Friday, April 21, 2017

जीवन में कामयाबी "कर्म" से मिलती है या किस्मत से ?



Image result for kamyabi mehnt se milti hai ya karm se ?दोस्तों ! सदियों से बहस चली आ रही है कि इंसान को कर्म से कामयाबी मिलती है या किस्मत  से ? | कर्म को मानने वाले  लोग कहते हैं कि किस्मत कुछ भी नहीं है|  जीवन में अगर कुछ हासिल करना है तो कर्म करना ही पड़ेगा | और कहा भी गया है कि -

" जग सारा कर्म क्षेत्र है , जीवन है संग्राम | विजय श्री वही पाएंगे जो करेंगा का काम   " 

मंजिल पर वही पहुंचते हैं जो लक्ष्य बना कर उस पर चलते हैं | बस खुद को जानना है कि  हमारी मंजिल कहा है ? हम खुद क्या चाहते हैं ? और जो चाहते हो वो करो उसी कार्य में आपको सक्सेस मिलेगी | और आज तक जो लोग कामयाब कहलाये गए हैं वे वही लोग हैं जिन्होने अपनी पसंद की फिल्ड चुनी और उसी में अपना कैरियर बनाया | उस काम को उन्होंने इंजॉय किया | जगदीश भारद्वाज कथा वाचक का कहना है कि -

" राज तु अपनी हकीकत का अगर पा जायेगा ,जिंदगी जीने का मजा आ जायेगा " 

लेकिन भाग्य का समर्थन करने वाले कहते हैं कि इंसान की किस्मत में जो लिखा है वही होकर रहेगा | उसे कोई नहीं बदल सकता | और जगदीश भारदूआज जी का कहना है कि -

         " होनी होकर के रहे , होनी से सब हारे " 

एक तरफ श्री राम जी  के तिलक की तैयारी हो रही थी दूसरी तरफ उन्हें वनवास हुआ | इसलिए जो लिखा होता है वही होकर रहता है | वैसे ही हालात बनते जाते हैं और वैसी ही इंसान की बुद्धि बन जाती है | 

दोस्तों ! मेरा मानना है कि दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं 'भग्य' के बिना 'कर्म' नही फलता और कर्म के बिना भाग्य साथ नहीं देता | लेकिन अगर हमारे भाग्य में भूखा रहना लिखा है तो कर्म करके पेट तो भर ही सकते हैं कम से कम भीख मांगने से तो बच  ही जाएंगे | भिखारियों से तो जिंदगी अच्छी होगी | 

भगवान श्री कृष्ण जी ने भी श्री मद भागवत में कर्म को ही प्रधान बताया है| कर्म प्रधान पूरी द्रढ़ता ,हिम्मत और उत्साह से  हंसते खेलते अपनी मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करते हैं | और आलसी लोग  किस्मत हालत समय व लोगो को दोषी ठहराकर असफलता व गरीबी से समझौता करके बैठ जाते  हैं |जबकि भगवान ने हर इंसान को सोचने समझने की शक्ति दी है जिससे वह सोच समझकर अपने अनुभवों के आधार पर सही गलत का निर्णय लेकर सही रस्ते का चुनाव कर के आगे बढ़ सकता  |  

कई युवा सोचते है कि बिना मेहनत करे सब कुछ हासिल हो जाए|  इसलिए अपनी कुंडली दिखाते हैं, ग्रह दशा दिखा कर पूजा पाठ कराते हैं | जबकि कहा गया है कि - 

" जीवन में संतुलित रहे धर्म, अर्थ और काम | इनका संतुलन जहां बिगड़ा वही बिगड़ा काम " 

जबकि कुंडली व ग्रह दशा का तो कोई जिक्र ही नहीं आया | लेकिन पूजा करना अच्छी बात है भगवान से आशीर्वाद लो लेकिन किस्मत के भरोशे रहकर कर्म से मत भटको | पूजा का  फल मिलता है इसी लिए हमारे धर्म शास्त्रों में भी पूजा पाठ का विधान बतलाया गया है| पूजा पाठ से आत्मविश्वास बढ़ता है  और आत्मविश्वास  से हारी बाजी भी इंसान जीत जाता है | और कहा भी गया है कि -

" तुलसी भरोषे राम के ,निर्भय होकर सो | होनी होकर के रहे अनहोनी टल जाये "

