Sunday, May 26, 2019

लीडर का सबसे महत्वपूर्ण काम यह है कि अच्छे लोगो को टीम में शामिल किया जाए और उन्हें टीम में बनाए रखा जाए| !!

अगर आप लोगो का मार्ग दर्शन करना चाहते हैं और उन्हें लीडर्स के रूप में विकसित करना चाहते हैं तो आपको ये काम करने होंगे -
1 उनके वास्तविक रूप की सराहना करना 2  विश्वास करना कि वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे 3 उनकी उपलब्धियों की सराहना करना 4  उनके लीडर के रूप में अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी को स्वीकार करना | 

लीडर को ये पता होना चाहिए कि टीम को एक सूत्र में कैसे बांधा जाता है ?कुछ लोगो को ऊपर कैसे उठाया जाता है और बाकियों को जब तक शांत कैसे किया जाता है ? जब तक की टीम अंतत एक ही शुर में न धड़कने लगे |

 में हमेशा तीन बातें कहता हूं : अगर कोई काम बिगड़ जाता है तो ये मैने किया है या मेरी वजह से बिगड़ा है | या कोई काम आधा अच्छा है तो हमने किया  है || अगर कोई काम वाकई अच्छा हुआ है  तो यह मेरे साथियों ने किया है | टीम जीतने के लिए इतने की  ही जरूरत  है | 

सर्वोच्च सफलता प्राप्त  वाले लीडर्स का अध्ययन करने पर यह पता चला  हैं कि उनमे एक चीज सामान होती है वे जानते हैं कि लीडर का सबसे महत्वपूर्ण काम यह है कि अच्छे लोगो को टीम में शामिल किया जाए और उन्हें टीम में बनाए रखा जाए | 

किसी संगठन में जो सम्प्पति सचमुच बढ़ती है वह उसके लोग हैं |सिस्टम पुराने पड़ जाते हैं| इमारतों में दरार पड़ जाती है ,मशीने घीस जाती हैं ,परंतु लोग प्रगति कर सकते हैं विकाश कर सकते हैं और अधिक प्रभावकारी बन सकते हैं  | 

परन्तु उनका लीडर ऐसा हो जो उनकी  क्षमता व  महत्व को समझता हो | सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप ये काम अकेले नही कर सकते | सफल लीडर बनना हैं तो आपको अपने आसपास दूसरे लीडर्स को तैयार करना होगा | आपको एक टीम बनानी होगी | आपको एक ऐसा तरीका खोजना होगा ,ताकि दूसरे आपकी भविष्य द्रष्टि को देखें ,उस पर अमल करें और उसे साकार करने में योगदान दें |

लीडर बड़ी तस्वीर देखता है ,परन्तु अपनी मानसिक तस्वीर को हकीकत में बदलने के लिए उसे दूसरे लीडर्स की जरूरत पड़ती है | ज्यादातर लीडर्स के पास अनुयायी होते हैं | वे मानते हैं कि बहुत से अनुयायी होना ही लीडरशिप की कुंजी है |

बहुत कम लीडर्स अपने आसपास दूसरे लीडर्स  को रखते हैं ,परन्तु जिन संगठनों के लीडर्स ऐसा करते हैं उन्हें बहुत फायदा होता है | इससे न सिर्फ ऐसे लीडर्स का बोझ हल्का होता है बल्कि सपना भी साकार हो जाता है और उस सपने का विस्तार भी होता है | 

दोस्तो ! ये सामरी जॉन सी. मैक्सवेल की बुक ' अपनी टीम के लीडर्स को विकसित कैसे करें'  की है  | 




Friday, May 24, 2019

आपका दोस्त आपका दुश्मन तो नहीं ?

