते थे उनमे से कोई बाहर चला जाता था तो कोई घर में रहकर घरवालो को सभांल लेता था । आज एक-२  दो- बच्चे हैं। खेती बाड़ी में गुजारा नही है, इसलिए बच्चो को बड़े होकर रोजगार के लिए बाहर निकलना पड़ता है। और बुजर्ग अपना घर , गांव व शहर नही छोड़ना चाहते । जिसकी वजह से रिस्तो में टेशन क्रीएट होती ही है ।   

प्रोपर्टी के घमंड में बच्चो को अहमियत ना देना :- कई घरो में जब बेटा कामयाब नही होता,   और बाप कामयाब होता है  या बाप बेटे से ज्यादा कमा रहा होता है । तो ऐसी स्थिति में भी बुजर्ग माँ बाप की सेवा अच्छी तरह नही हो पाती। क्यों कि माँ बाप अपनी कामयाबी के चलते, बच्चो को अहमियत नही देते । बच्चे माँ बाप की प्रोपर्टी पर ध्यान रखते है और माँ बाप जीते जी अपने बच्चो को अधिकार देना नही चाहते ।  

अतीत में डूबे रहना :- कई घरो में माँ बाप अतीत में डूबे  रहते हैं कि हमने अपने बुजर्गो की अच्छी सेवा की, हम उनके सामने बोलते भी नही थे, हम पुरे परिवार  को साथ लेकर चले, हमने थोड़े में गुजारा  किया , हमने इतने बच्चे पाले। ..... आदि ये बाते भी क्लेश का कारण बनती हैं ।  
  
एक बेटे पर सारी  जिम्मेदारी  डाल देना :-  कई बुजर्ग जब एक बेटा कमा रहा होता है तो सारी जिम्मेदारी उसी पर डाल देते हैं । जिसकी वजह से फिर और बच्चे अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह से नही निभाते । और माँ बाप सोचते हैं कि उनके परिवार की जिम्मेदारी ये ही निभाएं या इन्हें हर तरह बराबर लेकर चलें । जब की ये मुमकिन नही है जिसकी   कमाई होती है उतना ही उसका खर्चा व समाज में रहन सहन का स्तर बढ़ जाता है उसे फिर उसी हिसाब से सब कुछ करना व रहना पड़ता है । 

बच्चो में फर्क करना :- देखो दोस्तों कोई भी माँ बाप अपने बच्चो में फर्क नही करता लेकिन बच्चो के मन में ये जरूर आ जाता है । जब एक अच्छी तरह कम रहा हो और दूसरा कुछ खास नही करता हो तो फिर दोनों के बिच में फर्क आ ही जाता है दोनों को अपनी कमाई के अनुसार करना रहना होता है । लेकिन माँ बाप चाहते हैं की ये बराबर लेकर चले जब की ऐसा नही हो पाता ।  




Thursday, September 1, 2016

समय के पाबंद व्यक्ति का व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है ।




Image result for samay ka pabandदोस्तों!जो लोग समय के अनुसार चलते हैं , समय का सदुपयोग करते हैं, वे ही जीवन में तरक्की करते हैं। दस मिनट पहले तैयार होकर जाने वाले लोग कई भाग दौड़ व परेशानियों से बच जाते हैं। और जिंदगी की हर दौड़ में आगे रहते हैं। मोहमद अली ने कहा था  

" एक इंसान के रूप में जितना सम्पूर्ण होता है अपने आप को उतना ही   साबित करने की आवश्यकता कम पड़ती  है " 

सोचने के लिए समय निकालें  और जो कार्य जरूरी हैं उनकी लिस्ट बनाएं :-हमे क्या करना है ? क्या कर  रहे हैं ? और क्या करना चाहिए ? इन  बातो पर जरूर ध्यान देना चहिये । जब आप जरूरी कार्यो की लिस्ट बनाओगे तो आपका ध्यान उन कार्यो पर होगा जो आपके लिए अनिवार्य हैं । और आप उन कार्यो को छोड़ दोगे जो आपका समय बर्बाद करते हैं । इससे आपके पास काफी समय बचेगा । समय प्रबंधन कोई जादु नही है  समय प्रबन्ध का अभ्यास इंसान को सम्पूर्ण बनाता है । और जब हम समय मैनेजमेंट सीख लेते हैं  तो हम समय का सदुपयोग करने लगते हैं । और हर पल की अहमियत समझने लगते हैं ।  