लेकिन इंसान को कर्म करते रहना चाहिए क्यु कि कर्म से भाग्य बनता है | इंसान कर्म करके ही कामयाब हो सकता है | इसलिए कहा गया है कि भाग्य भी उन्ही लोगो का साथ देता है जो कर्म करते हैं | कहते हैं कि -

" ख्वाहिशो से नहीं गिरते फूल झोली में , कर्म की साखा को हिलाना पड़ता है | कुछ नहीं होता अँधेरे को कोसने से अपने हिस्से का दिया जलाना पड़ता है  " 


Thursday, April 20, 2017

सक्सेस के चार स्तम्भ हैं !!!


Image result for four pillarsदोस्तों ! जितने हम सक्सेस होते जाते हैं उतना ही  हमारा सामजिक दायरा बढ़ता जाता है| और  जितना हमारा सामाजिक दायरा बढ़ता है उतने ही हम बीजी होते चले जाते हैं | और जितना हमारा सीडुल्य बीजी रहता है उतना ही हम कम समय अपने लक्ष्य पर दें पाते हैं | जबकि ये  जरूरी है कि हमारा फोकस लक्ष्य पर हो | अब  आप बताइये कि अपनी फिल्ड में  सक्सेस के  लिए क्या- क्या  अनिवार्य है   ? 

क्या हम किसी एक चीज को फॉलो करके सक्सेस हो सकते हैं ? क्या एक खूबी हमे सक्सेस बना सकती है ? 'नही दोस्तों ' हमारी एक खूबी किसी भी फीड में सक्सेस नही दिला सकती । सक्सेस के लिए निपुणता जरूरी है जब तक आप के अंदर एक भी कमी है तब तक आप सक्सेस नही हो सकते । सक्सेस के लिए कई चीजों का होना अनिवार्य है जैसे -

जिद्दी होना 1 :- किसी भी कार्य में सक्सेस होने के लिए सक्सेस होने की जिद्द  होना अनिवार्य है |  जिद्द  ही आपको सक्सेस की राह दिखाती  है । जिद्दी इंसान बाकि लोगो से कुछ हटकर होता है । उसे जीतने की जिद होती है उसे अपने लक्ष्य के सिवाय अपनी मंजिल के सिवाय कुछ और नही दिखाई देता। जब तक किसी लक्ष्य को पाने की, किसी मंजिल तक पहुचने की जिद नही होगी, तब तक उस लक्ष्य तक पहुंचा ही नही जा सकता । आप किसी भी सक्सेस इंसान को देख लो आज वो जिस मुकाम पर है वहा तक पहुंचने के लिए उन्होंने खुद से जिद की थी । वे उसी जिद्द की बदौलत बुलंदियों तक पहुंचे हैं । दुनियां में आज तक जो भी बड़े परिवर्तन होते हैं वे किसी ना किसी की जिद की वजह से होते हैं । जब इंसान के अंदर जिद आ जाये तो फिर उसे कोई भी मुश्किल कोई भी समस्या या कोई भी असफलता रोक नही पाती। जिद्दी व्यक्ति जो चाहता है उसे  पा कर  ही रहता। 

कड़ी मेहनत 2 :-अगर जीवन में कामयाब होना है तो लगातार कड़ी मेहनत करनी ही होगी | उसमे एफर्ट डालना ही होगा और बेस्ट काम करना है तो बेस्ट एफर्ट डालना होगा | जितना अधिक एफर्ट डालोगे उतना अच्छा काम होगा | जिंदगी में कामयाब होना है तो लगातार एफर्ट लगाना पड़ेगा |  एफर्ट  के बिना प्लांनिग धरी की धरि रह जाती हैं । आप जो भी कार्य करते हैं उसे बेहतर करने की कोशिस करें| क्युकि एवरेज एफर्ट तो सभी लोग लगा रहे हैं | और ये ना भूलें की सक्सेस  कुछ कीमत देकर मिलती है और वह कीमत है कड़ी व लगातार महेनत और समय | विन्से लोम्बार्डी का  कहना है कि -

" कठिन परिश्रम वह कीमत होती है जो हमे सफलता प्राप्त करने के लिए चुकानी पड़ती है , मुझे लगता है अगर आप ये कीमत चूका सकते हैं तो आप कुछ भी पा सकते हैं " 