दोस्तों ! आज में आप लोगो से एक खास टॉपिक शेयर कर रही हूँ जिसका मुख्य बिंदु है ' फ्रेरनेमी,शायद आप लोगो में से कुछ लोगो ने ये शब्द पहली बार ही सुना हो | इसका मतलब है दोस्त होकर दुश्मन का काम करना | अब आप समझ गये होंगे कि ये आर्टिकल किस तरह के बारे है |

दोस्त इंसान की पहंचान होते है कहते कि अगर इंसान के बारे में जानना है तो उसके चार मित्रो को मिलो वो वैसा ही होगा जैसे उसके चार मित्र होंगे | जैसा इंसान होता है वैसे ही उसके दोस्त होते हैं | अगर कर्म में फर्क मिल भी जाए तो सोच में फर्क नही मिल सकती | सोसायटी का असर जरूर पड़ता है | 

आज समज में तेजी से परिवर्तन आ रहा है | समाज व कार्यस्थल में कई लोग देखे जाते जिनकी सत्ता छोटे छोटे कई सिंहासन पर टिकी होती है जिसपर प्रभुत्व जताने के लिए रोज नई नई लड़ाई लड़नी पड़ती हैं | चाहे वह परिवार में खुद को बेहतर साबित करने की  बात हो या कार्य स्थल व दोस्तों को इंप्रेस करने का संघर्ष | 

ऐसी स्थति में लोग सीधी लड़ाई ना लड़ के पीठ पीछे बुराई करते हैं दोस्तों के वीक पॉइन्ट बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं | झूठ बोलकर समाज में उनका आत्म सम्मान छलनी करते हैं | और बहुत ही चालाकी से सामने मीठा बनकर अपना काम साधते हैं | उनका ये रवैया नकारत्मक है वे खुद से इतने अभिभूत हैं की दोस्तों को नीचा दिखाकर स्वयं को बेहतर सिद्ध करना चाहते हैं | इसके लिए वे दोस्तों को बैकहैंड कम्प्लीमेंट्स देते है ,जिससे वे ये जता सकें कि उनका स्तर उनके दोस्तों के स्तर से बहुत ऊंचा है | वे हमेशा आपकी उन्ही चीजों को निशाना बनाकर वार करते हैं जो आपके दिल के बहुत करीब हो | 

आप ये तो जानते ही हैं कि जब तक सच घर से बहार निकलता तब तक झूठ सारे शहर में ढिढोरा पीट आता है | जिसका खामयाजा उस इंसान को भुगतना पड़ता है जिसके बारे में झूठी अफवाह फैलाई गई है | एक तो वो पहले ही अपनी फिल्ड में सक्सेस के  लिए समस्याओं को झेल  रहा होता है दूसरे ऐसे लोग जो खुद अपनी लाइफ में कुछ नही कर पाए वे उसका श्रेय लेने के लिए झूठे आरोप लगा कर और समस्या खड़ी कर देते हैं | जिसकी वजह से उस इंसान को  बार -बार अपनी सफाई देनी पड़ती है | जिसकी वजह से वो सक्सेस नही पाता जो पा सकता था  | 
सच्चा दोस्त आपके सामने ही सरलता और सचाई से आपकी कमजोरी के बारे में बताएगा ,लेकिन फ़्रेनेमी उसी कमजोरी को डंके की चोट पर बताएगा जिससे ज्यादा लोगो को उसके दोस्त की कमजोरी के बारे में पता चल सकें और उसकी तुलना में वह फ़्रेनेमी बेहतर दिखे

दोस्तों आप अपने फ़्रेनेमी को अच्छी तरह पहंचान सकते हो | और सावधान हो सकते हो कहि वही दोस्त आपको दोस्ती की आड़ में मानसिक व शारीरिक रूप से चोट ना पहुंचा दे | दोस्त होकर लोग ऐसा काम क्यों करते हैं ? दोस्तों मेंने  कही पढ़ा था -

 " चार शराबी एक साथ रह सकते हैं ,चल सकते हैं, पर चार विद्धवान एक साथ नही रह सकते | क्यों ? क्यों कि शराबी को तिरस्कार मिलता है गालियां मिलती हैं जिन्हे वो दे सकते हैं | विद्वान् को सम्मान मिलता है और विद्वान सम्मान को बाटना नही चाहता | सम्मान की भूख सभी को होती है इसलिए जिसे नही मिला वो जबरदस्ती लेना चाहता है | जिसके चलते मन मुटाव होता इसलिए एक साथ नही रह सकते| 

 दुसरो के जैसा दिखने या बनने का लालच ही दोस्तों में ईर्ष्या पैदा करता है | जिसकी वजह से वह खुद को कमतर आंकता है | बेहतर दिखने या कहलाने के कारण ही ऐसा करता है | जबकि  कभी भी दुसरो के आदर्श रूप को प्रस्तुत नही करना चाहिए | 