जो भी कार्य करें प्लांनिग से करें :-हमारी योग्यता का सही से उपयोग हो इसके लिए हमारी प्लानिग  भी उसी तरह की होनी चाहिए । जिससे की हमे  सही नतीजे प्राप्त हो, हमे अपनी योग्यता को पहचानना आना चाहिए ।  हमारी किस चीज में रूचि  है ? हम क्या कर सकते हैं ? और उसे बेहतर करने के लिए क्या कर  सकते हैं ? इसके बाद किस कार्य को करने के लिए कितना समय देना जरूरी है ? उतना समय दें । जिस चीज में आपकी   रूचि  है आप उसे  किये जाते हैं । लेकिन अपनी कमियों को ढूढ़कर उन्हें सुधारना  भी चाहिए ।    
                                   
समय के महत्व को समझें :- कई लोगो  को  कहते  सुना होगा कि  हमारे पास समय नही  है।  किसी के लिए ये सत्य है और किसी के लिए महज बहाना । जिन कार्यो में हमारी रूचि  होती है, उन कार्यो के लिए समय निकाल ही लेते हैं । समय तो सब के पास में चौबीस घण्टे ही हैं, ये आपके हाथ में है आप कितना क्वालटी से यूज करते हो कितना वेस्ट करते हो।  जब तक आप कार्य में पर्याप्त समय नही देगें, तब तक आप अपने लक्ष्य  तक पहुँचने में  विलम्ब करते रहोगे। खाली बैठने का मतलब है समय की बर्बादी के  साथ साथ खुद की  बर्बादी । ये किसी को भी  नही पता कि आपका भविष्य कैसा होगा ?  एक बात निश्चित  है  जब आप बड़ा सोचोगे ,बड़े सपने देखोगें, कड़ी मेहनत करोगें तो जरूर कुछ अच्छा पाओगे । सही कहा किसी ने - 

        "निम्न स्तर  की कीमत पर कोई विजय संभव नही होती "  

 हमे ये जरूर सोचना चाहिए कि हम अपना समय उन्हीं गतिविधियों में लगाए, जो हमारे लिए जरूरी है । हमे अपना 70 प्रतिशत  से 80 प्रतिशत तक का समय ऐसे कार्यो में लगाना चाहिए जो हमारी योग्यता व  प्रतिभा को निखारे । ये जो अनमोल  जिदगी  मिली है, इसे बेवजह  की चीजों में बर्बाद ना करें । 


सुनहरे भविष्य के लिए वक्त का इंतजार ना करें :- जो लोग समय का इंतजार करते हैं, वे लोग  इंतजार  ही करते रह जाते हैं । जो लोग कहते हैं सब ठीक हो जायेगा, समय का इंतजार करो। ये सोच उन्हें आलसी बना देती है। आलस्य सफलता का सब से बड़ा दुश्मन है । किसी ने सही कहा है कि - 

"हम अतीत को तो नही बदल सकते लेकिन अपनी गलतियों को सुधारकर आगे सफलता की दौड़ के लिए तैयार हो सकते हैं । जीतता तो वही  है जो शिखर तक पहुँचने के लिए दौड़ में शामिल होता है ।  

हर दिन नई शुरुआत लेकर आता हैं :-


" कोई व्यक्ति अतीत में जाकर तो शुरुआत नही कर सकता, लेकिन कोई भी व्यक्ति अभी शुरुआत कर सकता है| और एक नया अंत प्राप्त कर सकता है "

              -कार्ल बार्ड 

मेरा कुछ  नही  हो सकता , में थक गया हूँ ,मेरी जिदगी में कुछ नही है, मेरी किस्मत कभी साथ नही देती , मेरी जिदगी में कभी ख़ुशी नही आ सकती। .....  ऐसे  नैगेटिव शब्दो को भुलाकर जिदगी की नई शुरुआत करें हर रोज सूरज की पहली किरण आशा और उमीद लेकर आती है । अतीत को भूलना असंभव है लेकिन अपने जीवन के घोर अँधेरे और असफलता को बदलने की कोशिश जरूर कर सकते हैं । पुरानी गलतियों से सीख लेकर जो नए सिरे से चलता है उसे शुरुआत तो पहले कदम से ही करनी  है । उठो सब कुछ भुलाकर अपना पहला कदम उठाओ । नया  दिन आपका इंतजार कर  रहा है और आप आज तक बहुत समय बर्बाद कर  चुके हो । 


समय का पाबंद होना सीखें :-आपको अपने साथ साथ अपने दोस्तों को भी समय का पाबन्द होना सिखाना होगा|  नही तो ये लोग आपके गोल्डन समय को नष्ट कर देगें। लेकिन इन्हें सीखाने से पहले खुद टालमटोल की आदत को बदलना होगा । कोई भी इंसान सीखाने से ज्यादा  देखकर सीखता है । समय प्रबंधन से इस समस्या का समाधान कर सकते हैं । जिसे आप थोड़ी सी मेहनत से सीख सकते हो। टाइम मैनेजमेंट की सबसे सही बात यही  कि हर काम तेजी के साथ साथ सही तरीके से होता है। अगर आप पूरी योजना बनाकर चलें तो दिन में तय किये हुए सभी कार्य आसानी से पुरे होते हैं । 