और कार्लिन पॉवेल का कहना है कि -

" कोई भी सपना जादू करके  हकीकत नहीं बन सकता इसमें पसीना ,दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत लगती "  

धैर्य 3 :- दोस्तों! अगर आप में धैर्य की कमी है तो आप सक्सेस होने से पहले ही पलायन कर जाओगे जिसकी वजह से आप काबिल होते हुए भी सक्सेस का रस नही चख पाओगें । लेकिन सक्सेस चाहने वालो को धैर्य रखना कठिन लगता है | लेकिन धैर्य रखना होगा सही समय आने का इंतजार करना होगा | खुद को ये समझाना ही होगा कि जैसे  रातो रात कोई बिल्डिंग तैयार नहीं हो सकती उसी तरह रातो रात सक्सेस भी नहीं हो सकते |  कहते हैं कि -

" घर बनाने में महीने लगते हैं और महल बनाने में साल लगते हैं "

4 योग्यता  :- आप जो भी कार्य कर रहे हो अगर आपके अंदर वो योग्यता ही नही है तो आप सक्सेस नही हो पाओगे ।इसलिए आप जिस भी फिल्ड में काम कर रहें हैं उस की रिलेडिड ट्रेनिंग्स हमेशा लेते रहिये | अगर आप उन ट्रेनिंग्स को नहीं लेंगे तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि आप जिस फिल्ड के अंदर काम कर रहे हैं उसमे क्या क्या नयी चीजे डवलप हो रही हैं |    



Saturday, April 1, 2017

बड़ा बनना है तो बड़े सपने देखो !!!




Image result for jindgi me aage badne ke sutraदोस्तों !  आज युवा वर्ग का बड़ा सपना क्या है ? सिर्फ ये है कि  6 डिजिट में सैलरी हो , 4 वीलर गाड़ी हो , अच्छे दोस्त हो ,मन चाहा लाइफ पार्टनर हो ,  बड़ा सा  घर हो । कुछ और बड़ा सपना  है ? ' नही '

 ज्यादातर  लोग इतने को ही बड़ा  सपना मानते हैं । लेकिन नही ! दोस्तों ! ये बहुत छोटा सपना है । इसमें तो अपना घर परिवार, समाज भी सामिल नही है । फिर देश के लिए आप क्या कर सकोगे ?

 जब अपने परिवार या रिलेटिव को भी साथ लेकर नही चल सकते , तो आप और एक मजदूर में क्या फर्क रह गया ?  अपनी  जरूरतें तो मजदूर भी पूरी कर  लेता हैं, अपना परिवार तो वो भी पालता है । फिर आपने कौन सा बड़ा काम किया ? या कौन सा बड़ा सपना देखा ?  आपसे बड़े सपने तो फिर आतंकवादी ही देखते हैं कि मरना  है तो सैकड़ो को लेकर मरना है । और सैकड़ो को साथ लेकर मरते हैं।   

दोस्तों ! समाज की समस्या ही ये है कि जो कुछ अच्छा करना चाहते हैं वो बहुत छोटा सोचते हैं और छोटा कर पाते है । क्यों कि सही का साथ देने के लिए मजबूत आदमी निकल कर नही आते । और जो गलत सोचते हैं वो बहुत बड़ा सोचते हैं और गलत करते हैं और उनका साथ देने के लिए भी बहुत सारे लोग निकल आते हैं । तभी कहते हैं कि - 

" घास  बिना  बोए उगती है , और गुलाब को  उगाने  के लिए  माली को बहुत महेनत करनी पड़ती है "

लेकिन जो वेल्यु गुलाब की है वो घास की कभी नही हो सकती ।  बडी सोच पर टिके रहने में डर लगता है, थोड़ी ही देर में जोश ठंडा पड़ने लगता है , अपने मन से आवाज आने लगती है कि ये बहुत बड़ा है इतना करना मुशिकल है ना मुमकिन है।