हर एक इंसान को भगवान ने एक अलग हुनर से नवाजा है | किसी भी काम को सीख कर या डिग्री लेकर तुम नौकरी पा सकते हो लेकिन सक्सेस तो आपको हुनर से ही मिलेगी | और उस हुनर को देने वाला सिर्फ परमात्मा है | इसलिए जैसे हो वैसे ही खुद को स्वीकार करो खुद से प्रेम करो | जो हुनर परमात्मा ने आपको दिया है उस हुनर को तरासो  |  








Monday, May 13, 2019

भाग्य तो लगडा है इसे कर्म की बैसाखी से चलना पड़ता है!!!


" खुदी को कर बुलंद इतना ,खुदा जमी पर आकर, बंदे से पूछे ? बता तेरी रजा क्या है "

दोस्तों! मेहनत जीवन को निखारती है, सवारती है और इंसान को ऐसा गढ़ती है जिसकी प्रसंसा किये बिना कोई नही रह सकता । हर इंसान उसके जैसा बनना चाहता है। महेनती इंसान ही पथरों में फूल खिला सकता है | मेहनत से ही इंसान कामयाबी की उचाईयों को छू सकता है | मेहनत हमे आगे ही नही बढ़ाती बल्कि जीवन जीने का नया अंदाज सिखाती है।

"भागवत गीता में भी कर्म के ऊपर 80 श्लोक लिखे गए हैं | और प्रथम 6 अध्याय में कर्म  की ही व्याख्या की गई है | 

सर्व प्रथम स्थान कर्म को ही दिया गया हैं | किसी भी सपने को साकार करने की प्रथम जरूरत कर्म है | कर्म किये बिना सपना साकार नही होता | सपने देखना आसान है लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करना जरूरी  है | जो लोग कर्म प्रधान होते हैं वे लोग ही अपने सपने को साकार  कर पाते हैं | जब किसी सक्सेस इंसान को देखते हैं तो कहते हैं कि इसकी किस्मत अच्छी है। लेकिन दोस्तों किस्मत कुछ भी नही है सिर्फ मेहनत का फल है । सुरेश माली जी कहते हैं - 

"भाग्य तो लगडा है इसे कर्म की बैसाखी से चलना पड़ता है इसलिए भाग्य के भरोषे मत बैठिये "

मेहनत कर रहे हो तो एक दिन आपको सक्सेस का फल मिल ही जायेगा | किस्म्मत किसी की भी अच्छी नही होती किस्मत मेहनत से अच्छी बनाई जाती है | अगर लगातार मेहनत करते हैं तो किस्मत अच्छी बन जाती है | अगर आपने पूरी मेहनत नही की तो किस्मत खराब रह जाती है।

हाँ ऐसा हो सकता है कि मेहनत में आपको कम ज्यादा मिले । ये नही हो सकता कि आप पढ़ाई करो चार घन्टे और सपने देखो आई ए एस  बनने के । हाँ ये हो सकता है की आपने पढ़ाई की आई ए एस की और आप बन गए pcs । किसी भी फिल्ड में सक्सेस पाने के लिए अपने कार्य को चौबीस घंटे देने पड़ते हैं ,चौबीस घंटे देने का मतलब ये नही है की आप चौबीस घंटे काम करो, चौबीस घंटे का मतलब है कि दिमाग से सोचो,  मन से कल्पना करो, पूजी लगाओ और जितनी शरीर की मेहनत जरूरी है उतना मेहनत करो तभी जाकर आप सक्सेस हो सकोगे |  

"तुलसी दास जी ने 78 साल मेहनत की तब जाकर अपने अनुभव से रामयण लिखी" 

मैने अपने आसपास के कई लोगो को देखा है जिन्होंने अनपढ़  या थोड़े पढ़े लिखे होने पर भी अपनी मेहनत व अनुभव से लाइफ में बहुत कुछ अचीव किया है | अगर आप की अपने कार्य में श्रद्धा नही है अपने पर व परमात्मा पर विश्वास नही है तो आप अपने कार्य में कभी सक्सेस नही हो सकते  | 