कोई भी कार्य कल पर टालने की बजाए आज और अभी करने में विश्वास रखें :- किसी कार्य को करने का एक निश्चित समय होता है । अगर उसे समय से नही किया जाये तो कई चीजें प्रभावित होती हैं । और जो कार्य आप कल पर टाल रहे हो, उस कार्य के होने की कोई गारन्टी नही है । या फिर आपके अंदर उस कार्य को करने का जज्बा ही नही हैं। काम को टालने का मतलब है - अपनी साख व  विश्वास खो देना । जब हम किसी काम को लटकाये जाते हैं तो फिर एक समय के अंतराल वो हमारे सर पर तलवार की तरह लटक जाता है । और समय निकल जाने पर जब काम को करोगे तो उसकी क्वालटी पर असर जरूर पड़ेगा । अगर आपको काम लटकाने की आदत बन चुकी है तो सावधान आपको इसका खामयाजा भी भुगतना पड़ सकता है ।  

समय को पकड़ कर रखें :-जैसे बूंद -२ से घड़ा खाली हो जाता है उसी तरह पल -२ से जीवन घटता चला जाता है । समय ही जीवन है इस का सदुपयोग करें । वरना एक दिन जीवन ही बर्बाद हो जायेगा । जो लोग दायित्वों व दिनचर्या के चलते समय का सही  सदुपयोग करते हैं वे निश्चय ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं । अगर आप कहते हो देर करना नही चाहते देर हो जाती है । तो आपने ये सोचा है देर क्यों हो जाती है ?अगर आप देर का पता लगा लें और सचेत हो जाएं  तो तुरन्त  छोड़ कर अन्य कार्य के पाबंद हो जाएंगे । इस आदत को बदलने की  पहली शर्त यही है की आप समय के पाबन्द हो जाएं । 
  




        

Wednesday, August 31, 2016

सक्सेस का कोई शॉटकट नही।

                   
Image result for shi marg chuneदोस्तों ! जीवन में कभी भी शॉटकट से सक्सेस नही मिल सकती और मिल भी गई, तो वो आपके पास ज्यादा दिन नही टिक सकती इससे सिर्फ बदनामी व नाकामयाबी ही हाथ लगती है । 

पर सही रह पर चलना जितना जरूरी है उतना ही कठिन भी है। आप किसी भी जगह जाओ वहा आपको नेकी व सदाचार से भटकने वाले व भृमित करने वाले मिल ही  जाएंगे। इसलिए सही मार्ग पर चलने वालो को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।द्रढ़ संकल्प से ही सक्सेस तक पहुंच पाते हैं ।  

आदिकाल में भी हैवानी शक्तियां, दैवीक शक्तियों पर हावी होने की कोशिस करती थी । आज भी समाज में, कार्यस्थल ,प्रफोशनल दायरों में कार्य, योग्यता ,अनुभव ,निष्ठा आदि अयोग्य व्यक्ति दुवारा जोड़तोड़ से उच्च पद  हथयाने ,झूठ फरेब से वा वाही लूटते देखकर नेक व्यक्ति का मन विचलित हो जाता है। 

एक ही बात मन में आती है कि क्या भगवान इन्हें नही देख रहा ? क्या गलत होते हुए को परमात्म नही रोक सकता ? इन्हें सजा क्यों नही मिल रही। ईश्वर ने तो सभी को अपना मार्ग चुनने की आजादी दी है । अब वो आपके हाथ में है आप उसे विवेक पूर्ण सही चुनते हो या गलत । जैसा चुनोगे वैसा ही फल भोगों गे। विचारक खलील कहते हैं कि -

" मैने निर्दयियों से दया सीखी है अधीर लोगो से धैर्य सीखा है और बातूनी लोगो से मौन रहना सीखा है " 

तुलसी दास  जी  ने भी रामायण में  देवी देवताओं के साथ उनलोगों को भी प्रणाम किया है जिन्हें पर पीड़ा में आनंद आता है । 

अगर जीवन में आगे बढ़ना चाहते हो तो विघ्नकारियो के प्रति मन में दुवेश,  घृणा, शत्रुता का भाव ना रखें । और ना ही विघ्नकारियो की कुचेष्ठाओं में उलझकर मन को डावाडोल करें । इससे हमारी ऊर्जा निष्फल कार्य में खर्च होगी और हम अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर नही हो पाएंगे । 


हमें अर्जुन  की तरह लक्ष्य पर एकाग्र होना चाहिए । एकाग्रता से ही लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित हो सकता है । एकाग्रता की स्थिति पाने के लिए हमे अंतर्मुखी बनना चाहिए । तभी हम सही दिशा चुन सकेंगे, और सही रह पर चलने से ही सफलता आपको  मिल सकेगी ।