ऐसा क्यों ? क्योंकि सालो से हमे छोटा सोचने की आदत बन चुकी है । छोटा सोचने की आदत को हमे बदलना होगा और ये तभी संभव है जब हम अपने मन की व बाहर से आने वाली नैगेटिव  आवाज को सुनना अवॉयड करेंगे। जब आप ऐसा करेंगे तो एक दिन आपको अंदर बाहर की नैगेटिव आवाज आनी भी बन्द हो जाएगी। और जो आपने सपना देखा है उसे हकीकत में बदलता हुआ देख पाएंगे।  d r apj अब्दुलकलाम जी ने बहुत अच्छी बात कही थी।

" सपने वो नही होते जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमे सोने नही देते "  

 जो सपने हम अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए देखते हैं, कुछ करने के लिए देखते हैं,समाज के उथान के लिए देखते हैं  वो सपने वास्तव में सोने नही देते। चौबीसों घन्टे वही सपने, उनकी प्लांनिग हमारे दिमाग में घूमते  रहते हैं।और तब तक रात दिन हमे शांति से नही बैठने देते जब तक हमारा सपना सच नही हो जाता। अनोनीमौस ने कहा है कि -

" जिन्हें सपने देखना अच्छा लगता है, उन्हें रात छोटी लगती है। जिन्हें सपने पूरे करना अच्छा लगता है, उन्हें  दिन छोटा लगता है "


जब हम किसी लक्ष्य की तरफ बढ़ते हैं तो अनेको समस्याएं आती हैं । लेकिन जब तक हर समस्या का समाधान नही मिल जाता तब तक हमारा दिमाग दौड़ता रहता है । दोस्तों ! दुनियां में ऐसी कोई चीज नही है जिसे आप चाहो और वो आपको ना मिले । बस हमारे सपने में जान होनी चाहिए उसके प्रति मन में जनून होना चाहिए। सपने के प्रति समर्पित होने चाहिए तभी आप अपने सपने को सच होते हुए देख सकते हो । 



हर अविष्कार किसी ना किसी का सपना रहा है। फिर एक दिन वह हकीकत बन के सामने आया है। जहाज बनाने का सपना राइट ब्रादर ने देखा ,बिजली का बल्ब बनाने का सपना थॉमस एडिसन ने देखा, रेल बनाने का सपना जेम्स वाट ने देखा, tv बनाने का सपना जान लाजी बायर्ड ने देखा, इंटरनेट का सपना विटेन कर्फ़ ने देखा । सुई से लेकर जहाज बनाने तक का  पहले सपना ही था । हर चीज का पहले सपना देखा गया फिर हकीकत बनी । 

और ये सभी सपने सच हुए। और सभी बड़े सपनो पर पहले दुनिया हंसी।और जब ये अविष्कार हुए तब दुनिया ने इन्हें माना और आज हर इंसान इन अविष्कारो का फायदा उठा रही है ।अविष्कारो से ही हमारी जिंदगी बदली है ।

1755 में एक प्रोफेसर ने फ्रिज का डिजाइन बनाया था उस पर किसी ने ध्यान नही दिया । बाद मे 1805 में oliver evans  एक अमरीकी अविष्कारक ने फ्रिज के बारे में बताया पर तरीका वही थालेकिन इसके बाद 1876 में  carl von linde  ने फ्रिज बनाने के तरीके को बेहतर बनाया ।समय के अनुसार सभी चीजो को बेहतर बनाया जा रहा है  


इसलिए दोस्तों ! जो भी आप सपने देखते हो उन पर विश्वास करो । उन्हें पूरा करने की कोशिस जरूर करो । क्या पता परमात्मा ने आपको किस अविष्कार के लिए या समाज के उथान के लिए दुनिया में भेजा है । 


सोचो आपकी हॉबी क्या है ? आप क्या  करते हुए खुद को भूल जाते हो ? क्या लाइफ में करना चाहते हो ? कुछ ना कुछ तो ऐसा जरूर होगा जिसे करके आपको ख़ुशी मिलती हो , जिसे करते हुए आप खुद को भूल जाते हो उसे जरूर करो। ज्यादा से ज्यादा समय उस कार्य को करने में लगाओ । 












Wednesday, March 29, 2017

जिंदगी में आगे बढ़ने के तीन सूत्र !!!