दोस्तों ! सक्सेस का पढाई से कोई खास लेना देना नही है | सक्सेस का मतलब सिर्फ अपनी फिल्ड की नालिज व मेहनत से है | आपने कितनी मेहनत की है कितनी आप अपनी फिल्ड की नालिज रखते हैं इसी  पर आपकी सक्सेस निर्भर करती हैं | अगर सिर्फ पढ़े लिखे लोग ही सक्सेस होते तो कभी भी अनपढ़ या काम पढ़े लिखे लोग अपनी फिल्ड में सक्सेस नही हो पाते |  बिलगेट्स ,अंबानी ,मार्क जुगलबर्क्स जैसे लोगो को उनकी सक्सेस से कोई नही जानता | 









Thursday, April 25, 2019

मनुष्य अपनी नियति स्वयं ही निर्धारित करता है !!!

दोस्तों ! विक्टर ई फ्रैंकल कहते हैं कि यह विडंबना है इंसान का डर उसके सामने उस चीज को लाकर खड़ा कर देता है जिससे वह भयभीत होता है | ठीक उसी तरह जो काम मजबूरी में किए जाते हैं वे हमारे मजबूत इरादों में रूकावट बनते हैं | मनुष्य अपने जीवन को सिर्फ जीता नही है, बल्कि निरंतर तय करता रहता है कि आगे उसका जीवन ,उसका अस्तित्व कैसा होगा और अगले क्षण क्या बनेगा ?


मनुष्य अपनी नियति  स्वयं ही निर्धारित करता है | वह अपने पर्यावरण व अपनी परिस्थतियों के बीच जो भी बनता है स्वयं ही बनता है | मनुष्य के भीतर दोनों ही तरह की सम्भवनाएं उपस्थित हैं| उनमे से कौन सी संभावना साकार होगी ,यह उसकी अवस्थाओं  या परिस्थतियों पर नही बल्कि उसके द्वारा लिए गए निर्णयों पर आधारित है | 



मनुष्य को नकारत्मक पक्षों को सकारत्मक या रचनात्मक रूप देने की पूरी ताकत होती है | ख़ुशी के पीछे भागने से वह हासिल नहीं होगी वह स्वत: ही आपके जीवन में आती है | मनुष्य अपने लिए ख़ुशी की नही ,बल्कि खुश रहने की तलाश में रहता है | इसे पाने के लिए वह किसी भी हालात में छिपे अर्थ की पहंचानकर उसे साकार कर सकता है | 



एक बार जब मनुष्य की अर्थ की तलाश पूरी हो जाती है तो वह ना केवल उसे ख़ुशी देती है बल्कि उसे अपनी पीड़ा से पार पाने की क्षमता भी प्रदान करती है | लेकिन यदि किसी की अर्थ की तलाश पूरी ना  हो सके तो क्या होता है ?  हो सकता है वह स्थति उसके लिए घातक सिद्ध हो जाए |  यह भी सच है कि केवल दूसरों की भलाई करके ही अपना जीवन नही जिया जा सकता | लेकिन ऐसा करने से उनके हालात में सुधार जरूर हुआ है | 



यह मानना अच्छा है कि अनुभव लेना भी उपलब्धि हासिल करने के सामान एक महत्वपूर्ण बात है | क्युकि हम सदा आंतरिक जगत के बजाय ,बाहरी जगत पर अधिक ध्यान देते | इससे हमारी इस क्रिया की भरपाई हो जाती है | 



एक अर्थ पाने के लिए पीड़ा का होना जरूरी है | लेकिन जानबूझकर पीड़ा को सहन करने वाला मनुष्य एक नायक नहीं बल्कि एक आत्मपीड़िक होता है | प्राथमिकता केवल यही है कि हम पीड़ा देने वाली परिस्थति को कितनी रचनात्मकता के साथ बदल सकते हैं |

जिन लोगो को हर कोई आदर सम्मान देता है | वे कोई महान  कलाकार,महान वैज्ञानिक,  महान वक्त या महान खिलाड़ी नहीं बल्कि वे लोग हैं,जिन्होंने अपना सर ऊंचा रखते हुए अपने जीवन के हर कठिन संघर्ष का सामना किया है | जिंदगी को ऐसे जिओ ,मानो आप दूसरी बार जी रहे हो और आपको अपने पिछले जीवन की सारी भुलों को सुधारने का अवसर मिला हो | महान  चीजों को पाना जितना दुर्लभ होता है उनका अहसास होना भी उतना ही कठिन होता है |   









  






Tuesday, April 23, 2019

आप जैसे विचार करेंगे वैसे ही बन जाएंगे !!!