दोस्तों ! समय , हालात , इंसान या किस्मत को दोष देना बंद करो ।किस्मत के भरोषे रहकर आप जिंदगी में आगे नही बढ़ सकते । जिंदगी के भरोसे रहना मूर्खता होगी। रही संयोग की बात तो संयोग हर बार नही हो सकता। इसलिए अपनी कमियों को पहंचान कर सुधारते हुए  और लाइफ में आगे कैसे बढ़ सकते हैं ? ऐसा सोचते हुए आगे बढ़ो । ' जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए तीन सूत्र याद रखना। 

1 लक्ष्य स्पस्ट और सटीक रखें :- यदि  आपके लक्ष्य स्प्ष्ट हैं तो आप भटकाव से बच जाओगे ।  जैसे आप किसी बहुत भारी भीड़ में फंस गए हो और आपको ये पता है कि आप को कहा जाना है तो आप भीड़ की धक्का मुक्की में भी रास्ता नही भटकोगे। आप अपनी  राह की भीड़ को चीरते हुए  मंजिल पर पहुंच जाओगे । और अगर आपके लक्ष्य स्प्ष्ट नही है तो हो सकता है आप कोई गलत राह पकड़ लो आपको जाना कही और है और आप पहुंच कई और जाओ। फिर हो सकता है कि आप अपनी मंजिल पर कभी नही पहुंच पाओ ।  


2 एक बार मे एक से ज्यादा लक्ष्य ना बनाए :-  दोस्तों !  जब हम एक साथ कई कार्यो को शुरू कर देते हैं तो हम किसी भी कार्य में क्वालटी समय नही दे पाते। जिसके चलते हमारा कार्य पूरा तो हो सकता है लेकिन बहुत अच्छा नही हो सकता। आपने देखा भी होगा कि कई बार हम देखा देखी कई कार्य शुरू कर देते हैं और फिर पूरा ना कर पाने के कारण उन्हें बीच में ही छोड़ देते हैं। इसलिए एक बार में एक ही लक्ष्य बनाये और छोटे छोटे गोल बनाकर आगे बढ़े ।  

3 परेशानियों से घबराकर कार्य बीच में बंद ना करें :- दोस्तों !  लाइफ में जिस व्यक्ति ने आगे बढ़ कर कुछ कार्य किया है उसके मार्ग में परेशानियां तो आती ही हैं। उन्हें क्रिटिसाइज तो लोगो ने किया ही है लेकिन उन्होंने क्रिटिसाइज व परेशानियों को इग्नोर करके ही सक्सेस पाई है । जब तक आप परेशानियों के सामने घुटने टेकते रहोगे क्रिटिसाइज से बचने की कोशिस करते रहोगे तब तक आप लाइफ में आगे नही बढ़ सकते । नेगेटिव चर्चा के बारे में आप बहरे हो जाओ । आप नेगेटिव बातो को सुनना या सोचना ही बंद कर दो तभी लाइफ में आप आगे बढ़ सकते हो । 





Friday, March 3, 2017

भगवान को सिर्फ मंदिर ,गुरुदवारा ,मस्जिद ,चर्च मे नही मानवता में भी देखें !!!




दोस्तों ! मेरा बर्थ प्लेस  दिल्ली है।  मेरे पेरेंट्स उत्तर प्रदेश ( सिकन्द्राबाद ) से रहे हैं और में कापासेहड़ा में रह रही हूं इस लिए "मैने " दिल्ली , u.p , और हरियाणा के लोगो को करीब से जाना है । मैने हर जगह के इंसान में ज्यादातर एक ही खामी पाई है कि ये मंदिर मस्जिद ,गुरुद्वारा और मस्जिद में तो भगवान को देखते हैं लेकिन मानवता में भगवान को  नही  देख पाते । 

भगवान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा  व चर्च में  ही नही  बसते , भगवान सब के ह्रदय में भी बसते हैं । इसलिए हमे भगवान को भगवान की बनाई हुई सम्पूर्ण सृष्टि  में देखना चाहिए।  और  भगवान ने सबसे सुंदर रचना की  है मानव की। इसलिए हर इंसान में भगवान को देखना चाहिए। सब के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए । 


लेकिन हम करते क्या हैं ? मंदिर में  पुजा करते हैं और इंसान की अवेहलना करते हैं।  ऊँच नीच का फर्क करके इंसान को बाटते हैं  पैसे से व जाति से इंसान की तुलना करते हैं । मंदिर  मे चढ़ावा चढ़ाएंगे, कमरे बनवायेगे , आडंबर रचने वालो को पैसे देगें और किसी जरूरत मंद की मदद करने में मना कर देगें। ज्यातर लोगो से  किसी की मदद करने के लिए कहे तो एक जवाब मिलेगा  कि दुनियां गरीब है किस - किस की मदद करोगे ।

आप एक बात बताइये ?  कि क्या भगवान आपके चढावे का भूखा है ? क्या वास्तव में भगवान को आपके छपन भोग चाहिए ? क्या भगवान को आपके मंदिर की जरूरत है ? या क्या जो आप इन आडंबर रचने वालो को हजारो लाखो देते हो इन्हें आपके पैसे की जरूरत है ?  या उन गरीबो को आपकी जरूरत है, जिन्हें तीनो टाइम  का खाना भी  नही मिलता ,  उन गरीब बच्चो  को आपके पैसे जरूरत है जो जिंदगी में पढ़ना चाहते है, उन गरीब माँ बाप को पैसे की जरूरत है जिनके कई बेटियां हैं और वे उनकी शादी नही कर सकते ? 


दोस्तों ! मुझे नये नये मंदिर देखने का बहुत शौक है।  और मैने ज्यादातर मंदिर में बैठे पंड़ावों को एक बिजनिस मैने से भी ज्यादा कमाता या ये कहो की लुटता पाया है । चाहे आप गोवर्धन , तिरुपति बाला जी या काली कलकत्ता वाली आप कही भी चले जाओ। आपको दर्शन भी वही अच्छी तरह करने देगे जहाँ आप को बहुत अच्छी तरह से प्रसाद व  चढ़ावा चढ़ाते देखेंगे  । 


वाह रे हमारी सोच मंदिर मे भगवान की पथर की मूर्ति  के दर्शन करने के लिए हम हजारो रूपये खर्च कर देगे। और एक गरीब के रूप में भगवान हमारे सामने हैं हम उन्हें रोटी नही खिला सकते । गरीब कुछ बच्चो की पढ़ाई की जिम्मेदारी नही ले सकते, किसी गरीब की बेटी की शादी की जिम्मेदारी नही ले सकते। मंदिर में कमरा बनवाते हैं लेकिन किसी गरीब के एक कमरे का किराया माफ़ नही कर सकते ।

आज के दौर में ज्यादातर गुरुवो और तांत्रिको की लपेट में आकर अन्धविश्वासी बनते जा रहे हैं। हमारे धर्म शास्त्रो मे हर समस्या का समाधान मिलेगा। लेकिन इन्होंने हमे अपनी संस्क्रति से, धर्म शास्त्रों से दूर कर दिया है। इसी लिए हमारे जीवन की शांति भंग हो गई है ।

कोई इंसान जब सन्यास लेता है तो हरि भगति के लिए लेता है। लेकिन हम उसे भगवान बना देते हैं और सोचते हैं कि इसे दान देने से हमारी सारी समस्या खत्म हो जाएंगी। पर क्या ये हमारी समस्याओं को कम कर सकते हैं ? जो अपने बारे में नही जानते वो हमारा भविष्य बता सकते हैं ?क्या दुनियां में हम लोग ही परेशान हैं ? ' नही '  हमारी इस सोच का ये लोग फायदा उठाते हैं।  इससे हमारी समस्या तो खत्म नही होती लेकिन हमारा अधिक दान उन्हें पूरा भोगी बना देते हैं। और फिर इससे हमारे समाज में आसाराम जैसे पैदा होते हैं ।  

दोस्तों ! ऐसे लोगो  से प्रेरित होकर हम लोगो ने " श्याम सेवा समिति"  का गठन किया  है । 9 साल  मे अब तक हम 4 भागवत , 5 राम कथा , कई जरूरत मंद बच्चो की एजुकेशन व 16 गरीब लड़कियों की शादी करवा चुके हैं । इस कार्य में सैकड़ो लोग हमारे सहयोगी बन चुके हैं। और आपसे भी हम यही अपील करते हैं कि आप सभी मानवता में भगवान देखें , हर जरूरत मंद की  मदद करें ,  शास्त्रों का अध्यन करें , अपनी सस्कृति को बचाए । 



Friday, February 17, 2017

आदमी जो करना चाहता है और जो करता है, उसके बीच इतना बड़ा अंतर क्यों होता है ?