Image result for जैसे विचारमनुष्य के विचार ही उसके भाग्य का निर्माण करते हैं | व्यक्ति के विचार कोई अमूर्त या अशक्त भावनाएं नहीं हैं | विचार बड़े शक्तिमान ,जीवंत और गतिशील धाराएं हैं जो एक बार प्रकट होने के बाद दबाए नही जा सकते | शुभ विचार व्यक्ति को देवदूतों के सामान सुख समृद्धि और सफलता की और ले जाते हैं | और अशुभ व गंदे विचार व्यक्ति को अवनति और पतन के गर्त की और धकेलते हैं | 

विचारो की अवहेलना अथवा उनकी उपेक्षा करना उचित नही है  | शुभ विचारो के महत्व को समझकर उन्हें ग्रहण करना तथा अशुभ विचारो को त्याग देना ही श्रेयकर है | यदि आपके विचार स्वस्थ होंगे तो आपका स्वास्थ भी स्वस्थ रहेगा | 

विचारो को सिर्फ विचार समझकर अवॉइड ना करें | एक विचार हमे हंसाता है और एक रुलाता है आपने अनुभव भी किया होगा जब हमारे मन में एक नेगेटिव विचार आता है तो उसके बाद नैगेटिव विचारो की एक श्रखला बन जाती है और एक बाद एक नेगेटिव विचार आता जाता जिससे हम बिना किसी ठोस वजह  के ही हम परेशान हो जाता है | 

ऐसे ही कभी आपने अनुभव किया होगा कि बिना किसी वजह  के हम बहुत खुश रहते हैं | किसी भी कार्य का सर्जन विचार के रूप में ही होता है | जब कोई क्रिएटिव विचार आए तो थोड़ा रुकर उसका मंथन जरूर कर लेना चाहिए | हो सकता है वो विचार आपकी लाइफ चेंज करने की पावर रखता हो | एक विचार में ही संभावना होती है कि वह किसी को डॉक्टर ,इंजीनियर ,वकील या जज बना देता है | 



Friday, April 12, 2019

इंसान अपनी जिभ्या से अपनी कवर खोदता है !!!


जीभ को संभालकर रखें शब्द बिगडे या हैल्थ बिगड़े दोनों ही हार्मफुल हैं | 
इंसान को पहंचान ने के लिए प्रमाण पत्र की जरूरत नही है उसकी बोली से ही पता चल जाता है |  

जो धर्म से भृष्ट हो गया हो जिसने पाप करने का दृढ निष्चय कर लिया हो ऐसे व्यक्ति का त्याग करने से व्यक्ति ऐसे निर्भय हो जाता जैसे व्यक्ति हाथ पर बैठे सांप को त्याग देने 
                                 -विभीषण ( रामयण )

जो परिवार से विमुख हो जाता है उसका परमात्मा भी आदर नही करता - मेघनाथ (रामायण )

कोई भी महत्वपूर्ण कार्य बिना सोचे समझे नही करना चाहिए जिसके लिए बाद में पछताना पड़े इसलिए उचित ,अनुचित व परिणाम के बारे में सोच कर ही कार्य करें |  

पुत्र का कर्तव्य है जीते जी पिता की सेवा करना मृत्यु के बाद सुगति दिलाना | 

ये विश्वास रखो सपने पुरे होने में देर नही लगती | 
- तिरजटा राक्षसी  

अपने शरीर को स्वस्थ रखना पहला धर्म है -हनुमान जी 

जिसके पास सत्य है धर्म है ईश्वर भी उसकी रक्षा करता है | 

रामायण में हर संशय का समाधान है | 

देव -देव आलसी लोग करते हैं जिनमे संघर्ष करने की शक्ति नही है | 
-लक्ष्मण 

ईश्वर पर भरोषा करना कायरता नही है | मनुष्य के पास शक्ति केवल काम करने की है उसका फल विधाता के हाथ है | 

सुख और दुःख तो केवल मन की स्थति का नाम है | किसी को दोष देने से किस्मत नही बदल जाती मनुष्य अपने ही कर्मो का फल पाता है | 


महाभारत में लिखा है कि - " जो इंसान अपने कार्य से आशाए व इच्छाएं नही रखता उसी व्यक्ति के कार्य पूर्ण होते हैं | एक असफलता से दुखी होकर जिसका मन नही डोलता ,एक सफलता से आनंदित होकर खुद को श्रेष्ठ नही मानता ऐसा व्यक्ति जीवन में बार - बार सफल होता है "  

Monday, April 8, 2019

सफलता की गारंटी !!!