Image result for lakshya kaise banayeदोस्तों ! ऐसा लगता है जैसे कुछ लोगो का जन्म ऐसो आराम के लिए होता है। और कुछ लोग सिर्फ जीवन निर्वाह करने के लिए ही दुनियां में पैदा हुए हैं ऐसा क्यों ? अल्बर्ट से किसी ने पूछा कि - 

"आज आदमी के साथ सबसे दुखद बात क्या है ? अल्बर्ट कुछ मिनट मौन रहे और फिर बोले कि आदमी सोचता नही है "

दोस्तों ! अधिकतर देखा जाता हैं कि जब लोग कैरियर शुरू करते हैं । तब सभी के मन में सक्सेस होने का द्रढ़ विश्वास होता है। अगर उनसे उस समय पर पूछोगे की आप कामयाब होंगे ? तो अधिकतर लोगो का यही जवाब मिलेगा कि निशिचित तौर पर कामयाब होगे। आपने महसूस भी किया होगा कि उस समय उनकी आखों में चमक,जीवन के प्रति एक उत्सुकता ,जिज्ञासा व  आशा रहती है। 

लेकिन 65 वर्ष की आयु तक आते आते 100 में से सिर्फ1 व्यक्ति धनी  बनता है और चार आत्मनिर्भर होंते हैं। बाकि 95 जीवन में हार मान कर बैठ  जाते हैं । अब आप सोचिये की 100  में से सिर्फ 5 कामयाब क्यों रहे ? और इतने ज्यादा असफल क्यों रहे ? आदमी जो करना चाहता है और जो करता है, उसके बीच इतना बड़ा अंतर क्यों होता है ? 

जो आदमी पहले लक्ष्य निर्धारित करता है, लक्ष्य निर्धारित करके उसे पाने के लिए सोच समझकर आगे बढ़ता है। जो जानता है कि वह कहा जा रहा है ? और  उसे कहा जाना है ? वही आदमी सफल होता है। लेकिन 100  में से 5 लोग ही ऐसा करते हैं। लक्ष्य निर्धारित रने वाले व्यक्ति सफल होते हैं क्यों की उन्हें मालूम होता है कि किस दिशा में आगे बढ़ना है।  


आप ये देखते भी हो कि बहुत से लोग कड़ी मेहनत व ईमानदारी से काम करते हैं। फिर भी कोई खास मुकाम हासिल नही कर पाते। और कई लोग थोड़ी सी मेहनत से ही ऊचाइयों को छू लेते हैं। आपने गौर किया होगा कि जो आदमी सफल हुआ वो सफलता की दिशा में ही अग्रसर रहा और असफल व्यक्ति हमेशा असफलता की दिशा में ही काम करता रहा। 

ऐसा सिर्फ लक्ष्य निर्धारित ना करने की वजह से ही हुआ। बिना लक्ष्य के आप कही पहुचँ ही नही सकते। लक्ष्य विहीन लोग असफल हो जाते हैं । इसलिए ठोस व सार्थक लक्ष्य बनाए और उसी तरफ अग्रसर हों अनेको लक्ष्य बना कर मन को उसमे ना भटकाए। कार्य शील रहें । वैसे भी  - 

" हम अपनी क्षमता का 10 वा हिस्सा ही प्रयोग करते हैं'' 

जीवन को नियंत्रण करने के लिए अपनी सोच व विचारो पर नियंत्रण रखना चाहिए। हमारी सोच व विचार ही हमे सफलता सम्रद्धि की तरफ ले जाते हैं और विचार ही हमे असफलता और दरिद्रता की तरफ आकर्षति करते हैं । इसलिए सकरात्मक सोचने की आदत डालें । 

" आदमी के लिए सकारत्मक सोचने की बजाए नकारत्मक सोचना ज्यादा आसान होता है "


" नई आदतें आसानी से नही बनती और जब बन जाती हैं तो उम्र भर साथ चलती हैं "

में  the secret हिंदी में देख रही थी उसमे एक बहुत अच्छी बात कही कि -आदमी को अपनी जिदगी जिन्दादिली से जीना चाहिए। मूल्य चुकाए बिना हम कुछ भी हासिल नही कर सकते। हमे अपने मन से सभी अड़चनों व बेड़ियों को काट फेकना होगा और ये सोच कर  काम को आगे बढ़ाना होगा कि-

  "यही काम हमारे लिए दैवीय रूपसे निर्धारित है "

सभी सीमाएं, रेखाएं हमारी खुद की बनाई हुई हैं।  हमारे सामने कल्पनाओं से भी ज्यादा अवसर मौजूद हैं । हमे तमाम सक्रिनता व पूर्वग्राहों से ऊपर उठना होगा। अपनी कल्पना को खुली छूट दें अपने मस्तिक को ऊंची उड़ान भरने दे।  




व्यक्तित्व का विकाश कॉपी करने से नही होगा !!!

   
Image result for soch vichar in hindiदोस्तों ! आपके कर्म लोगो को बताते हैं कि आप क्या हैं। आपका क्या स्टेटस है, आपका क्या व्यक्तित्व है। कई लोगो को आपने देखा होगा कि वो डिगें बहुत हांकते हैं। अगर उनके शब्द कर्मो से मेच नही खाते  तो उनके कहने से लोगो पर असर नही होता। इसलिए जो बोलते हो वो करो। मतलब अपनी करनी कथनी एक रखो इसी से आपके व्यक्तित्व ( पर्सनैल्टी ) का विकास होता है। 

डींग हाकने से कुछ दिन के लिए लोग बेकूफ़ बन सकते हैं। लेकिन हमेशा के लिए नही । एक ना एक दिन आपकी हकीकत दुनियां के सामने आ ही जाएगी। और अगर आपके शब्दो में सचाई नही है तो आपकी बॉडी लेंग्वेज भी साथ नही देगी। और फिर इससे लोगो का आप पर  भरोषा नही रहेगा  । 

अगर आप दुनियां के सामने अपना सबल व्यक्तिव (पर्सनैल्टी) बनाना चाहते हो तो उस के लिए खुद से कुछ सवाल करो । जैसे आप क्या करना चाहते  है ? क्या करना आपको अच्छा लगता है ? कैसे आप बनना चाहते हैं ? आप अपनी पहंचान कैसे लोगो में करवाना चाहते हैं? 


अगर आप  अपनी पहंचान एक समाज सेवक के रूप में चाहते हो तो ऐसे ही कार्य कीजिये। ऐसा तो नही हो सकता कि आप चाहते हो कि लोग आपको एक समाज सेवक रूप में जाने, और आप हो समाज के भक्षक । समाज सेवा तो तभी हो सकती है जब आप समाज के लिए अपना तन, मन. धन सब कुछ लगाओगे । और तभी और लोग भी आपका साथ देगे । 

लोग आपके बोलने से आपका अनुसरण नही करेंगे, आपके कर्मो का अनुसरण करेगे जैसे आप कार्य करते जायेगे वैसी ही प्रवर्ति के लोग आपसे जुड़ते जाएंगे आपने देखा भी होगा कि शराबी की दोस्ती शराबी से होगी और निभेगी । विरोधी सोच वाले इंसान के साथ कभी भी नही निभ सकती चाहे आप कितना भी किसी को समझाओ । 

 सुंदर कांड में लिखा है -

" सठ सन विनय कुटिल संग प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर रीती। ममता रत सन ज्ञान कहानी। अति लोभी सन बिरित बखानी। क्रोधी सम कामिहि हर कथा ऊसर बीज बोए फल जथा " 

अगर आप चाहते कुछ और हो करते कुछ और हो तो आपकी नेगेटिव छवि बनेगी। इसलिए जो चाहते हो वैसा करो उसके बारे में सोचो तभी आप लाइफ में आगे बढ़ सकते हो । हर इंसान में कोई ना कोई खूबी होती है और वो खूबी ही उस इंसान की पहंचान बन जाती है । इसलिए आप किसी की कॉपी करके उसके जैसे नही बन सकते । 

व्यक्तित्व विकाश  के लिए और कई बातो का ध्यान रखें जैसे- अपने ऊपर विश्वास रखें, समय के पाबंद बने, अपने पहनावे पर ध्यान दें , हैल्पफुल बनें , क्रटिसाइज ना करें, अपनी फिल्ड की पूरी जानकारी रखें , सयंमित रहें , सकारात्मक सोचें ।