हाय दोस्तों में ललतेश यादव ! दोस्तों आप क्या मानते हो कि सफलता हमारी मेहनत, प्लानिंग, जनून से मिलती है ? या इसका कोई और कारण है ? में ऐसा नहीं मानती मेरा मानना है कि परमात्मा ने हर इंसान को कोई ना कोई टैलेंट दिया है किस्मत में कुछ विशेष लिखा है और जो जिसके जीवन में लिखा है वैसा ही उसके जीवन में होकर रहता है | मम्मी कहती थी कि -

" देश ,काल और पात्र का जब मिलता संयोग ,करता को ढूढे कर्म" 


जो होना होता है वैसी  ही परिस्थति वैसे ही संयोग वैसा ही माहौल बनता चला जाता है वैसे लोग तुम से जुड़ते चले जाते हैं | आपने देखा होगा कि कई बार छोटी सी बात से परिस्थति बिगड जाती है और तब इंसान लाख कोशिस करने के बाबजूद भी उसे नही संभाल पाता | और कई बार बड़ी से बड़ी परेशानी को भी चुटकियों मे हल कर लेते हैं| 

कई लोगों के साथ हमारा काफी मनमुटाव होने के बाबजूद भी रिश्ते बने रहते है कई बार बिना किसी ठोस वजह के भी  हमारे रिश्ते बिगड़  जाते हैं | इन सभी बातों का क्या मतलब है ? में तो यही मानती हूँ इंसान सिर्फ एक कठपुतली है वह सिर्फ परमात्मा के नचाये नाचता  है | जैसे परमात्मा को नचाना होता है वैसे ही उसकी बुद्धि ,परिस्थति, संयोग, और तो ओर दोस्त भी वैसे ही मिला देता है |  

अगर ऐसा ना होता तो आप देखते हो कि एक घर में एक बच्चा पेरेंट्स का नाम रोशन करता है और दूसरा उनकी बदनामी का कारण बन जाता है | एक बच्चा हर सुख देने की कोशिस करता है और एक टेशन के सिवाय कुछ देता ही नहीं है | 

जो सुख दे रहा है उसके साथ हमारे अच्छे कर्मो का संयोग  है और जो दुःख दे रहा है उसके साथ हमारा दुःख का ही संयोग है | इस लिए लाइफ में जो भी हो रहा है अच्छा या बुरा उसे अपने ही कर्म का फल मानकर स्वीकार कर लो | इसका मतलब ये नही है कि उसे सुधारने की कोशिस ना की जाए इसका मतलब ये है की अगर लाख कोशिस  करने से भी नही संभल पा रहा  हो तो उसे स्वीकार कर लो  समय के अनुसार सब ठीक हो जाता है | मेरी मम्मी कहती थी -

" मौन रहो धैर्य रखो ,समय आने पर सब ठीक  जायेगा "

ऐसे ही अगर आपकी हर कोशिस करने पर भी आप कामयाब नहीं हो रहे तो आप बारीकी से चिंतन करो उसका सलूशन निकालो और फिर भी आप को रास्ता नजर नही आ रहा तो आप उसे समय पर छोड़ दो समय उसका रास्ता निकल ही देगा | परमात्मा में आस्था रखो | आस्था से आज भी चमत्कार होते हैं |  

एक बात और आप लोगो से कहना चाहुगी की सफलता या असफ़लत के बारे में ज्यादा मत सोचो बस जिस काम को कर रहे हो उसे करते जाओ उसे इंजॉय करो उस पर डटे रहो परिस्थतियों के बिगड़ने या निदा से घबराकर अपने लक्ष्य को ना छोड़े क्यों कि लक्ष्य मिलते ही निंदा करने वालो की राय बदल जाती है |